अस-साफ्फात · 143/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَلَوْلَا أَنَّهُ كَانَ مِنَ الْمُسَبِّحِينَ ۝١٤٣
Falaw laaa annahoo kaana minal musabbiheen
📖 हिंदी अर्थ
फिर अगर यूनुस (खुदा की) तसबीह (व ज़िक्र) न करते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَلَوْلَا – अगर न होता, यानी अगर ऐसा न होता।
  • الْمُسَبِّحِينَ – तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करने वाले, अल्लाह की पवित्रता का ज़िक्र करने वाले, उसे याद करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हमें हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) के उस ऐतिहासिक और शिक्षाप्रद क़िस्से की ओर संकेत कर रहे हैं, जब वे मछली के पेट में थे। अल्लाह फ़रमाता है: अगर यूनुस (अलैहिस्सलाम) उन लोगों में से न होते जो अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करते हैं, यानी अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करने वाले और उसकी पवित्रता का वर्णन करने वाले होते, तो वे उस मुसीबत से नहीं निकल पाते।

इसका मतलब यह है कि हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) की नजात (मुक्ति) का सबसे बड़ा कारण उनका पहले से अल्लाह को याद करना, उसकी तस्बीह करना और उसकी इबादत में लगे रहना था। जब वे मछली के पेट में गए, तो उन्होंने वहाँ भी अल्लाह को याद किया और पुकारा: "لا إِلَهَ إِلا أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِينَ" (कोई सच्चा माबूद नहीं सिवाय तेरे, तू पाक है, बेशक मैं ज़ालिमों में से था)। यही तस्बीह और दुआ उनकी नजात का ज़रिया बनी।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह को याद करना और उसकी तस्बीह करना हर मुसीबत से निकलने का रास्ता है। जो इंसान अल्लाह से जुड़ा रहता है, अल्लाह उसे हर मुसीबत से निकालता है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि अगर हम भी अल्लाह को याद करते रहें, उसकी तस्बीह करते रहें, तो अल्लाह हमारी मुश्किलें आसान कर देगा। हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) की यह दुआ हमें सिखाती है कि जब भी हम किसी मुसीबत में हों, तो अल्लाह की तरफ रुजू करें, उसकी पवित्रता का वर्णन करें और अपनी गलतियों का इक़रार करें। अल्लाह बहुत मेहरबान है, वह अपने बंदों की दुआ ज़रूर सुनता है और उन्हें मुसीबत से निकालता है। यह हमारे लिए रहमत और नजात का ज़रिया है, बशर्ते हम सच्चे दिल से अल्लाह की तरफ लौटें।

🎧 सुनें

📜 आयत 141-145 — अस-साफ्फात

141فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ الْمُدْحَضِينَ
तो (अहले कश्ती ने) कुरआ डाला तो (उनका ही नाम निकला) यूनुस ने ज़क उठायी (और दरिया में गिर पड़े)
142فَالْتَقَمَهُ الْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌ
तो उनको एक मछली निगल गयी और यूनुस खुद (अपनी) मलामत कर रहे थे
143فَلَوْلَا أَنَّهُ كَانَ مِنَ الْمُسَبِّحِينَ
फिर अगर यूनुस (खुदा की) तसबीह (व ज़िक्र) न करते
144لَلَبِثَ فِي بَطْنِهِ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ
तो रोज़े क़यामत तक मछली के पेट में रहते
145۞ فَنَبَذْنَاهُ بِالْعَرَاءِ وَهُوَ سَقِيمٌ
फिर हमने उनको (मछली के पेट से निकाल कर) एक खुले मैदान में डाल दिया
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
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143आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 143

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Tuesday, August 18, 2026

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