Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَدُنَّا: अपनी ओर से, अपने पास से।
- أَجْرًا عَظِيمًا: बहुत बड़ा प्रतिफल, अपार इनाम।
व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर ये मुनाफ़िक़ीन (कपटी) उस नसीहत पर अमल कर लेते जो उन्हें दी गई थी — यानी अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की ओर रुजू करते, अपने झगड़े अल्लाह और रसूल की किताब और सुन्नत के अनुसार सुलझाते, और हुक्म की पालना में अपनी जान और माल की कुर्बानी देने के लिए तैयार रहते — तो हम उन्हें अपनी ओर से बहुत बड़ा अज्र (प्रतिफल) अता करते। यह अज्र दुनिया में भी होता (जैसे इज़्ज़त, सुकून, और अल्लाह की मदद) और आख़िरत में भी (जैसे जन्नत और अल्लाह की रज़ा)। यानी अल्लाह की राह पर चलने वालों के लिए उसके पास इनाम का ख़ज़ाना भरा पड़ा है, जो उनके अमल के बदले में उन्हें दिया जाता है।
फ़ायदे:
- इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — वह उन पर मुश्किल काम लादना नहीं चाहता, बल्कि उनकी भलाई चाहता है और आसान रास्ता दिखाता है।
- अल्लाह की इबादत और उसके हुक्म की पालना में दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई है — दुनिया में इज़्ज़त और सुकून, और आख़िरत में जन्नत और अल्लाह की रज़ा।
- अल्लाह के पास इनाम का ख़ज़ाना असीमित है — वह अपने नेक बंदों को उनके अमल से कहीं बढ़कर अज्र देता है।
- यह आयत मुसलमान को तरग़ीब देती है कि वह अल्लाह की राह पर चलने में कभी कसर न छोड़े, क्योंकि उसका इनाम बहुत बड़ा है और उसका वादा सच्चा है।
📜 आयत 65-69 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 67
सूरा अन-निसा आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (दीन में भी) बहुत साबित क़दमी से जमे रहते…सूरा आयत 67/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, September 29, 2026
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