अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نُسَوِّيكُمْ (नुसव्वीकुम): हम तुम्हें बराबर ठहराते थे, तुम्हें समान मानते थे।
- بِرَبِّ الْعَالَمِينَ (बिरब्बिल आलमीन): सारे जहानों के पालनहार के साथ।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह उस हालत का ज़िक्र है जब दोज़ख़ (नरक) में पहुँचकर काफ़िर और मुशरिक लोग अपनी ग़लती पर पछतावा करते हुए कहेंगे कि "अल्लाह की क़सम! हम दुनिया में खुले और साफ़ गुमराही में थे, क्योंकि हम तुम्हें (अपने माबूदों को) सारे जहानों के पालनहार अल्लाह के बराबर ठहराते थे और तुम्हारी इबादत करते थे, जैसे हम अल्लाह की इबादत करते थे।"
यानी उन्होंने मख़लूक़ (पैदा की हुई चीज़ों) को ख़ालिक़ (पैदा करने वाले) के बराबर कर दिया था। वे पत्थरों, मूर्तियों, जिन्नों, इंसानों या किसी भी मख़लूक़ को अल्लाह के साथ इबादत में शरीक करते थे, और यही उनकी सबसे बड़ी भूल थी। यह क़ुरआन की वह आयत है जो उन लोगों के क़ौल को बयान करती है जो दोज़ख़ में अपने बुज़ुर्गों और रहनुमाओं से झगड़ते हुए कहेंगे कि "हम तुम्हें रब्बुल आलमीन के बराबर मानते थे और तुम्हारी इबादत करते थे, और यही हमारी तबाही का सबब बना।"
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें बड़ी सबक़ सिखाती है कि अल्लाह के सिवा किसी को उसका दर्जा देना, किसी को उसके बराबर समझना, किसी से उसी तरह डरना, उम्मीद रखना या उसी तरह मुहब्बत करना जैसे अल्लाह से करनी चाहिए — यह सबसे बड़ी गुमराही है। अल्लाह ही इबादत के लायक़ है, वही रब्बुल आलमीन है, सारे जहानों का पालनहार और मालिक है। हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करें, उसी से मदद माँगें, और किसी भी मख़लूक़ को उसका हक़ न दें। यही सच्ची नजात (मुक्ति) का रास्ता है। क़ुरआन हमें आगाह करता है कि उस दिन पछतावा किसी काम नहीं आएगा, इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ और शिर्क से बचें, क्योंकि शिर्क सबसे बड़ा ज़ुल्म और सबसे बड़ी गुमराही है।
📜 आयत 96-100 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 98
सूरा अश-शुआरा आयत 98 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि हम तुम को सारे जहाँन के पालने वाले (ख़ुदा)…सूरा आयत 98/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 96–100. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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