Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَهْتَزُّ: हिलना-डुलना, हरकत करना
- جَانٌّ: साँप की एक छोटी और बहुत तेज़ चाल वाली प्रजाति
- وَلَّى مُدْبِرًا: पीठ फेरकर भागना
- وَلَمْ يُعَقِّبْ: पीछे मुड़कर न देखना, बिना रुके भागते रहना
तफ़सीर (व्याख्या):
जब मूसा (अलैहिस्सलाम) आग के पास पहुँचे, तो अल्लाह तआला ने उन्हें अपनी पवित्र घाटी में बुलाया और उन्हें दो आदेश दिए। पहला आदेश यह था कि वे अपनी लाठी ज़मीन पर डाल दें। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब के हुक्म की तामील करते हुए लाठी ज़मीन पर डाल दी। जैसे ही लाठी ज़मीन पर पड़ी, अल्लाह की क़ुदरत से वह एक साँप बन गई जो तेज़ी से इधर-उधर हिल रहा था। उसकी गति इतनी तेज़ थी कि वह छोटे साँप की तरह फुर्ती से दौड़ रहा था।
यह मंज़र देखकर मूसा (अलैहिस्सलाम) बहुत डर गए। वे इंसान थे, और किसी भी इंसान के लिए अचानक अपनी लाठी को साँप बनते देखना बेहद भयावह होता है। वे डर के मारे पीछे भागे और पीछे मुड़कर भी नहीं देखा। उनका डर इतना सख्त था कि वे बिना रुके भागते चले गए।
तभी अल्लाह तआला ने उन्हें पुकारा: "ऐ मूसा! मेरी तरफ आओ, डरो मत। तुम उन लोगों में से हो जो पूरी तरह सुरक्षित हैं।" यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी थी कि उसने अपने नबी को दिलासा दिया और उनके डर को दूर किया।
दावती पहलू और सबक:
यह घटना हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर कितना मेहरबान है। जब बंदा अल्लाह के हुक्म की तामील करता है, तो अल्लाह उसे अकेला नहीं छोड़ता। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने जैसे ही अल्लाह का हुक्म माना, अल्लाह ने उन्हें हिम्मत दी और डर से निकाला। यह हमारे लिए भी एक बड़ा सबक है कि जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं और उसके हुक्मों पर अमल करते हैं, तो वह हमारी हिफाज़त करता है और हमें हर मुश्किल से निकालता है।
इसके अलावा, यह घटना हमें बताती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे हर चीज़ बेबस है। एक साधारण लाठी अल्लाह के हुक्म से साँप बन सकती है, और वही अल्लाह चाहे तो उसे फिर से लाठी बना सकता है। अल्लाह की ताकत और रहमत की कोई सीमा नहीं है। हमें चाहिए कि हम हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से कभी निराश न हों। अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफाज़त करता है और उन्हें हर खतरे से बचाता है।
📜 आयत 29-33 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 31
सूरा अल-क़सस आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और यह (भी आवाज़ आयी) कि तुम आपनी छड़ी (ज़मीन…सूरा आयत 31/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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