काफ · 3/45
अनुवाद उच्चारण — काफ
أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا ۖ ذَٰلِكَ رَجْعٌ بَعِيدٌ ۝٣
A-izaa mitnaa wa kunnaa turaaban zaalika raj`um ba`eed
📖 हिंदी अर्थ
भला जब हम मर जाएँगे और (सड़ गल कर) मिटटी हो जाएँगे तो फिर ये दोबार ज़िन्दा होना (अक्ल से) बईद (बात है)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَإِذَا مِتْنَا: क्या जब हम मर जाएँगे?
  • وَكُنَّا تُرَابًا: और हम मिट्टी हो जाएँगे (बिखर जाने के बाद)
  • ذَلِكَ رَجْعٌ بَعِيدٌ: यह लौटना बहुत दूर (नामुमकिन) है

तफसीर:

यह आयत उन काफिरों के कथन को बयान करती है जो आख़िरत (पुनरुत्थान) को असंभव मानते थे। वे हैरानी और इनकार के साथ कहते थे: "क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी में मिलकर बिखर जाएँगे, तो क्या हमें दोबारा जीवित किया जाएगा? यह लौटना तो बहुत दूर की बात है, जो कभी हो ही नहीं सकता!"

उनका यह कहना उनकी नासमझी और अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) को न समझने की वजह से था। उन्होंने यह भूलकर ऐसा कहा कि जिस अल्लाह ने उन्हें पहली बार पैदा किया, वही उन्हें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है। जिसने आकाश और धरती को पैदा किया, उसके लिए मुर्दों को ज़िंदा करना क्या मुश्किल है?

यह आयत हमें सिखाती है कि मौत अंत नहीं है, बल्कि एक नई ज़िंदगी की शुरुआत है। जो लोग पुनरुत्थान को दूर और नामुमकिन समझते हैं, वे अल्लाह की क़ुदरत को कम आंकते हैं। अल्लाह तआला के लिए हर चीज़ आसान है — वही ज़मीन को उखाड़कर मुर्दों को निकालेगा, और हर इंसान अपने कर्मों का हिसाब देने के लिए खड़ा होगा।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि हम मौत के बाद की ज़िंदगी पर यक़ीन रखें, अपने आख़िरत (परलोक) के लिए अच्छे कर्म करें, और अल्लाह की रहमत से कभी निराश न हों। क़यामत का दिन ज़रूर आएगा, और हर अच्छे और बुरे काम का बदला मिलेगा। यही ईमान की निशानी है कि इंसान इस दुनिया को आख़िरत की खेती समझे और अपने रब की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारे।



📜 आयत 1-5 — काफ

1ق ۚ وَالْقُرْآنِ الْمَجِيدِ
क़ाफ़ क़ुरान मजीद की क़सम (मोहम्मद पैग़म्बर हैं)
2بَلْ عَجِبُوا أَن جَاءَهُم مُّنذِرٌ مِّنْهُمْ فَقَالَ الْكَافِرُونَ هَٰذَا شَيْءٌ عَجِيبٌ
लेकिन इन (काफिरों) को ताज्जुब है कि उन ही में एक (अज़ाब से) डराने वाला (पैग़म्बर) उनके पास आ गया तो कुफ्फ़ार कहने लगे ये तो एक अजीब बात है
3أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا ۖ ذَٰلِكَ رَجْعٌ بَعِيدٌ
भला जब हम मर जाएँगे और (सड़ गल कर) मिटटी हो जाएँगे तो फिर ये दोबार ज़िन्दा होना (अक्ल से) बईद (बात है)
4قَدْ عَلِمْنَا مَا تَنقُصُ الْأَرْضُ مِنْهُمْ ۖ وَعِندَنَا كِتَابٌ حَفِيظٌ
उनके जिस्मों से ज़मीन जिस चीज़ को (खा खा कर) कम करती है वह हमको मालूम है और हमारे पास तो तहरीरी याददाश्त किताब लौहे महफूज़ मौजूद है
5بَلْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ فَهُمْ فِي أَمْرٍ مَّرِيجٍ
मगर जब उनके पास दीन (हक़) आ पहुँचा तो उन्होने उसे झुठलाया तो वह लोग एक ऐसी बात में उलझे हुए हैं जिसे क़रार नहीं
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अनुवाद — काफ 3

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Tuesday, August 18, 2026

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