Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- جادَلْتُمْ: तुमने झगड़ा किया, बहस की, या उनके पक्ष में दलीलें दीं।
- وَكِيلًا: ज़िम्मेदार, वकील, या उनकी ओर से पैरवी करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमानवालों! तुमने इन धोखेबाज़ और ख़ुद को नुक़सान पहुँचाने वाले लोगों (जैसे तुआमा और उसके साथी) के पक्ष में इस दुनिया की ज़िंदगी में बहस की और उन्हें बरी कराने की कोशिश की। तुमने सोचा कि उनकी बेगुनाही साबित कर दोगे और उन्हें सज़ा से बचा लोगे। लेकिन यह बात सिर्फ़ दुनिया में काम आ सकती है, जहाँ लोगों के बहकावे और दलीलों का असर होता है। अब बताओ, क़यामत के दिन जब अल्लाह उन्हें उनके किए की सज़ा देगा, तो कौन उनके पक्ष में अल्लाह से झगड़ा करेगा? कौन उनके लिए सिफ़ारिश करेगा? और कौन उस दिन उनका वकील या ज़िम्मेदार बनकर उन्हें अल्लाह की पकड़ से बचा सकेगा? निश्चित रूप से कोई नहीं। अल्लाह उनकी हर बात जानता है, और उसके सामने किसी की दलील काम नहीं आएगी। यह एक सख्त चेतावनी है कि दुनिया में लोगों को धोखा देना आसान है, लेकिन अल्लाह से कुछ छिपा नहीं है, और उसके फ़ैसले के आगे कोई ताक़त नहीं चल सकती।
फ़ायदे (सबक):
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सच्चाई और इंसाफ़ पर क़ायम रहना चाहिए, चाहे मामला किसी भी रिश्तेदार या दोस्त का क्यों न हो। किसी की मदद करना अच्छा है, लेकिन झूठ और धोखे पर उसका साथ देना बड़ी ग़लती है।
- यह हमें याद दिलाती है कि दुनिया की बहसें और दलीलें आख़िरकार बेकार हैं; असली फ़ैसला अल्लाह के पास है, जो हर चीज़ से बाख़बर है। इसलिए हमें हमेशा सच बोलना चाहिए और अल्लाह से डरना चाहिए।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अगर कोई इंसान गुनाह कर बैठे, तो उसे दुनिया में बचाने की कोशिश करने के बजाय उसे तौबा और सुधार की राह दिखानी चाहिए, क्योंकि अल्लाह की पकड़ से कोई नहीं बचा सकता।
- अंत में, यह हमें अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ की याद दिलाती है—वह बड़ा दयालु है, लेकिन उसका इंसाफ़ भी पूरा है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को उसकी मर्ज़ी के मुताबिक बनाना चाहिए, ताकि उस दिन हमारे पास कोई शर्मिंदगी न हो।
📜 आयत 107-111 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 109
सूरा अन-निसा आयत 109 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुसलमानों) ख़बरदार हो जाओ भला दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी…सूरा आयत 109/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 107–111. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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