अल-माइदा · 79/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
كَانُوا لَا يَتَنَاهَوْنَ عَن مُّنكَرٍ فَعَلُوهُ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَفْعَلُونَ ۝٧٩
Kaanoo laa yatanaahawna `am munkarin fa`aluhoo; labi`sa maa kaanoo yafa`loon
📖 हिंदी अर्थ
और किसी बुरे काम से जिसको उन लोगों ने किया बाज़ न आते थे (बल्कि उस पर बावजूद नसीहत अड़े रहते) जो काम ये लोग करते थे क्या ही बुरा था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا يَتَنَاهَوْنَ: एक-दूसरे को मना नहीं करते थे।
  • مُنكَرٍ: वह काम जिसे शरई तौर पर बुरा और नापसंद किया गया हो।
  • فَعَلُوهُ: जो उन्होंने स्वयं किया।
  • لَبِئْسَ: बहुत बुरा है।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत बनी इस्राईल (यहूदियों) के उस समूह के बारे में है जो अल्लाह की नाफरमानी में डूबे हुए थे। उनकी सबसे बड़ी बुराई यह थी कि जब वे कोई गुनाह या बुरा काम करते थे, तो वे एक-दूसरे को उससे रोकते नहीं थे। न केवल वे खुद गुनाह करते थे, बल्कि दूसरों को भी उस पर छोड़ देते थे और कोई उन्हें टोकने वाला नहीं होता था। इस तरह वे खुलेआम गुनाह करते थे और आपस में एक-दूसरे को नेकी का हुक्म देने और बुराई से रोकने (अम्र बिल-मारूफ़ व नही अनिल-मुनकर) का फ़रीज़ा अदा नहीं करते थे।

अल्लाह तआला ने इस काम को बहुत बुरा बताया और फरमाया: "बहुत बुरा है वह काम जो वे करते थे।" यानी उनका यह अमल (बुराई से न रोकना) अपने आप में एक बड़ा गुनाह था, जिसकी वजह से वे अल्लाह की रहमत से महरूम हो गए और उन पर लानत भेजी गई। यह आयत उन लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो बुराई देखकर चुप रहते हैं और उसे रोकने की कोशिश नहीं करते।

फ़ायदे (सबक):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अम्र बिल-मारूफ़ और नही अनिल-मुनकर (नेकी का हुक्म देना और बुराई से रोकना) इस्लाम का एक बहुत बड़ा फ़रीज़ा है। इसे छोड़ना गुनाहे-कबीरा (बड़ा पाप) है।
  2. एक मुसलमान को चाहिए कि जब वह किसी को गुनाह करते देखे, तो उसे नर्मी और हिकमत से रोके। चुप रहना और बुराई को फैलने देना पूरी उम्मत के लिए अल्लाह की नाराज़गी का सबब बनता है।
  3. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि बुराई को रोकना सिर्फ हुकूमत या उलमा का काम नहीं, बल्कि हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है, अपनी हैसियत और ताकत के मुताबिक।
  4. जो लोग बुराई को देखकर खामोश रहते हैं, वे उस गुनाह में शरीक होते हैं, भले ही वे खुद वह गुनाह न करें। इसलिए हमें अपने समाज में बुराइयों के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए।
  5. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला बुराई से रोकने वालों को पसंद करता है और उन्हें इनाम देता है, और बुराई पर खामोश रहने वालों को सज़ा देता है। इसलिए हमें अपने घर, मोहल्ले और समाज में नेकी फैलाने और बुराई मिटाने की कोशिश करनी चाहिए।


📜 आयत 77-81 — अल-माइदा

77قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لَا تَغْلُوا فِي دِينِكُمْ غَيْرَ الْحَقِّ وَلَا تَتَّبِعُوا أَهْوَاءَ قَوْمٍ قَدْ ضَلُّوا مِن قَبْلُ وَأَضَلُّوا كَثِيرًا وَضَلُّوا عَن سَوَاءِ السَّبِيلِ
ऐ रसूल तुम कह दो कि ऐ अहले किताब तुम अपने दीन में नाहक़ ज्यादती न करो और न उन लोगों (अपने बुज़ुगों) की नफ़सियानी ख्वाहिशों पर चलो जो पहले ख़ुद ही गुमराह हो चुके और (अपने साथ और भी) बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और राहे रास्त से (दूर) भटक गए
78لُعِنَ الَّذِينَ كَفَرُوا مِن بَنِي إِسْرَائِيلَ عَلَىٰ لِسَانِ دَاوُودَ وَعِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ ۚ ذَٰلِكَ بِمَا عَصَوا وَّكَانُوا يَعْتَدُونَ
बनी इसराईल में से जो लोग काफ़िर थे उन पर दाऊद और मरियम के बेटे ईसा की ज़बानी लानत की गयी ये (लानत उन पर पड़ी तो सिर्फ) इस वजह से कि (एक तो) उन लोगों ने नाफ़रमानी की और (फिर हर मामले में) हद से बढ़ जाते थे
79كَانُوا لَا يَتَنَاهَوْنَ عَن مُّنكَرٍ فَعَلُوهُ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَفْعَلُونَ
और किसी बुरे काम से जिसको उन लोगों ने किया बाज़ न आते थे (बल्कि उस पर बावजूद नसीहत अड़े रहते) जो काम ये लोग करते थे क्या ही बुरा था
80تَرَىٰ كَثِيرًا مِّنْهُمْ يَتَوَلَّوْنَ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ لَبِئْسَ مَا قَدَّمَتْ لَهُمْ أَنفُسُهُمْ أَن سَخِطَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ وَفِي الْعَذَابِ هُمْ خَالِدُونَ
(ऐ रसूल) तुम उन (यहूदियों) में से बहुतेरों को देखोगे कि कुफ्फ़ार से दोस्ती रखते हैं जो सामान पहले से उन लोगों ने ख़ुद अपने वास्ते दुरूस्त किया है किस क़दर बुरा है (जिसका नतीजा ये है) कि (दुनिया में भी) ख़ुदा उन पर गज़बनाक हुआ और (आख़ेरत में भी) हमेशा अज़ाब ही में रहेंगे
81وَلَوْ كَانُوا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالنَّبِيِّ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْهِ مَا اتَّخَذُوهُمْ أَوْلِيَاءَ وَلَٰكِنَّ كَثِيرًا مِّنْهُمْ فَاسِقُونَ
और अगर ये लोग ख़ुदा और रसूल पर और जो कुछ उनपर नाज़िल किया गया है ईमान रखते हैं तो हरगिज़ (उनको अपना) दोस्त न बनाते मगर उनमें के बहुतेरे तो बदचलन हैं
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अनुवाद — अल-माइदा 79

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Tuesday, August 18, 2026

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