अन-नज्म · 27/62
अनुवाद उच्चारण — अन-नज्म
إِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ لَيُسَمُّونَ الْمَلَائِكَةَ تَسْمِيَةَ الْأُنثَىٰ ۝٢٧
innal lazeena laa yu`minoona bil aakhirati la yusammoonal malaaa`ikata tasmiyatal unsaa
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते वह फ़रिश्तों के नाम रखते हैं औरतों के से नाम हालॉकि उन्हें इसकी कुछ ख़बर नहीं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَيُسَمُّونَ الْمَلَائِكَةَ تَسْمِيَةَ الْأُنْثَىٰ: अर्थात वे फ़रिश्तों को लड़कियों (बेटियों) का नाम देते हैं, यानी उन्हें स्त्रीलिंग में पुकारते हैं और उन्हें अल्लाह की बेटियाँ कहते हैं।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों की निंदा करती है जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते। ये लोग, जो क़ुरैश के काफ़िर थे, अज्ञानता और मूर्खता के कारण फ़रिश्तों को स्त्रीलिंग में पुकारते थे और उन्हें अल्लाह की बेटियाँ कहते थे। उनका यह विश्वास था कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं, जबकि यह पूर्णतः झूठ और बुतपरस्ती का अवशेष था।

इस आयत में अल्लाह तआला ने स्पष्ट किया कि इन लोगों के पास इस झूठे दावे का कोई वैज्ञानिक या तर्कसंगत प्रमाण नहीं है। वे केवल अपने मनगढ़ंत अंदाज़ों और ख़्याली पुलाव पकाने वाली बातों का अनुसरण कर रहे हैं, जो हक़ (सत्य) के मुक़ाबले में कभी खड़ी नहीं हो सकतीं। अल्लाह तआला इनके इस कथन से बहुत ऊपर और पाक है — वह किसी संतान से पाक है, चाहे वह बेटा हो या बेटी।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला की पाकी और महानता पर ईमान रखना चाहिए। वह किसी भी प्रकार की संतान से पाक है, और फ़रिश्ते अल्लाह के सम्मानित बंदे हैं, जो उसकी आज्ञा का पालन करते हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के बारे में केवल वही बातें कहें जो उसने स्वयं अपनी किताब में बताई हैं, और अपनी ओर से कोई झूठी बात न गढ़ें।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अंदाज़ों और अटकलों पर चलना कभी सत्य तक नहीं पहुँचा सकता। सत्य केवल वही है जो अल्लाह की वही (प्रकाशना) से आया है। इसलिए हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत को ही अपना मार्गदर्शक बनाएँ, क्योंकि यही हमें सीधे रास्ते पर चलाता है और हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 25-29 — अन-नज्म

25فَلِلَّهِ الْآخِرَةُ وَالْأُولَىٰ
आख़ेरत और दुनिया तो ख़ास ख़ुदा ही के एख्तेयार में हैं
26۞ وَكَم مِّن مَّلَكٍ فِي السَّمَاوَاتِ لَا تُغْنِي شَفَاعَتُهُمْ شَيْئًا إِلَّا مِن بَعْدِ أَن يَأْذَنَ اللَّهُ لِمَن يَشَاءُ وَيَرْضَىٰ
और आसमानों में बहुत से फरिश्ते हैं जिनकी सिफ़ारिश कुछ भी काम न आती, मगर ख़ुदा जिसके लिए चाहे इजाज़त दे दे और पसन्द करे उसके बाद (सिफ़ारिश कर सकते हैं)
27إِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ لَيُسَمُّونَ الْمَلَائِكَةَ تَسْمِيَةَ الْأُنثَىٰ
जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते वह फ़रिश्तों के नाम रखते हैं औरतों के से नाम हालॉकि उन्हें इसकी कुछ ख़बर नहीं
28وَمَا لَهُم بِهِ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ ۖ وَإِنَّ الظَّنَّ لَا يُغْنِي مِنَ الْحَقِّ شَيْئًا
वह लोग तो बस गुमान (ख्याल) के पीछे चल रहे हैं, हालॉकि गुमान यक़ीन के बदले में कुछ भी काम नहीं आया करता,
29فَأَعْرِضْ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ إِلَّا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا
तो जो हमारी याद से रदगिरदानी करे ओर सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी ही का तालिब हो तुम भी उससे मुँह फेर लो
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अनुवाद — अन-नज्म 27

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Tuesday, August 18, 2026

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