अज़-ज़ारियात · 29/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
فَأَقْبَلَتِ امْرَأَتُهُ فِي صَرَّةٍ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوزٌ عَقِيمٌ ۝٢٩
Fa aqbalatim ra-atuhoo fee sarratin fasakkat wajhahaa wa qaalat `ajoozun `aqeem
📖 हिंदी अर्थ
तो (ये सुनते ही) इबराहीम की बीवी (सारा) चिल्लाती हुई उनके सामने आयीं और अपना मुँह पीट लिया कहने लगीं (ऐ है) एक तो (मैं) बुढ़िया (उस पर) बांझ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • صَرَّةٍ – तेज़ आवाज़, चीख़ (खुशी या हैरानी की)
  • صَكَّتْ – मुँह पर थप्पड़ मारा, हाथ मारा
  • عَجُوزٌ – बूढ़ी औरत
  • عَقِيمٌ – बांझ, जो संतान को जन्म न दे सके

तफ़सीर:

जब इब्राहीम अलैहिस्सलाम की मेहमान फ़रिश्ते उन्हें बेटे (इस्हाक) की खुशखबरी दे रहे थे, तो उनकी पत्नी सारा ने यह बात सुनी। वह बहुत हैरान हुईं और खुशी के साथ-साथ अचरज में भी पड़ गईं। वह तेज़ आवाज़ के साथ सामने आईं—यह आवाज़ खुशी और हैरानी दोनों की मिली-जुली थी—और अपने चेहरे पर हाथ मारा (लप्पड़ सा मारा), जैसा कि औरतों का आम तौर पर किसी अचरज की बात पर होता है। फिर उन्होंने कहा: "मैं बूढ़ी और बांझ हूँ, फिर मैं कैसे बच्चे को जन्म दूँगी?"

यह बात उन्होंने अल्लाह की क़ुदरत पर भरोसा न होने की वजह से नहीं कही, बल्कि महज़ इंसानी फ़ितरत और अचरज के तौर पर कही। उन्हें यक़ीन था कि अल्लाह जो चाहता है वह करता है, लेकिन इंसानी जज़्बात और उम्र के हिसाब से यह बात उन्हें अजीब लगी।

इस आयत में हमें अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर करने की तरबियत दी गई है। जब अल्लाह किसी काम का इरादा कर लेता है, तो उसके लिए कोई वजह रुकावट नहीं बन सकती। बूढ़ी और बांझ औरत के हिस्से में भी अल्लाह ने संतान लिख दी, तो वह मुमकिन हो गई। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम अल्लाह की रहमत से कभी मायूस न हों और उसकी क़ुदरत पर पूरा भरोसा रखें। अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, और जब वह किसी को खुशखबरी देता है, तो वह ज़रूर पूरी होती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अज़-ज़ारियात

27فَقَرَّبَهُ إِلَيْهِمْ قَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ
और उसे उनके आगे रख दिया (फिर) कहने लगे आप लोग तनाउल क्यों नहीं करते
28فَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً ۖ قَالُوا لَا تَخَفْ ۖ وَبَشَّرُوهُ بِغُلَامٍ عَلِيمٍ
(इस पर भी न खाया) तो इबराहीम उनसे जो ही जी में डरे वह लोग बोले आप अन्देशा न करें और उनको एक दानिशमन्द लड़के की ख़ुशख़बरी दी
29فَأَقْبَلَتِ امْرَأَتُهُ فِي صَرَّةٍ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوزٌ عَقِيمٌ
तो (ये सुनते ही) इबराहीम की बीवी (सारा) चिल्लाती हुई उनके सामने आयीं और अपना मुँह पीट लिया कहने लगीं (ऐ है) एक तो (मैं) बुढ़िया (उस पर) बांझ
30قَالُوا كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ
लड़का क्यों कर होगा फ़रिश्ते बोले तुम्हारे परवरदिगार ने यूँ ही फरमाया है वह बेशक हिकमत वाला वाक़िफ़कार है
31۞ قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ
तब इबराहीम ने पूछा कि (ऐ ख़ुदा के) भेजे हुए फरिश्तों आख़िर तुम्हें क्या मुहिम दर पेश है
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अनुवाद — अज़-ज़ारियात 29

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Tuesday, August 18, 2026

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