Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- बहीरा (بَحِيرَة): वह ऊँटनी जिसके कान काट दिए जाते थे जब वह एक निश्चित संख्या में बच्चे जनती थी, और उसे आगे इस्तेमाल करना वर्जित समझा जाता था।
- साइबा (سَائِبَة): वह ऊँटनी या जानवर जिसे किसी मन्नत या नियम के कारण आज़ाद छोड़ दिया जाता था और उस पर सवारी करना, दूध निकालना आदि वर्जित समझा जाता था।
- वसीला (وَصِيلَة): वह बकरी या भेड़ जो एक साथ नर और मादा बच्चे जनती थी, तो उसे देवताओं के लिए छोड़ दिया जाता था और उसका वध करना वर्जित समझा जाता था।
- हामी (حَامٍ): वह नर ऊँट जिसकी पीठ पर एक निश्चित संख्या में बच्चे पैदा हो जाने के बाद सवारी करना वर्जित समझा जाता था।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने चौपायों (जानवरों) को हलाल (वैध) बनाया है और उनमें से किसी को भी हराम (अवैध) नहीं ठहराया। लेकिन अरब के मुशरिकों (बहुदेववादियों) ने अपनी ओर से कुछ जानवरों को हराम ठहरा लिया था और उन्हें अपने देवताओं के नाम पर छोड़ दिया था। उन्होंने बहीरा, साइबा, वसीला और हामी जैसी प्रथाएँ बनाईं और झूठ-बोट कर अल्लाह की तरफ यह बातें जोड़ दीं कि अल्लाह ने इन्हें हराम किया है। अल्लाह तआला स्पष्ट कर रहे हैं कि उन्होंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया, बल्कि यह सब उनका मनगढ़ंत झूठ है। अधिकांश काफिर (इनकार करने वाले) अक्ल से काम नहीं लेते, वे सत्य और असत्य में अंतर नहीं कर पाते और अपने बड़ों की अंधी पैरवी करते हैं। वे यह नहीं समझते कि अल्लाह ने जो चीज़ें हलाल की हैं वे पाक और लाभदायक हैं, और जो हराम की हैं वे नापाक और हानिकारक हैं।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हलाल और हराम का अधिकार केवल अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) को है। किसी भी इंसान को यह अधिकार नहीं कि वह अपनी मर्ज़ी से किसी चीज़ को हराम या हलाल ठहरा दे।
- इस्लाम एक आसान और स्वाभाविक धर्म है, जो इंसानों पर अनावश्यक बोझ नहीं डालता। अल्लाह ने पाक और अच्छी चीज़ें हलाल कीं और गंदी चीज़ें हराम कीं।
- अंधी परंपराओं और रीति-रिवाजों की पैरवी करना अक्लमंदी नहीं है। हमें हर बात को कुरआन और सुन्नत की कसौटी पर परखना चाहिए।
- झूठ और बदनामी से बचना चाहिए, खासकर अल्लाह के नाम पर झूठ बोलना सबसे बड़ा अपराध है। मुशरिकों ने अल्लाह पर झूठ बोलकर अपने लिए कठिनाइयाँ पैदा कीं, जबकि अल्लाह ने उन्हें आसानी दी थी।
- यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में जानवरों के साथ भी न्याय और दया का व्यवहार किया जाता है, और उन्हें अनावश्यक रूप से प्रताड़ित करना या उनका उपयोग वर्जित करना इस्लाम की शिक्षाओं के विपरीत है।
📜 आयत 101-105 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 103
सूरा अल-माइदा आयत 103 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर (जब बरदाश्त न हो सका तो) उसके मुन्किर हो…सूरा आयत 103/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 101–105. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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