अल-अनआम · 114/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
أَفَغَيْرَ اللَّهِ أَبْتَغِي حَكَمًا وَهُوَ الَّذِي أَنزَلَ إِلَيْكُمُ الْكِتَابَ مُفَصَّلًا ۚ وَالَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَعْلَمُونَ أَنَّهُ مُنَزَّلٌ مِّن رَّبِّكَ بِالْحَقِّ ۖ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَرِينَ ۝١١٤
Afaghairal laahi abtaghee hakamanw wa Huwal lazee anzala ilaikumul Kitaaba mufassalaa; wallazeena atai naahumul Kitaaba ya`lamoona annahoo munazzalum mir Rabbika bilhaqqi falaa takoonanna minal mumtareen
📖 हिंदी अर्थ
और ताकि जो लोग इफ़तेरा परदाज़ियाँ ये लोग ख़ुद करते हैं वह भी करने लगें (क्या तुम ये चाहते हो कि) मैं ख़ुदा को छोड़ कर किसी और को सालिस तलाश करुँ हालॉकि वह वही ख़ुदा है जिसने तुम्हारे पास वाज़ेए किताब नाज़िल की और जिन लोगों को हमने किताब अता फरमाई है वह यक़ीनी तौर पर जानते हैं कि ये (कुरान भी) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से बरहक़ नाज़िल किया गया है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَكَمًا: न्याय करने वाला, फ़ैसला करने वाला।
  • مُفَصَّلًا: विस्तृत, हर बात को स्पष्ट रूप से बयान करने वाला।
  • الْمُمْتَرِينَ: संदेह करने वाले, शक करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए जो आपसे झगड़ते हैं और आपके बीच फ़ैसला करने के लिए किसी और को हक़म (न्यायाधीश) बनाना चाहते हैं: "क्या मैं अल्लाह के अलावा किसी और को फ़ैसला करने वाला बनाऊँ, जबकि वही है जिसने तुम्हारी ओर यह क़ुरआन उतारा है, जिसमें हर चीज़ को विस्तार से स्पष्ट कर दिया गया है—सत्य और असत्य, हलाल और हराम, और वह सब कुछ जिसकी तुम्हें आवश्यकता है।"

यह क़ुरआन स्वयं एक पूर्ण न्यायाधीश और मार्गदर्शक है। और जिन लोगों को हमने पहले किताबें दीं—यहूदियों को तौरात और ईसाइयों को इंजील—उनके विद्वान यह अच्छी तरह जानते हैं कि यह क़ुरआन आपके रब की ओर से सत्य के साथ उतारा गया है, क्योंकि उनकी अपनी किताबों में इसकी पुष्टि और इसके आने की ख़बरें मौजूद हैं। वे इसे यक़ीन के साथ पहचानते हैं।

फिर ऐ नबी! आप उन लोगों में से न हों जो इस बारे में संदेह करते हैं। आपको पूरा यक़ीन रखना चाहिए कि यह वही सत्य है जो अल्लाह की ओर से उतारा गया है, और आपके पास जो कुछ भी वह्य (प्रकाशना) के रूप में आया है, उस पर दृढ़ विश्वास रखें।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह का क़ुरआन ही सबसे बड़ा न्यायाधीश है—हर विवाद में उसे ही हक़म बनाना चाहिए, क्योंकि वह हर बात को स्पष्ट और विस्तार से बयान करता है।
  2. क़ुरआन की सच्चाई का प्रमाण यह है कि पहले की आसमानी किताबों के विद्वान भी इसे पहचानते हैं—यह इस बात की गवाही है कि यह अल्लाह की ओर से है।
  3. मुसलमान को अपने दीन और क़ुरआन पर पूरा यक़ीन रखना चाहिए और किसी भी तरह के संदेह से अपने दिल को पाक रखना चाहिए।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि झगड़ों और मतभेदों में अल्लाह की किताब को ही फ़ैसला करने वाला बनाएँ, न कि अपनी इच्छाओं या दूसरों की राय को।
  5. अल्लाह का क़ुरआन एक पूर्ण मार्गदर्शक है जो हर युग और हर स्थिति के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है—यह हमारे लिए रहमत और हिदायत है।
🎧 सुनें

📜 आयत 112-116 — अल-अनआम

112وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوًّا شَيَاطِينَ الْإِنسِ وَالْجِنِّ يُوحِي بَعْضُهُمْ إِلَىٰ بَعْضٍ زُخْرُفَ الْقَوْلِ غُرُورًا ۚ وَلَوْ شَاءَ رَبُّكَ مَا فَعَلُوهُ ۖ فَذَرْهُمْ وَمَا يَفْتَرُونَ
कि और (ऐ रसूल जिस तरह ये कुफ्फ़ार तुम्हारे दुश्मन हैं) उसी तरह (गोया हमने ख़ुद आज़माइश के लिए शरीर आदमियों और जिनों को हर नबी का दुश्मन बनाया वह लोग एक दूसरे को फरेब देने की ग़रज़ से चिकनी चुपड़ी बातों की सरग़ोशी करते हैं और अगर तुम्हारा परवरदिगार चाहता तो ये लोग) ऐसी हरकत करने न पाते
113وَلِتَصْغَىٰ إِلَيْهِ أَفْئِدَةُ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ وَلِيَرْضَوْهُ وَلِيَقْتَرِفُوا مَا هُم مُّقْتَرِفُونَ
तो उनको और उनकी इफ़तेरा परदाज़ियों को छोड़ दो और ये (ये सरग़ोशियाँ इसलिए थीं) ताकि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं लाए उनके दिल उन (की शरारत) की तरफ मायल (ख्ािंच) हो जाएँ और उन्हें पसन्द करें
114أَفَغَيْرَ اللَّهِ أَبْتَغِي حَكَمًا وَهُوَ الَّذِي أَنزَلَ إِلَيْكُمُ الْكِتَابَ مُفَصَّلًا ۚ وَالَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَعْلَمُونَ أَنَّهُ مُنَزَّلٌ مِّن رَّبِّكَ بِالْحَقِّ ۖ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَرِينَ
और ताकि जो लोग इफ़तेरा परदाज़ियाँ ये लोग ख़ुद करते हैं वह भी करने लगें (क्या तुम ये चाहते हो कि) मैं ख़ुदा को छोड़ कर किसी और को सालिस तलाश करुँ हालॉकि वह वही ख़ुदा है जिसने तुम्हारे पास वाज़ेए किताब नाज़िल की और जिन लोगों को हमने किताब अता फरमाई है वह यक़ीनी तौर पर जानते हैं कि ये (कुरान भी) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से बरहक़ नाज़िल किया गया है
115وَتَمَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ صِدْقًا وَعَدْلًا ۚ لَّا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِهِ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
तो तुम (कहीं) शक़ करने वालों से न हो जाना और सच्चाई और इन्साफ में तो तुम्हारे परवरदिगार की बात पूरी हो गई कोई उसकी बातों का बदलने वाला नहीं और वही बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
116وَإِن تُطِعْ أَكْثَرَ مَن فِي الْأَرْضِ يُضِلُّوكَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَإِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ
और (ऐ रसूल) दुनिया में तो बहुतेरे लोग ऐसे हैं कि तुम उनके कहने पर चलो तो तुमको ख़ुदा की राह से बहका दें ये लोग तो सिर्फ अपने ख्यालात की पैरवी करते हैं और ये लोग तो बस अटकल पच्चू बातें किया करते हैं
अल-अनआमकुरान सूची
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114आयत

अनुवाद — अल-अनआम 114

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Tuesday, August 18, 2026

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