Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नादौ (नाद किया): चिल्लाकर पुकारा।
- या मालिकु: जहन्नम (नरक) के दारोगा (ख़ाज़िन) को संबोधित करते हुए।
- लियक़्दी अलैना: हमारे ऊपर मौत का फ़ैसला कर दे, यानी हमें मौत दे दे।
- माकिसून: हमेशा रहने वाले, स्थायी रूप से ठहरने वाले।
विस्तृत तफ़सीर:
जब अत्याचारी और अपराधी लोग जहन्नम में डाल दिए जाएंगे और वहाँ के अज़ाब (यातना) की भयावहता उन पर हावी हो जाएगी, और वे देखेंगे कि उनके लिए कोई राहत नहीं, कोई छुटकारा नहीं, तो वे जहन्नम के दारोगा "मालिक" को पुकारेंगे। वे चिल्लाकर कहेंगे: "ऐ मालिक! अपने रब से हमारे लिए मौत का फ़ैसला करवा दे, ताकि हम इस अज़ाब से छुटकारा पा सकें।" वे मौत को भी अपने लिए राहत समझेंगे, क्योंकि जीवन में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि मौत भी किसी के लिए नेमत बन सकती है। लेकिन वहाँ उनकी यह दुआ भी क़बूल नहीं होगी।
जवाब में मालिक उनसे कहेंगे: "तुम हमेशा यहीं रहोगे। तुम्हारे लिए मौत नहीं है, और न ही अज़ाब में कोई कमी होगी। तुम इसी स्थिति में सदैव पड़े रहोगे।" यह उनके लिए सबसे बड़ी सज़ा होगी कि मौत भी उन्हें नसीब नहीं होगी, और अज़ाब से छुटकारे की कोई सूरत भी नहीं होगी।
यह वही लोग हैं जिनके पास दुनिया में अल्लाह के रसूल सच्चाई और स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए, लेकिन उन्होंने उसे झुठलाया और उससे नफ़रत की। उन्होंने हक़ को सुनकर भी उसे क़बूल नहीं किया, बल्कि उससे मुँह मोड़ा। आज वे अपनी उसी हठधर्मिता और अहंकार का फल भुगत रहे हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और बताती है कि जो लोग दुनिया में हक़ को नकारते हैं और अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ते हैं, उनका अंजाम कितना भयानक होगा। लेकिन साथ ही यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा अभी खुला है। जब तक हम दुनिया में हैं, हमें अपनी ज़िंदगी को संवारने का मौक़ा मिला हुआ है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्मों को मानें, उसके रसूल की सुन्नत पर चलें, और अपने आप को उस आग से बचाएँ जिसकी ईंधन लोग और पत्थर हैं। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इस दुनिया की मुहब्बत और इसके सुख-साधन हमें उस आख़िरत के सुखों से ग़ाफ़िल न कर दें। आज हमारे पास तौबा का मौक़ा है, रहमत की भीख माँगने का समय है — कल यह समय हाथ से निकल जाएगा और फिर सिर्फ़ पछतावा और अफ़सोस ही बचेगा। अल्लाह हम सबको उस अज़ाब से बचाए और अपनी रहमत के साये में ले, आमीन।
📜 आयत 75-79 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 77
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (जहन्नुमी) पुकारेगें कि ऐ मालिक (दरोग़ा ए जहन्नुम कोई…सूरा आयत 77/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुखरुफ
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


