अन-नज्म · 13/62
अनुवाद उच्चारण — अन-नज्म
وَلَقَدْ رَآهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ ۝١٣
Wa laqad ra aahu nazlatan ukhraa
📖 हिंदी अर्थ
और उन्होने तो उस (जिबरील) को एक बार (शबे मेराज) और देखा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَآهُ (उसे देखा): यहाँ 'उसे' से अर्थ है जिब्रील अलैहिस्सलाम को।
  • نَزْلَةً (एक बार): इसका अर्थ है 'एक अवसर पर' या 'एक बार'।
  • أُخْرَى (दूसरी): यानी पहली बार के अलावा एक और बार।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी मुहम्मद ﷺ के उस महान अनुभव का ज़िक्र कर रहे हैं, जो उन्होंने मेराज की रात को प्राप्त किया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि मुहम्मद ﷺ ने जिब्रील अमीन को उनके असली रूप में एक और बार देखा। यह पहली बार नहीं था, बल्कि दूसरी बार था जब उन्होंने जिब्रील को उनकी मूल और वास्तविक सूरत में देखा। पहली बार उन्होंने उन्हें इसी रूप में देखा था जब शुरुआती वही (प्रकाशना) उन पर उतरी थी, और दूसरी बार यह दर्शन मेराज की रात को 'सिदरतुल मुंतहा' (अंतिम वृक्ष) के पास हुआ।

यह दृश्य उस समय हुआ जब नबी ﷺ आसमानों की यात्रा पर थे और सातवें आसमान पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने जिब्रील को उनके वास्तविक रूप में देखा, जो अल्लाह की महान रचनाओं में से एक है। यह दृश्य उनकी आँखों के लिए एक सम्मान और उनके दिल के लिए एक खुशी का कारण बना, और यह अल्लाह की कुदरत और उसकी बड़ाई का एक नमूना था।

इस आयत में एक बड़ी सीख है कि अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी ﷺ को विशेष सम्मान और करामातें प्रदान करता है। यह हमारे लिए इस बात का सबूत है कि नबी ﷺ का दर्जा अल्लाह के यहाँ कितना ऊँचा है। हमें चाहिए कि हम उन पर ईमान लाएँ, उनकी सुन्नत पर चलें और उनके बताए रास्ते पर साबित क़दम रहें। यह भी याद रखें कि जो लोग नबी ﷺ के देखे हुए दृश्यों और उनके अनुभवों को झुठलाते हैं, वे अपने नुक़सान में हैं, क्योंकि नबी ﷺ सच्चे हैं और उन्होंने जो कुछ भी देखा और बताया, वह सब अल्लाह की तरफ से था।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की कुदरत के आगे हमें सिर झुकाना चाहिए और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करना चाहिए। नबी ﷺ की यह यात्रा और यह दर्शन हमारे लिए एक इम्तिहान है कि हम उन पर विश्वास करते हैं या नहीं। जो लोग दिल से ईमान लाते हैं, वे इन आयतों से और भी मज़बूत होते हैं, और जिनके दिलों में शक है, वे इन्हें झुठलाकर अपना नुक़सान करते हैं। हमें चाहिए कि हम नबी ﷺ की मुहब्बत को अपने दिलों में बसाएँ और उनके बताए हुए रास्ते पर चलकर अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार बनें।



📜 आयत 11-15 — अन-नज्म

11مَا كَذَبَ الْفُؤَادُ مَا رَأَىٰ
तो जो कुछ उन्होने देखा उनके दिल ने झूठ न जाना
12أَفَتُمَارُونَهُ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ
तो क्या वह (रसूल) जो कुछ देखता है तुम लोग उसमें झगड़ते हो
13وَلَقَدْ رَآهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ
और उन्होने तो उस (जिबरील) को एक बार (शबे मेराज) और देखा है
14عِندَ سِدْرَةِ الْمُنتَهَىٰ
सिदरतुल मुनतहा के नज़दीक
15عِندَهَا جَنَّةُ الْمَأْوَىٰ
उसी के पास तो रहने की बेहिश्त है
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अनुवाद — अन-नज्म 13

सूरा अन-नज्म आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन्होने तो उस (जिबरील) को एक बार (शबे मेराज)…

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Tuesday, August 18, 2026

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