haaa antum haaa`ulaaa`i jaadaltum `anhum fil hayaatid dunyaa famai yujaadilul laaha `anhum Yawmal Qiyaamati am mai yakoonu `alaihim wakeelaa
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(मुसलमानों) ख़बरदार हो जाओ भला दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में तो तुम उनकी तरफ़ होकर लड़ने खडे हो गए (मगर ये तो बताओ) फिर क़यामत के दिन उनका तरफ़दार बनकर ख़ुदा से कौन लड़ेगा या कौन उनका वकील होगा
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
بھلا تم لوگ دنیا کی زندگی میں تو ان کی طرف سے بحث کر لیتے ہو قیامت کو ان کی طرف سے خدا کے ساتھ کون جھگڑے گا اور کون ان کا وکیل بنے گا؟
جادَلْتُمْ: तुमने झगड़ा किया, बहस की, या उनके पक्ष में दलीलें दीं।
وَكِيلًا: ज़िम्मेदार, वकील, या उनकी ओर से पैरवी करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमानवालों! तुमने इन धोखेबाज़ और ख़ुद को नुक़सान पहुँचाने वाले लोगों (जैसे तुआमा और उसके साथी) के पक्ष में इस दुनिया की ज़िंदगी में बहस की और उन्हें बरी कराने की कोशिश की। तुमने सोचा कि उनकी बेगुनाही साबित कर दोगे और उन्हें सज़ा से बचा लोगे। लेकिन यह बात सिर्फ़ दुनिया में काम आ सकती है, जहाँ लोगों के बहकावे और दलीलों का असर होता है। अब बताओ, क़यामत के दिन जब अल्लाह उन्हें उनके किए की सज़ा देगा, तो कौन उनके पक्ष में अल्लाह से झगड़ा करेगा? कौन उनके लिए सिफ़ारिश करेगा? और कौन उस दिन उनका वकील या ज़िम्मेदार बनकर उन्हें अल्लाह की पकड़ से बचा सकेगा? निश्चित रूप से कोई नहीं। अल्लाह उनकी हर बात जानता है, और उसके सामने किसी की दलील काम नहीं आएगी। यह एक सख्त चेतावनी है कि दुनिया में लोगों को धोखा देना आसान है, लेकिन अल्लाह से कुछ छिपा नहीं है, और उसके फ़ैसले के आगे कोई ताक़त नहीं चल सकती।
फ़ायदे (सबक):
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सच्चाई और इंसाफ़ पर क़ायम रहना चाहिए, चाहे मामला किसी भी रिश्तेदार या दोस्त का क्यों न हो। किसी की मदद करना अच्छा है, लेकिन झूठ और धोखे पर उसका साथ देना बड़ी ग़लती है।
यह हमें याद दिलाती है कि दुनिया की बहसें और दलीलें आख़िरकार बेकार हैं; असली फ़ैसला अल्लाह के पास है, जो हर चीज़ से बाख़बर है। इसलिए हमें हमेशा सच बोलना चाहिए और अल्लाह से डरना चाहिए।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अगर कोई इंसान गुनाह कर बैठे, तो उसे दुनिया में बचाने की कोशिश करने के बजाय उसे तौबा और सुधार की राह दिखानी चाहिए, क्योंकि अल्लाह की पकड़ से कोई नहीं बचा सकता।
अंत में, यह हमें अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ की याद दिलाती है—वह बड़ा दयालु है, लेकिन उसका इंसाफ़ भी पूरा है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को उसकी मर्ज़ी के मुताबिक बनाना चाहिए, ताकि उस दिन हमारे पास कोई शर्मिंदगी न हो।
(मुसलमानों) ख़बरदार हो जाओ भला दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में तो तुम उनकी तरफ़ होकर लड़ने खडे हो गए (मगर ये तो बताओ) फिर क़यामत के दिन उनका तरफ़दार बनकर ख़ुदा से कौन लड़ेगा या कौन उनका वकील होगा
और (ऐ रसूल) तुम (उन बदमाशों) की तरफ़ होकर (लोगों से) न लड़ो जो अपने ही (लोगों) से दग़ाबाज़ी करते हैं बेशक ख़ुदा ऐसे शख्स को दोस्त नहीं रखता जो दग़ाबाज़ गुनाहगार हो
लोगों से तो अपनी शरारत छुपाते हैं और (ख़ुदा से नहीं छुपा सकते) हालॉकि वह तो उस वक्त भी उनके साथ साथ है जब वह लोग रातों को (बैठकर) उन बातों के मशवरे करते हैं जिनसे ख़ुदा राज़ी नहीं और ख़ुदा तो उनकी सब करतूतों को (इल्म के अहाते में) घेरे हुए है
(मुसलमानों) ख़बरदार हो जाओ भला दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में तो तुम उनकी तरफ़ होकर लड़ने खडे हो गए (मगर ये तो बताओ) फिर क़यामत के दिन उनका तरफ़दार बनकर ख़ुदा से कौन लड़ेगा या कौन उनका वकील होगा
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।