Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَوْصِيَةً: वसीयत करना, किसी को कोई निर्देश या आदेश देना।
- يَرْجِعُونَ: लौटना, वापस जाना।
व्याख्या:
जब सूर (नरसिंगा) में फूँक मारी जाएगी और अचानक क़ियामत की आफ़त आ जाएगी, तो ये मुशरिकीन (बहुदेववादी) इतने भयभीत और व्याकुल होंगे कि वे न तो किसी को कोई वसीयत कर सकेंगे और न ही अपने घरों और परिवारों तक लौट सकेंगे। वे अपनी ही जगहों पर, अपने कामों में, बाज़ारों में या सड़कों पर ही मौत के शिकार हो जाएँगे। यह अचानक आने वाली आफ़त इतनी भयानक होगी कि उन्हें कोई मौका ही नहीं मिलेगा कि वे अपने परिवार वालों से अंतिम मुलाक़ात कर सकें या अपनी कोई अंतिम इच्छा व्यक्त कर सकें।
यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि क़ियामत की घड़ी अचानक आएगी, जब कोई भी व्यक्ति न तो अपने लिए कुछ कर सकेगा और न ही दूसरों के लिए। इसलिए हमें चाहिए कि हम हर समय अल्लाह की आज्ञाकारिता में रहें, अपने कर्मों को सुधारें, और अपने परिवार और समाज के लिए अच्छी वसीयत और नेक काम करते रहें, ताकि जब वह घड़ी आए, हम तैयार हों। यह आयत हमें सचेत करती है कि दुनिया की मोहम्मदी (मोह) में मग्न न हों, बल्कि आख़िरत की तैयारी में लगे रहें, क्योंकि अल्लाह का वादा सत्य है और क़ियामत निश्चित रूप से आने वाली है। जो लोग इस दिन पर ईमान रखते हैं और अच्छे कर्म करते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बड़ा प्रतिफल है।
📜 आयत 48-52 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 50
सूरा यासीन आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब ये लोग बाहम झगड़ रहे होगें फिर न तो…सूरा आयत 50/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


