Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَوْمَ الْفَتْحِ: निर्णय का दिन, अर्थात् क़ियामत का दिन जब सत्य और असत्य के बीच अंतिम फ़ैसला होगा।
- لَا يَنفَعُ: कोई लाभ नहीं देगा, काम नहीं आएगा।
- يُنظَرُونَ: उन्हें मोहलत दी जाएगी, देर की जाएगी, या उन्हें फिर से मौका दिया जाएगा।
विस्तृत तफ़सीर:
ऐ नबी! आप इन काफ़िरों से कह दीजिए कि जिस दिन का वादा किया जा रहा है, वह "फ़तह" (निर्णय और फ़ैसले) का दिन है—यानी क़ियामत का दिन। उस दिन अल्लाह तआला सच्चे और झूठे के बीच अंतिम फ़ैसला करेगा, और मोमिनीन को काफ़िरों पर पूरी विजय और स्पष्ट प्रभुत्व प्रदान करेगा।
उस दिन जो लोग दुनिया में अल्लाह और उसके रसूल को नकारते रहे, उनका ईमान लाना बिल्कुल भी काम नहीं आएगा। क्योंकि ईमान तो उसी वक़्त क़बूल होता है जब वह ग़ैब (परोक्ष) पर विश्वास करके लाया जाए, न कि जब आँखों से आज़ाब और मौत को देख लिया जाए। जब वे क़ियामत के मंज़र देख लेंगे, तो उनका यह देर से किया गया ईमान उन्हें किसी भी अज़ाब से नहीं बचा सकेगा।
और न ही उन्हें कोई मोहलत दी जाएगी—न तो तौबा करने के लिए, न पलटने के लिए, और न ही दुनिया में लौटकर अच्छे कर्म करने के लिए। वह दिन ऐसा दिन होगा जब हर आँख खुल जाएगी, हर पर्दा उठ जाएगा, और हर राज़ खुल जाएगा, लेकिन तब खुलने वाली आँखें और सुनने वाले कान किसी काम के नहीं रहेंगे।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हम मुसलमानों के लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है कि हम उस दिन का इंतज़ार न करें जब ईमान लाना बेकार हो जाए। आज हमारे पास ज़िंदगी है, दिल है, और तौबा का दरवाज़ा खुला है। अल्लाह तआला अपनी रहमत से हमें मौका दे रहा है कि हम अपने गुनाहों से तौबा करें, अपने ईमान को मज़बूत करें, और अच्छे कर्म करें।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि ईमान की क़ीमत उस वक़्त है जब वह दिल की गहराई से, बिना देखे, सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा करके लाया जाए। आइए हम आज ही अपने रब की तरफ़ रुजू करें, अपनी ज़िंदगी को सुधारें, और उस दिन की शर्मिंदगी से बचें जब ईमान और तौबा दोनों बेकार हो जाएंगे। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 27-30 — सूरा अस-सजदा
अनुवाद — अस-सजदा 29
सूरा अस-सजदा आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि फैसले के दिन कुफ्फ़ार…सूरा आयत 29/30 — सूरा अस-सजदा السجدة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-सजदा सुनें, सूरा अस-सजदा अनुवाद, सूरा अस-सजदा mp3, सूरा अस-सजदा pdf. आयत 27–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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