अन-नमल · 78/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُم بِحُكْمِهِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْعَلِيمُ ۝٧٨
Inna Rabbaka yaqdee bainahum bihukmih; wa Huwal `Azeezul `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) बेशक तुम्हारा परवरदिगार अपने हुक्म से उनके आपस (के झगड़ों) का फैसला कर देगा और वह (सब पर) ग़ालिब और वाक़िफकार है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَقْضِي (फैसला करता है) — न्याय करना, फ़ैसला सुनाना।
  • بِحُكْمِهِ (अपने फैसले के साथ) — अपने न्याय और अदल के अनुसार।
  • الْعَزِيزُ (सबसे शक्तिशाली) — जो ग़ालिब हो, जिसके फ़ैसले को कोई टाल न सके।
  • الْعَلِيمُ (सब कुछ जानने वाला) — जिसे हर चीज़ का पूरा इल्म हो, जिसके ज्ञान से कोई चीज़ छिपी न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपका रब उन लोगों के बीच जो हक़ (सत्य) और बातिल (असत्य) में मतभेद रखते हैं — चाहे वे बनी इसराईल हों या कोई और — क़यामत के दिन अपने पूरे न्याय और अदल के साथ फ़ैसला करेगा। वहाँ कोई भी चीज़ उसके इल्म से बाहर नहीं होगी। वह मोमिनों पर रहमत करेगा और काफ़िरों को उनके कर्मों का बदला देगा।

याद रखिए, अल्लाह का फ़ैसला कभी रद्द नहीं होता, क्योंकि वह अज़ीज़ है — यानी सबसे शक्तिशाली और ग़ालिब है। उसके फ़ैसले के आगे कोई ताक़त खड़ी नहीं हो सकती। और वह अलीम है — यानी हर चीज़ का जानने वाला है। उससे कोई हक़ छिपा नहीं, कोई बातिल उसके सामने सच नहीं बन सकती। वह जानता है कि कौन सच्चा है और कौन झूठा, कौन नेक है और कौन बदकार।

यह आयत हमें बड़ी तसल्ली देती है। जब हम देखते हैं कि दुनिया में ज़ुल्म हो रहा है, सच को दबाया जा रहा है, और बातिल को बढ़ावा मिल रहा है, तो हमारा दिल उदास हो सकता है। लेकिन अल्लाह हमें यक़ीन दिलाता है कि यह दुनिया आख़िरी मंज़िल नहीं है। एक दिन ज़रूर आएगा जब अल्लाह अपने न्याय से हर झूठ को बेनक़ाब करेगा और हर सच को सरबुलंद करेगा।

तो ऐ मोमिन! आप अपने रब के फ़ैसले पर भरोसा रखें। जल्दबाज़ी न करें। अल्लाह की तरफ़ से इंसाफ़ का वादा पक्का है। और जो लोग आज हक़ को ठुकरा रहे हैं, उन्हें याद दिलाइए कि जिस रब का फ़ैसला कभी टलता नहीं, वही उनके बीच भी फ़ैसला करेगा। उस दिन कोई अपने किए से बच नहीं पाएगा। यही हमारे दीन की असली ताक़त है — कि हमारा रब अज़ीज़ भी है और अलीम भी। उसकी ताक़त के आगे कोई नहीं, और उसके इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं। क्या ही खूबसूरत बात है कि हम उसी पर भरोसा करें और उसी से मदद माँगें।



📜 आयत 76-80 — अन-नमल

76إِنَّ هَٰذَا الْقُرْآنَ يَقُصُّ عَلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَكْثَرَ الَّذِي هُمْ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
इसमें भी शक नहीं कि ये क़ुरान बनी इसराइल पर उनकी अक्सर बातों को जिन में ये इख्तेलाफ़ करते हैं ज़ाहिर कर देता है
77وَإِنَّهُ لَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّلْمُؤْمِنِينَ
और इसमें भी शक नहीं कि ये कुरान ईमानदारों के वास्ते अज़सरतापा हिदायत व रहमत है
78إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُم بِحُكْمِهِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْعَلِيمُ
(ऐ रसूल) बेशक तुम्हारा परवरदिगार अपने हुक्म से उनके आपस (के झगड़ों) का फैसला कर देगा और वह (सब पर) ग़ालिब और वाक़िफकार है
79فَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۖ إِنَّكَ عَلَى الْحَقِّ الْمُبِينِ
तो (ऐ रसूल) तुम खुदा पर भरोसा रखो बेशक तुम यक़ीनी सरीही हक़ पर हो
80إِنَّكَ لَا تُسْمِعُ الْمَوْتَىٰ وَلَا تُسْمِعُ الصُّمَّ الدُّعَاءَ إِذَا وَلَّوْا مُدْبِرِينَ
बेशक न तो तुम मुर्दों को (अपनी बात) सुना सकते हो और न बहरों को अपनी आवाज़ सुना सकते हो (ख़ासकर) जब वह पीठ फेर कर भाग ख़डें हो
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीRevelation
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अनुवाद — अन-नमल 78

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Tuesday, August 18, 2026

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