अस-सजदा · 30/30
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-सजदा
فَأَعْرِضْ عَنْهُمْ وَانتَظِرْ إِنَّهُم مُّنتَظِرُونَ ۝٣٠
Fa a`rid `anhum wantazir innahum muntazirron
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ तुम उनकी बातों का ख्याल छोड़ दो और तुम मुन्तज़िर रहो (आख़िर) वह लोग भी तो इन्तज़ार कर रहे हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأَعْرِضْ عَنْهُمْ — उनसे मुँह मोड़ लो, उनकी परवाह मत करो।
  • وَانتَظِرْ — और (अल्लाह के फैसले का) इंतज़ार करो।
  • إِنَّهُم مُّنتَظِرُونَ — वे भी (तुम्हारे लिए बुराई के) इंतज़ार में हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! जब ये मुशरिकीन अपनी ज़िद, हठ और झूठ पर अड़े रहते हैं, और तुम्हारी बात मानने से इनकार करते हैं, तो तुम उनसे किनारा कर लो और उनकी बातों की परवाह मत करो। उनके इस रवैये से दुखी मत हो, क्योंकि अल्लाह तुम्हारे साथ है और वही सबसे बेहतर फैसला करने वाला है।

तुम उस वादे का इंतज़ार करो जो अल्लाह ने तुमसे किया है — कि वह तुम्हें इन ज़ालिमों पर ग़लबा (विजय) देगा, तुम्हारे दीन को बुलंद करेगा और इनके मक्र (चाल) को नाकाम करेगा। ये लोग ज़रूर अपनी आँखों से देख लेंगे कि अल्लाह का वादा सच्चा है।

ये मुशरिकीन खुद भी तुम्हारे लिए बुराई के इंतज़ार में बैठे हैं — वे सोचते हैं कि कब तुम पर कोई मुसीबत आए, कब तुम्हारा काम तबाह हो, कब तुम्हारी शक्ति कमज़ोर पड़े। लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि असली अंजाम अल्लाह के हाथ में है। वे जो इंतज़ार कर रहे हैं, वह उन्हीं पर उलटकर आएगा। अल्लाह ने अपने नबी की मदद का वादा किया है, और अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता।

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक पाठ है जो हक़ (सच्चाई) पर हो और जिसे लोग ठुकरा रहे हों। जब तुम सच्चाई पर हो और लोग तुम्हारा मज़ाक उड़ाएँ या तुम्हें नुकसान पहुँचाना चाहें, तो घबराओ मत। अल्लाह पर भरोसा रखो, उसकी मदद का इंतज़ार करो, और यक़ीन रखो कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।

इस आयत में एक बड़ी खुशखबरी है — कि अल्लाह अपने नबी और उनके साथियों की मदद करेगा, और यह वादा पूरा हुआ। मुशरिकीन को शर्मिंदगी और हार का सामना करना पड़ा, और इस्लाम का झंडा बुलंद हुआ। यह हर उस शख्स के लिए एक उम्मीद है जो अल्लाह की राह में मेहनत करता है — कि अंजाम हमेशा मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के लिए होता है।



📜 आयत 28-30 — सूरा अस-सजदा

28وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْفَتْحُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और ये लोग कहते है कि अगर तुम लोग सच्चे हो (कि क़यामत आएगी) तो (आख़िर) ये फैसला कब होगा
29قُلْ يَوْمَ الْفَتْحِ لَا يَنفَعُ الَّذِينَ كَفَرُوا إِيمَانُهُمْ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि फैसले के दिन कुफ्फ़ार को उनका ईमान लाना कुछ काम न आएगा और न उनको (इसकी) मोहलत दी जाएगी
30فَأَعْرِضْ عَنْهُمْ وَانتَظِرْ إِنَّهُم مُّنتَظِرُونَ
ग़रज़ तुम उनकी बातों का ख्याल छोड़ दो और तुम मुन्तज़िर रहो (आख़िर) वह लोग भी तो इन्तज़ार कर रहे हैं
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30आयत

अनुवाद — अस-सजदा 30

सूरा अस-सजदा आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ तुम उनकी बातों का ख्याल छोड़ दो और तुम…

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Thursday, October 1, 2026

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