अन-नमल · 79/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
فَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۖ إِنَّكَ عَلَى الْحَقِّ الْمُبِينِ ۝٧٩
Fatawakkal `alal laahi innaka `alal haqqil mubeen
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) तुम खुदा पर भरोसा रखो बेशक तुम यक़ीनी सरीही हक़ पर हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَتَوَكَّلْ – भरोसा करो, अपना मामला सौंप दो
  • عَلَى الْحَقِّ الْمُبِينِ – स्पष्ट और प्रकट सत्य पर

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप अपने सभी मामलों में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसी पर पूर्ण आश्वस्त रहें। यह भरोसा केवल ज़ुबानी नहीं, बल्कि दिल की गहराई से होना चाहिए — यह जानते हुए कि अल्लाह ही सब कुछ करने की शक्ति रखता है, वही आपकी रक्षा करने वाला, सहायता करने वाला और विजय दिलाने वाला है।

आप जिस मार्ग पर हैं, वह सत्य का मार्ग है — बिल्कुल स्पष्ट और प्रकट, जिसमें कोई संदेह नहीं। यही वह सत्य है जो अल्लाह ने उतारा है, और यही धर्म — इस्लाम — सबसे उज्ज्वल और स्पष्ट सत्य है। जब आप सत्य पर हैं, तो आपको किसी की परवाह नहीं करनी चाहिए, न विरोधियों की ताकत से डरना चाहिए, न उनकी बातों से दुखी होना चाहिए।

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक महान शिक्षा है जो अल्लाह के मार्ग पर चलता है। जब आपको यकीन हो कि आप सत्य पर हैं, तो अल्लाह पर भरोसा करें — वह आपको कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। अल्लाह का वादा है कि वह सत्य का साथ देता है, और झूठ चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, अंततः मिट जाता है।

तो ऐ मोमिन! आप भी इसी शिक्षा को अपनाएँ — अपने जीवन के हर क्षेत्र में अल्लाह पर भरोसा रखें, उसी से मदद माँगें, और यकीन रखें कि जो अल्लाह के साथ है, उसे कभी हार नहीं सकती। यही वह रास्ता है जो आपको दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाएगा। अल्लाह आपका हिमायती है, और उसकी मदद से बड़ी से बड़ी मुश्किलें आसान हो जाती हैं।



📜 आयत 77-81 — अन-नमल

77وَإِنَّهُ لَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّلْمُؤْمِنِينَ
और इसमें भी शक नहीं कि ये कुरान ईमानदारों के वास्ते अज़सरतापा हिदायत व रहमत है
78إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُم بِحُكْمِهِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْعَلِيمُ
(ऐ रसूल) बेशक तुम्हारा परवरदिगार अपने हुक्म से उनके आपस (के झगड़ों) का फैसला कर देगा और वह (सब पर) ग़ालिब और वाक़िफकार है
79فَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۖ إِنَّكَ عَلَى الْحَقِّ الْمُبِينِ
तो (ऐ रसूल) तुम खुदा पर भरोसा रखो बेशक तुम यक़ीनी सरीही हक़ पर हो
80إِنَّكَ لَا تُسْمِعُ الْمَوْتَىٰ وَلَا تُسْمِعُ الصُّمَّ الدُّعَاءَ إِذَا وَلَّوْا مُدْبِرِينَ
बेशक न तो तुम मुर्दों को (अपनी बात) सुना सकते हो और न बहरों को अपनी आवाज़ सुना सकते हो (ख़ासकर) जब वह पीठ फेर कर भाग ख़डें हो
81وَمَا أَنتَ بِهَادِي الْعُمْيِ عَن ضَلَالَتِهِمْ ۖ إِن تُسْمِعُ إِلَّا مَن يُؤْمِنُ بِآيَاتِنَا فَهُم مُّسْلِمُونَ
और न तुम अंधें को उनकी गुमराही से राह पर ला सकते हो तुम तो बस उन्हीं लोगों को (अपनी बात) सुना सकते हो जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं
अन-नमलकुरान सूची
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अनुवाद — अन-नमल 79

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Tuesday, August 18, 2026

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