अज़-ज़ारियात · 30/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
قَالُوا كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ ۝٣٠
Qaaloo kazaaliki qaala Rabbuki innahoo huwal hakeemul `aleem
📖 हिंदी अर्थ
लड़का क्यों कर होगा फ़रिश्ते बोले तुम्हारे परवरदिगार ने यूँ ही फरमाया है वह बेशक हिकमत वाला वाक़िफ़कार है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَٰلِكِ: इसी प्रकार, ऐसे ही।
  • قَالَ رَبُّكِ: आपके रब ने (यह) कहा है।
  • الْحَكِيمُ: अत्यंत तत्वदर्शी, जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और दूरदर्शिता से काम करता है।
  • الْعَلِيمُ: सब कुछ जानने वाला, जिसके ज्ञान से कोई चीज़ छिपी नहीं है।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की पत्नी (हज़रत सारा) ने इस खुशख़बरी पर हैरानी ज़ाहिर की कि मैं बूढ़ी हूँ और मेरे शौहर भी बूढ़े हैं, तो फ़रिश्तों ने उन्हें समझाया और कहा: "यह कोई हमारी अपनी बात नहीं है, बल्कि यह वही बात है जो आपके रब ने कही है।" यानी यह खुशख़बरी अल्लाह की तरफ़ से है, और जो अल्लाह कहता है वह ज़रूर पूरा होकर रहता है।

अल्लाह तआला الحَكِيمُ (बड़ा तत्वदर्शी) है — वह हर काम हिकमत से करता है, हर बात अपनी जगह पर रखता है। उसकी कोई बात बेमतलब या अकारण नहीं होती। और वह العليم (सब कुछ जानने वाला) है — उसे मालूम है कि उसके बंदों के लिए किस वक़्त क्या मुनासिब है, कौन सी नेमत कब देनी है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि अल्लाह के वादे पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। जब अल्लाह किसी बात का वादा कर देता है, तो उसके पूरा होने में कोई शक नहीं। इंसान की उम्र, हालात या ज़रूरतें अल्लाह की ताक़त के आगे कोई रुकावट नहीं बन सकतीं। अल्लाह जब चाहता है, किसी भी तरह से अपना वादा पूरा कर देता है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की हर बात और हर फ़ैसले में हिकमत (समझदारी) होती है, चाहे हमें वह समझ आए या न आए। हमें उसके फ़ैसलों पर राज़ी रहना चाहिए और उसकी तरफ़ से आने वाली हर ख़बर को सच मानना चाहिए।

अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — वह बूढ़ी और निःसंतान स्त्री को भी संतान की खुशख़बरी दे सकता है, क्योंकि उसकी कुदरत की कोई हद नहीं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह से हमेशा उम्मीद रखें, उसकी रहमत से कभी निराश न हों, और उसके वादों पर पक्का यक़ीन करें। यही सच्चे मोमिन की पहचान है कि वह अल्लाह की बात पर पूरा भरोसा करे और उसके हुक्म के आगे सर झुका दे।



📜 आयत 28-32 — अज़-ज़ारियात

28فَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً ۖ قَالُوا لَا تَخَفْ ۖ وَبَشَّرُوهُ بِغُلَامٍ عَلِيمٍ
(इस पर भी न खाया) तो इबराहीम उनसे जो ही जी में डरे वह लोग बोले आप अन्देशा न करें और उनको एक दानिशमन्द लड़के की ख़ुशख़बरी दी
29فَأَقْبَلَتِ امْرَأَتُهُ فِي صَرَّةٍ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوزٌ عَقِيمٌ
तो (ये सुनते ही) इबराहीम की बीवी (सारा) चिल्लाती हुई उनके सामने आयीं और अपना मुँह पीट लिया कहने लगीं (ऐ है) एक तो (मैं) बुढ़िया (उस पर) बांझ
30قَالُوا كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ
लड़का क्यों कर होगा फ़रिश्ते बोले तुम्हारे परवरदिगार ने यूँ ही फरमाया है वह बेशक हिकमत वाला वाक़िफ़कार है
31۞ قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ
तब इबराहीम ने पूछा कि (ऐ ख़ुदा के) भेजे हुए फरिश्तों आख़िर तुम्हें क्या मुहिम दर पेश है
32قَالُوا إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ
वह बोले हम तो गुनाहगारों (क़ौमे लूत) की तरफ भेजे गए हैं
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीRevelation
30आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 30

सूरा अज़-ज़ारियात आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : लड़का क्यों कर होगा फ़रिश्ते बोले तुम्हारे परवरदिगार ने यूँ…

सूरा आयत 30/60 — अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ारियात सुनें, अज़-ज़ारियात अनुवाद, अज़-ज़ारियात mp3, अज़-ज़ारियात pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए