Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَمَسَخْنَاهُمْ: हम उन्हें विकृत कर देते, उनकी शक्ल बदल देते।
- عَلَىٰ مَكَانَتِهِمْ: उन्हीं के स्थान पर, उन्हीं की जगह पर।
- فَمَا اسْتَطَاعُوا مُضِيًّا: तो वे न आगे बढ़ पाते।
- وَلَا يَرْجِعُونَ: और न ही पीछे लौट पाते।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपनी पूर्ण शक्ति और क़ुदरत का बयान करते हुए फ़रमाता है कि अगर हम चाहें तो इन काफ़िरों और मुनकिरों को उन्हीं के ठिकानों पर बंदर और सूअर बना दें, यानी उनकी सूरत और हैसियत बदल दें, ताकि वे अपनी जगह पर जम जाएँ। फिर न वे आगे बढ़ सकें, न पीछे लौट सकें। वे अपनी उसी हालत में मजबूर और बेबस हो जाएँ। यह अल्लाह की उस ताक़त का ज़िक्र है जो हर चीज़ पर क़ादिर है। अगर वह चाहे तो किसी को भी किसी भी हालत में बदल सकता है, और कोई उसके फ़ैसले को टाल नहीं सकता।
यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी क़ुदरत पर ग़ौर करने की तरग़ीब देती है। जिस रब के हाथ में हर चीज़ की बागडोर है, उसकी नाफ़रमानी से डरना चाहिए और उसकी रहमत की तरफ़ लौटना चाहिए। अल्लाह ने हमें आज़ादी दी है कि हम उसकी इबादत करें या न करें, लेकिन याद रखें कि उसकी पकड़ बहुत सख्त है। अगर वह चाहे तो हमें मिट्टी का ढेला बना दे, पत्थर बना दे, या किसी भी हैसियत में डाल दे। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी इस ज़िंदगी में अल्लाह की रहमत और मग़फिरत के तलबगार रहें, और उसके दिए हुए इस बहुमूल्य जीवन को उसकी इबादत और अच्छे कामों में गुज़ारें।
यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं और उसके रसूलों का मज़ाक उड़ाते हैं। अल्लाह की क़ुदरत के आगे कोई ताक़त नहीं चलती। जिस दिन वह चाहेगा, सब कुछ बदल देगा। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करे, उसके दीन को अपनाए, और उसकी राह में चले। यही उसकी भलाई है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, वह चाहता है कि वे उसकी तरफ़ रुजू करें, तौबा करें, और उसकी रहमत की पनाह लें। जो लोग उसकी तरफ़ लौट आते हैं, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है, और जो उसकी नाफ़रमानी पर अड़े रहते हैं, उनके लिए अज़ाब का डर है।
📜 आयत 65-69 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 67
सूरा यासीन आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर हम चाहे तो जहाँ ये हैं (वहीं) उनकी…सूरा आयत 67/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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