अल-क़सस · 31/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
وَأَنْ أَلْقِ عَصَاكَ ۖ فَلَمَّا رَآهَا تَهْتَزُّ كَأَنَّهَا جَانٌّ وَلَّىٰ مُدْبِرًا وَلَمْ يُعَقِّبْ ۚ يَا مُوسَىٰ أَقْبِلْ وَلَا تَخَفْ ۖ إِنَّكَ مِنَ الْآمِنِينَ ۝٣١
Wa an alqi `asaaka falam maa ra aahaa tahtazzu ka annnahaa jaaannunw wallaa mudbiranw wa lam yu`aqqib; yaa Moosaa aqbil wa laa takhaf innaka minal aamineen
📖 हिंदी अर्थ
और यह (भी आवाज़ आयी) कि तुम आपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दो फिर जब (डाल दिया तो) देखा कि वह इस तरह बल खा रही है कि गोया वह (ज़िन्दा) अजदहा है तो पीठ फेरके भागे और पीछे मुड़कर भी न देखा (तो हमने फरमाया) ऐ मूसा आगे आओ और डरो नहीं तुम पर हर तरह अमन व अमान में हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَهْتَزُّ: हिलना-डुलना, हरकत करना
  • جَانٌّ: साँप की एक छोटी और बहुत तेज़ चाल वाली प्रजाति
  • وَلَّى مُدْبِرًا: पीठ फेरकर भागना
  • وَلَمْ يُعَقِّبْ: पीछे मुड़कर न देखना, बिना रुके भागते रहना

तफ़सीर (व्याख्या):

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) आग के पास पहुँचे, तो अल्लाह तआला ने उन्हें अपनी पवित्र घाटी में बुलाया और उन्हें दो आदेश दिए। पहला आदेश यह था कि वे अपनी लाठी ज़मीन पर डाल दें। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब के हुक्म की तामील करते हुए लाठी ज़मीन पर डाल दी। जैसे ही लाठी ज़मीन पर पड़ी, अल्लाह की क़ुदरत से वह एक साँप बन गई जो तेज़ी से इधर-उधर हिल रहा था। उसकी गति इतनी तेज़ थी कि वह छोटे साँप की तरह फुर्ती से दौड़ रहा था।

यह मंज़र देखकर मूसा (अलैहिस्सलाम) बहुत डर गए। वे इंसान थे, और किसी भी इंसान के लिए अचानक अपनी लाठी को साँप बनते देखना बेहद भयावह होता है। वे डर के मारे पीछे भागे और पीछे मुड़कर भी नहीं देखा। उनका डर इतना सख्त था कि वे बिना रुके भागते चले गए।

तभी अल्लाह तआला ने उन्हें पुकारा: "ऐ मूसा! मेरी तरफ आओ, डरो मत। तुम उन लोगों में से हो जो पूरी तरह सुरक्षित हैं।" यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी थी कि उसने अपने नबी को दिलासा दिया और उनके डर को दूर किया।

दावती पहलू और सबक:

यह घटना हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर कितना मेहरबान है। जब बंदा अल्लाह के हुक्म की तामील करता है, तो अल्लाह उसे अकेला नहीं छोड़ता। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने जैसे ही अल्लाह का हुक्म माना, अल्लाह ने उन्हें हिम्मत दी और डर से निकाला। यह हमारे लिए भी एक बड़ा सबक है कि जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं और उसके हुक्मों पर अमल करते हैं, तो वह हमारी हिफाज़त करता है और हमें हर मुश्किल से निकालता है।

इसके अलावा, यह घटना हमें बताती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे हर चीज़ बेबस है। एक साधारण लाठी अल्लाह के हुक्म से साँप बन सकती है, और वही अल्लाह चाहे तो उसे फिर से लाठी बना सकता है। अल्लाह की ताकत और रहमत की कोई सीमा नहीं है। हमें चाहिए कि हम हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से कभी निराश न हों। अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफाज़त करता है और उन्हें हर खतरे से बचाता है।



📜 आयत 29-33 — अल-क़सस

29۞ فَلَمَّا قَضَىٰ مُوسَى الْأَجَلَ وَسَارَ بِأَهْلِهِ آنَسَ مِن جَانِبِ الطُّورِ نَارًا قَالَ لِأَهْلِهِ امْكُثُوا إِنِّي آنَسْتُ نَارًا لَّعَلِّي آتِيكُم مِّنْهَا بِخَبَرٍ أَوْ جَذْوَةٍ مِّنَ النَّارِ لَعَلَّكُمْ تَصْطَلُونَ
ग़रज़ मूसा का छोटी लड़की से निकाह हो गया और रहने लगे फिर जब मूसा ने अपनी (दस बरस की) मुद्दत पूरी की और बीवी को लेकर चले तो अंधेरीरात जाड़ों के दिन राह भूल गए और बीबी सफ़ूरा को दर्द ज़ेह शुरु हुआ (इतने में) कोहेतूर की तरफ आग दिखायी दी तो अपने लड़के बालों से कहा तुम लोग ठहरो मैने यक़ीनन आग देखी है (मै वहाँ जाता हूँ) क्या अजब है वहाँ से (रास्ते की) कुछ ख़बर लाऊँ या आग की कोई चिंगारी (लेता आऊँ) ताकि तुम लोग तापो
30فَلَمَّا أَتَاهَا نُودِيَ مِن شَاطِئِ الْوَادِ الْأَيْمَنِ فِي الْبُقْعَةِ الْمُبَارَكَةِ مِنَ الشَّجَرَةِ أَن يَا مُوسَىٰ إِنِّي أَنَا اللَّهُ رَبُّ الْعَالَمِينَ
ग़रज़ जब मूसा आग के पास आए तो मैदान के दाहिने किनारे से इस मुबारक जगह में एक दरख्त से उन्हें आवाज़ आयी कि ऐ मूसा इसमें शक नहीं कि मै ही अल्लाह सारे जहाँ का पालने वाला हूँ
31وَأَنْ أَلْقِ عَصَاكَ ۖ فَلَمَّا رَآهَا تَهْتَزُّ كَأَنَّهَا جَانٌّ وَلَّىٰ مُدْبِرًا وَلَمْ يُعَقِّبْ ۚ يَا مُوسَىٰ أَقْبِلْ وَلَا تَخَفْ ۖ إِنَّكَ مِنَ الْآمِنِينَ
और यह (भी आवाज़ आयी) कि तुम आपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दो फिर जब (डाल दिया तो) देखा कि वह इस तरह बल खा रही है कि गोया वह (ज़िन्दा) अजदहा है तो पीठ फेरके भागे और पीछे मुड़कर भी न देखा (तो हमने फरमाया) ऐ मूसा आगे आओ और डरो नहीं तुम पर हर तरह अमन व अमान में हो
32اسْلُكْ يَدَكَ فِي جَيْبِكَ تَخْرُجْ بَيْضَاءَ مِنْ غَيْرِ سُوءٍ وَاضْمُمْ إِلَيْكَ جَنَاحَكَ مِنَ الرَّهْبِ ۖ فَذَانِكَ بُرْهَانَانِ مِن رَّبِّكَ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
(अच्छा और लो) अपना हाथ गरेबान में डालो (और निकाल लो) तो सफेद बुर्राक़ होकर बेऐब निकल आया और ख़ौफ की (वजह) से अपने बाजू अपनी तरफ समेट लो (ताकि ख़ौफ जाता रहे) ग़रज़ ये दोनों (असा व यदे बैज़ा) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारी नुबूवत की) दो दलीलें फिरऔन और उसके दरबार के सरदारों के वास्ते हैं और इसमें शक नहीं कि वह बदकार लोग थे
33قَالَ رَبِّ إِنِّي قَتَلْتُ مِنْهُمْ نَفْسًا فَأَخَافُ أَن يَقْتُلُونِ
मूसा ने अर्ज़ की परवरदिगार मैने उनमें से एक शख्स को मार डाला था तो मै डरता हूँ कहीं (उसके बदले) मुझे न मार डालें
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अनुवाद — अल-क़सस 31

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Tuesday, August 18, 2026

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