अद-दुखान · 24/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
وَاتْرُكِ الْبَحْرَ رَهْوًا ۖ إِنَّهُمْ جُندٌ مُّغْرَقُونَ ۝٢٤
Watrukil bahra rahwan innahum jundum mughraqoon
📖 हिंदी अर्थ
और दरिया को अपनी हालत पर ठहरा हुआ छोड़ कर (पार हो) जाओ (तुम्हारे बाद) उनका सारा लशकर डुबो दिया जाएगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रहवًا (رَهْوًا): स्थिर, शांत, बिना हिले-डुले, उसी हालत में जैसा था।
  • जुंद (جُند): सेना, लश्कर।
  • मुग़रक़ून (مُغْرَقُونَ): डूबोए जाने वाले, पानी में ग़र्क होने वाले।

तफ़सीर:

जब अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को और उनकी क़ौम बनी इसराईल को समुद्र के पार सुरक्षित निकाल दिया, तो अल्लाह ने हज़रत मूसा को हुक्म दिया कि वे समुद्र को उसी हालत पर छोड़ दें — यानी उसे बंद न करें, न ही उसके पानी को वापस मिलने की कोशिश करें। समुद्र उसी तरह स्थिर और शांत खड़ा रहे, जैसे रास्ता बनाने के लिए अल्लाह के इशारे से वह फटा था। यह एक निशानी थी कि अल्लाह का हुक्म हर चीज़ पर छाया हुआ है — पानी भी उसके हुक्म की ताबेदारी करता है और बनी इसराईल के गुज़रने तक दीवार की तरह खड़ा रहा।

इसके बाद अल्लाह ने हज़रत मूसा को ख़बर दी कि फ़िरऔन और उसकी सारी फ़ौज — जो उनका पीछा करते हुए समुद्र में उतरी थी — उसी समुद्र में डूबकर हलाक हो जाएगी। यह बशारत (ख़ुशख़बरी) इसलिए दी गई ताकि मूसा (अलैहिस्सलाम) का दिल मुत्मइन रहे और उन्हें यक़ीन हो कि अल्लाह का वादा पूरा होकर रहेगा। फ़िरऔन जो इतना मग़रूर और सरकश था, उसकी सारी शानो-शौकत और उसकी फ़ौज की ताक़त पानी की एक लहर के सामने बेकार साबित हुई।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और उनके दुश्मनों को उसी रास्ते से हलाक करता है जिस रास्ते से वे अल्लाह के बंदों को नुक़सान पहुँचाना चाहते थे। जब अल्लाह किसी काम का फ़ैसला कर लेता है, तो उसे कोई रोक नहीं सकता। पानी, हवा, ज़मीन — सब कुछ उसके हुक्म के ताबे हैं। यह भी याद रखने की बात है कि अल्लाह की मदद हमेशा सच्चे ईमान वालों के साथ होती है, चाहे दुश्मन कितना भी ताक़तवर क्यों न हो। मूसा (अलैहिस्सलाम) अकेले थे, लेकिन अल्लाह की ताइद से उनकी क़ौम ने समुद्र पार कर लिया, और फ़िरऔन की पूरी फ़ौज — जो हज़ारों में थी — पानी में डूब गई। यही अल्लाह का क़ानून है: सब्र और तक़वा वालों का अंजाम कामयाबी है, और ज़ालिमों का अंजाम हलाकत।



📜 आयत 22-26 — अद-दुखान

22فَدَعَا رَبَّهُ أَنَّ هَٰؤُلَاءِ قَوْمٌ مُّجْرِمُونَ
(मगर वह सुनाने लगे) तब मूसा ने अपने परवरदिगार से दुआ की कि ये बड़े शरीर लोग हैं
23فَأَسْرِ بِعِبَادِي لَيْلًا إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ
तो ख़ुदा ने हुक्म दिया कि तुम मेरे बन्दों (बनी इसराईल) को रातों रात लेकर चले जाओ और तुम्हारा पीछा भी ज़रूर किया जाएगा
24وَاتْرُكِ الْبَحْرَ رَهْوًا ۖ إِنَّهُمْ جُندٌ مُّغْرَقُونَ
और दरिया को अपनी हालत पर ठहरा हुआ छोड़ कर (पार हो) जाओ (तुम्हारे बाद) उनका सारा लशकर डुबो दिया जाएगा
25كَمْ تَرَكُوا مِن جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
वह लोग (ख़ुदा जाने) कितने बाग़ और चश्में और खेतियाँ
26وَزُرُوعٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍ
और नफीस मकानात और आराम की चीज़ें
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
24आयत

अनुवाद — अद-दुखान 24

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Tuesday, August 18, 2026

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