अन-नज्म · 28/62
अनुवाद उच्चारण — अन-नज्म
وَمَا لَهُم بِهِ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ ۖ وَإِنَّ الظَّنَّ لَا يُغْنِي مِنَ الْحَقِّ شَيْئًا ۝٢٨
Wa maa lahum bihee min `ilmin iny yattabi`oona illaz zanna wa innaz zanna laa yughnee minal haqqi shai`aa
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग तो बस गुमान (ख्याल) के पीछे चल रहे हैं, हालॉकि गुमान यक़ीन के बदले में कुछ भी काम नहीं आया करता,

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِنْ عِلْمٍ – किसी ज्ञान का होना
  • الظَّنَّ – अटकल, गुमान, बिना प्रमाण के धारणा
  • لَا يُغْنِي مِنَ الْحَقِّ شَيْئًا – सत्य के मुकाबले कुछ भी काम नहीं आता, हक़ की जगह पूरा नहीं उतरता

व्याख्या:

यह आयत उन लोगों की निंदा करती है जो बिना किसी ज्ञान और प्रमाण के अल्लाह के बारे में झूठी बातें गढ़ते हैं। ये लोग, जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते, फ़रिश्तों को औरत कहते थे और उन्हें अल्लाह की बेटियाँ बताते थे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इनके पास इस बात का कोई ज्ञान नहीं है, न कोई दलील है और न कोई सबूत। ये सिर्फ़ अपने ख़यालात और अटकलों के पीछे चल रहे हैं।

अल्लाह तआला साफ़ फ़रमाता है कि अटकल और गुमान कभी भी हक़ (सत्य) की जगह नहीं ले सकते। भले ही कोई कितना ही देर तक गुमान करता रहे, लेकिन सच्चाई के सामने उसका गुमान बिल्कुल बेकार है। यहाँ "ظن" से मुराद वह झूठा वहम और भ्रम है, जिसकी कोई बुनियाद नहीं होती, न कि वह राय जो दो बातों में से किसी एक पर थोड़े प्रमाण के आधार पर रखी जाए।

यह आयत हमें सिखाती है कि दीन के मामलों में, अल्लाह और उसकी सृष्टि के बारे में बात करते समय हमें सिर्फ़ ज्ञान और प्रमाण पर चलना चाहिए, न कि अटकलों और मनगढ़ंत बातों पर। क़ुरआन और सुन्नत ही हमारे लिए ज्ञान का असली स्रोत हैं। जो लोग बिना ज्ञान के अल्लाह के बारे में बातें गढ़ते हैं, वे न केवल खुद गुमराह हैं बल्कि दूसरों को भी गुमराह कर रहे हैं।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने जीवन में हर काम ज्ञान और समझदारी से करना चाहिए। अल्लाह तआला ने हमें अक्ल दी है और क़ुरआन जैसी किताब दी है, ताकि हम सच्चाई को पहचानें और अटकलों से बचें। जो लोग अटकलों पर चलते हैं, वे कभी सच्चाई तक नहीं पहुँच सकते। सच्चाई सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से आई हिदायत में है, और यही हिदायत हमें क़ुरआन और सुन्नत में मिलती है। आओ, हम अपने जीवन को ज्ञान के उजाले से रोशन करें और अटकलों के अंधेरे से बचें, ताकि हम अल्लाह की रहमत और उसकी मग़फिरत के हक़दार बन सकें।



📜 आयत 26-30 — अन-नज्म

26۞ وَكَم مِّن مَّلَكٍ فِي السَّمَاوَاتِ لَا تُغْنِي شَفَاعَتُهُمْ شَيْئًا إِلَّا مِن بَعْدِ أَن يَأْذَنَ اللَّهُ لِمَن يَشَاءُ وَيَرْضَىٰ
और आसमानों में बहुत से फरिश्ते हैं जिनकी सिफ़ारिश कुछ भी काम न आती, मगर ख़ुदा जिसके लिए चाहे इजाज़त दे दे और पसन्द करे उसके बाद (सिफ़ारिश कर सकते हैं)
27إِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ لَيُسَمُّونَ الْمَلَائِكَةَ تَسْمِيَةَ الْأُنثَىٰ
जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते वह फ़रिश्तों के नाम रखते हैं औरतों के से नाम हालॉकि उन्हें इसकी कुछ ख़बर नहीं
28وَمَا لَهُم بِهِ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ ۖ وَإِنَّ الظَّنَّ لَا يُغْنِي مِنَ الْحَقِّ شَيْئًا
वह लोग तो बस गुमान (ख्याल) के पीछे चल रहे हैं, हालॉकि गुमान यक़ीन के बदले में कुछ भी काम नहीं आया करता,
29فَأَعْرِضْ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ إِلَّا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا
तो जो हमारी याद से रदगिरदानी करे ओर सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी ही का तालिब हो तुम भी उससे मुँह फेर लो
30ذَٰلِكَ مَبْلَغُهُم مِّنَ الْعِلْمِ ۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ اهْتَدَىٰ
उनके इल्म की यही इन्तिहा है तुम्हारा परवरदिगार, जो उसके रास्ते से भटक गया उसको भी ख़ूब जानता है, और जो राहे रास्त पर है उनसे भी ख़ूब वाक़िफ है
अन-नज्मकुरान सूची
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मक्कीRevelation
28आयत

अनुवाद — अन-नज्म 28

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Wednesday, August 19, 2026

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