अस-साफ्फात · 80/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ ۝٨٠
Innaa kazaalika najzil muhsineen
📖 हिंदी अर्थ
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِنَّا كَذَٰلِكَ: हम इसी प्रकार (बदला देते हैं)
  • نَجْزِي: हम बदला देते हैं
  • الْمُحْسِنِينَ: नेकी करने वालों को (जो अल्लाह की इबादत में भलाई करते हैं)

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में फ़रमाता है कि जिस तरह हमने नूह अलैहिस्सलाम को उनकी नेकी और सब्र का अच्छा बदला दिया — उन्हें तूफ़ान से बचाया, उनके दुश्मनों को डुबो दिया, और उनका नाम हमेशा के लिए ज़िंदा रखा — उसी तरह हम हर उस बंदे को बदला देते हैं जो नेकी करता है।

यानी अल्लाह का क़ानून हमेशा से यही रहा है और रहेगा कि जो लोग अपनी इबादत को ख़ालिस अल्लाह के लिए करते हैं, जो अपने अमल में ईमानदारी और अच्छाई अपनाते हैं, और जो मुश्किलों में सब्र करते हुए अल्लाह की राह पर क़ायम रहते हैं — अल्लाह उन्हें कभी नाकाम नहीं करता। वह उनकी मदद करता है, उन्हें इज़्ज़त देता है, और उनके कामों को कामयाबी से हमकिनार करता है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ का यह सिद्धांत है कि नेकी का बदला नेकी है। जो लोग अल्लाह की इबादत में भलाई करते हैं — यानी अपनी नमाज़, रोज़ा, ज़कात, और हर अच्छे काम को पूरी ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू के साथ, सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए करते हैं — अल्लाह उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी जन्नत की नेमतें अता करता है।

यह आयत हमारे दिलों में उम्मीद पैदा करती है कि हमें अपनी ज़िंदगी में नेकी को अपनाना चाहिए, चाहे हालात कैसे भी हों। अल्लाह कभी किसी नेक इंसान का हक़ नहीं मारता। जैसे नूह अलैहिस्सलाम ने सैकड़ों साल तक अपनी क़ौम को दावत दी, मुश्किलें सहीं, लेकिन आख़िर में अल्लाह ने उन्हें कामयाबी दी — उसी तरह आज भी जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह की राह पर चलते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतरीन बदला देगा।

तो आओ, हम सब अपनी ज़िंदगी को नेकी पर क़ायम करें, अपने अमल को ख़ालिस अल्लाह के लिए बनाएं, और यक़ीन रखें कि अल्लाह का वादा सच्चा है — वह मुहसिनों (नेकी करने वालों) को ज़रूर अच्छा बदला देगा।



📜 आयत 78-82 — सूरा अस-साफ्फात

78وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और बाद को आने वाले लोगों में उनका अच्छा चर्चा बाक़ी रखा
79سَلَامٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِي الْعَالَمِينَ
कि सारी खुदायी में (हर तरफ से) नूह पर सलाम है
80إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
81إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
इसमें शक नहीं कि नूह हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों से थे
82ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ
फिर हमने बाक़ी लोगों को डुबो दिया
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
80आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 80

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Friday, October 2, 2026

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