अश-शुआरा · 98/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
إِذْ نُسَوِّيكُم بِرَبِّ الْعَالَمِينَ ۝٩٨
Iz nusawweekum bi Rabbil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
कि हम तुम को सारे जहाँन के पालने वाले (ख़ुदा) के बराबर समझते रहे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نُسَوِّيكُمْ (नुसव्वीकुम): हम तुम्हें बराबर ठहराते थे, तुम्हें समान मानते थे।
  • بِرَبِّ الْعَالَمِينَ (बिरब्बिल आलमीन): सारे जहानों के पालनहार के साथ।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह उस हालत का ज़िक्र है जब दोज़ख़ (नरक) में पहुँचकर काफ़िर और मुशरिक लोग अपनी ग़लती पर पछतावा करते हुए कहेंगे कि "अल्लाह की क़सम! हम दुनिया में खुले और साफ़ गुमराही में थे, क्योंकि हम तुम्हें (अपने माबूदों को) सारे जहानों के पालनहार अल्लाह के बराबर ठहराते थे और तुम्हारी इबादत करते थे, जैसे हम अल्लाह की इबादत करते थे।"

यानी उन्होंने मख़लूक़ (पैदा की हुई चीज़ों) को ख़ालिक़ (पैदा करने वाले) के बराबर कर दिया था। वे पत्थरों, मूर्तियों, जिन्नों, इंसानों या किसी भी मख़लूक़ को अल्लाह के साथ इबादत में शरीक करते थे, और यही उनकी सबसे बड़ी भूल थी। यह क़ुरआन की वह आयत है जो उन लोगों के क़ौल को बयान करती है जो दोज़ख़ में अपने बुज़ुर्गों और रहनुमाओं से झगड़ते हुए कहेंगे कि "हम तुम्हें रब्बुल आलमीन के बराबर मानते थे और तुम्हारी इबादत करते थे, और यही हमारी तबाही का सबब बना।"

दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें बड़ी सबक़ सिखाती है कि अल्लाह के सिवा किसी को उसका दर्जा देना, किसी को उसके बराबर समझना, किसी से उसी तरह डरना, उम्मीद रखना या उसी तरह मुहब्बत करना जैसे अल्लाह से करनी चाहिए — यह सबसे बड़ी गुमराही है। अल्लाह ही इबादत के लायक़ है, वही रब्बुल आलमीन है, सारे जहानों का पालनहार और मालिक है। हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करें, उसी से मदद माँगें, और किसी भी मख़लूक़ को उसका हक़ न दें। यही सच्ची नजात (मुक्ति) का रास्ता है। क़ुरआन हमें आगाह करता है कि उस दिन पछतावा किसी काम नहीं आएगा, इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ और शिर्क से बचें, क्योंकि शिर्क सबसे बड़ा ज़ुल्म और सबसे बड़ी गुमराही है।



📜 आयत 96-100 — सूरा अश-शुआरा

96قَالُوا وَهُمْ فِيهَا يَخْتَصِمُونَ
और ये लोग जहन्नुम में बाहम झगड़ा करेंगे और अपने माबूद से कहेंगे
97تَاللَّهِ إِن كُنَّا لَفِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
ख़ुदा की क़सम हम लोग तो यक़ीनन सरीही गुमराही में थे
98إِذْ نُسَوِّيكُم بِرَبِّ الْعَالَمِينَ
कि हम तुम को सारे जहाँन के पालने वाले (ख़ुदा) के बराबर समझते रहे
99وَمَا أَضَلَّنَا إِلَّا الْمُجْرِمُونَ
और हमको बस (उन) गुनाहगारों ने (जो मुझसे पहले हुए) गुमराह किया
100فَمَا لَنَا مِن شَافِعِينَ
तो अब तो न कोई (साहब) मेरी सिफारिश करने वाले हैं
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
98आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 98

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Friday, October 2, 2026

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