Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَوْجَسَ: अपने मन में छिपाया, दिल में महसूस किया।
- خِيفَةً: डर, भय।
- بَشَّرُوهُ: उन्होंने उसे खुशखबरी दी।
- غُلَامٍ: लड़का, बेटा।
- عَلِيمٍ: बहुत ज्ञान वाला, विद्वान।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने देखा कि मेहमान खाने की तरफ हाथ नहीं बढ़ा रहे, तो उनके दिल में उनसे डर पैदा हो गया। उन्होंने सोचा कि शायद ये लोग कोई बुरा इरादा रखते हैं, क्योंकि आम तौर पर मेहमान खाना खाते हैं, लेकिन इन्होंने खाने से इनकार कर दिया। यह डर उन्होंने अपने दिल में छिपाया, लेकिन अल्लाह के फ़रिश्ते उनके इस अंदरूनी डर को भाँप गए। उन्होंने तुरंत उन्हें आश्वस्त किया और कहा: "डरो मत! हम अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते हैं, हम तुम्हारे पास कोई बुराई करने नहीं आए, बल्कि तुम्हें एक बहुत बड़ी खुशखबरी देने आए हैं।"
फिर उन्होंने हज़रत इब्राहीम को खुशखबरी सुनाई कि उनकी पत्नी सारा के गर्भ से एक लड़का पैदा होगा, जो बड़ा ही ज्ञानी और विद्वान होगा। वह लड़का हज़रत इस्हाक़ अलैहिस्सलाम थे, जो अल्लाह के नबी बने और अपने ज्ञान और समझ में बहुत बड़े थे। यह खुशखबरी उस समय दी गई जब हज़रत इब्राहीम और उनकी पत्नी दोनों बूढ़े हो चुके थे, लेकिन अल्लाह की क़ुदरत के आगे उम्र की कोई बंदिश नहीं होती। अल्लाह जब चाहता है, किसी भी हालत में अपना वादा पूरा करता है।
यह घटना हमें सिखाती है कि अल्लाह के नेक बंदों को कभी निराश नहीं होना चाहिए। हज़रत इब्राहीम ने अपने बुढ़ापे में भी अल्लाह की रहमत से यह बेटा पाया। यह भी सबक है कि जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, तो अल्लाह उसे ऐसी खुशखबरी देता है जो उसकी उम्मीदों से बढ़कर होती है। यह खुशखबरी सिर्फ हज़रत इब्राहीम के लिए नहीं थी, बल्कि हर उस इंसान के लिए एक पैग़ाम है जो अल्लाह की रहमत से निराश हो जाता है। अल्लाह की रहमत और क़ुदरत की कोई सीमा नहीं है।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि मेहमान का सम्मान करना चाहिए और मेहमानों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, जैसा कि हज़रत इब्राहीम ने किया। साथ ही, जब कोई इंसान किसी बात से डरे, तो उसे अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सब कुछ जानता है और वही अपने बंदों की हिफ़ाज़त करता है।
📜 आयत 26-30 — सूरा अज़-ज़ारियात
अनुवाद — अज़-ज़ारियात 28
सूरा अज़-ज़ारियात आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (इस पर भी न खाया) तो इबराहीम उनसे जो ही…सूरा आयत 28/60 — सूरा अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ारियात सुनें, सूरा अज़-ज़ारियात अनुवाद, सूरा अज़-ज़ारियात mp3, सूरा अज़-ज़ारियात pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ारियात
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 4, 2026
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