अल-अनआम · 115/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَتَمَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ صِدْقًا وَعَدْلًا ۚ لَّا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِهِ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ۝١١٥
Wa tammat Kalimatu Rabbika sidqanw wa `adlaa; laa mubaddila li Kalimaatih; wa Huwas Samee`ul `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम (कहीं) शक़ करने वालों से न हो जाना और सच्चाई और इन्साफ में तो तुम्हारे परवरदिगार की बात पूरी हो गई कोई उसकी बातों का बदलने वाला नहीं और वही बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَلِمَتُ رَبِّكَ: अल्लाह की बात, जो उसका वादा, वचन और फ़ैसला है।
  • صِدْقًا: सच्चाई के साथ, यानी हर बात में सच।
  • عَدْلًا: न्याय के साथ, यानी हर फ़ैसले में इंसाफ़।
  • لَا مُبَدِّلَ: कोई बदलने वाला नहीं, कोई तब्दील करने वाला नहीं।
  • السَّمِيعُ: सब कुछ सुनने वाला।
  • العَلِيمُ: सब कुछ जानने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला का कलाम (जो कुरआन और उसके वादे-वायदे हैं) अपनी पूरी हद तक पहुँच चुका है। यह कलाम दो गुणों से भरपूर है: सच्चाई और न्याय। यानी जो कुछ अल्लाह ने बताया, वह हर पहलू से सच है—चाहे वह अच्छाई की ख़बर हो या बुराई की, चाहे दुनिया की बात हो या आख़िरत की। और जो कुछ उसने फ़ैसला किया या हुक्म दिया, वह पूरी तरह न्याय पर आधारित है—उसमें किसी पर कोई ज़ुल्म नहीं, किसी के साथ कोई धोखा नहीं।

अल्लाह के इस कलाम और उसके फ़ैसलों को कोई बदलने वाला नहीं है। न कोई उसकी बात को रद्द कर सकता है, न उसके हुक्म को टाल सकता है, न उसके वादे को बदल सकता है। यह बात पूरी तरह मुकम्मल और महफ़ूज़ है। अल्लाह हर उस शख़्स की बात सुनता है जो उसके कलाम को बदलने या उसमें हेर-फेर करने की कोशिश करता है, और वह उनके दिलों के राज़ और उनकी छिपी नीयतों को भी जानता है। उसके इल्म से कोई चीज़ पोशीदा नहीं है, और वह हर उस व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा जो उसकी आयतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश करेगा।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह का कलाम और उसका वादा अटल और अटूट है—इसलिए मुसलमान को अल्लाह के वादे पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि उसका वादा कभी झूठा नहीं होता।
  2. अल्लाह का हर फ़ैसला न्याय पर आधारित है—इसलिए जब कभी ज़िंदगी में कोई मुश्किल आए, तो यक़ीन रखें कि अल्लाह ने जो किया है, उसमें हमारी भलाई ही है, भले ही हमें समझ न आए।
  3. जो लोग कुरआन को बदलने या उसमें तब्दीली करने की कोशिश करते हैं, वे अल्लाह के इल्म से बच नहीं सकते—अल्लाह उनकी हर बात सुनता है और उनकी हर नीयत जानता है, और वह उन्हें ज़रूर पकड़ेगा।
  4. यह आयत मुसलमानों को यह तसल्ली देती है कि कुरआन हमेशा महफ़ूज़ है, कोई उसे बदल नहीं सकता—इसलिए हमें उस पर अमल करने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 113-117 — अल-अनआम

113وَلِتَصْغَىٰ إِلَيْهِ أَفْئِدَةُ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ وَلِيَرْضَوْهُ وَلِيَقْتَرِفُوا مَا هُم مُّقْتَرِفُونَ
तो उनको और उनकी इफ़तेरा परदाज़ियों को छोड़ दो और ये (ये सरग़ोशियाँ इसलिए थीं) ताकि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं लाए उनके दिल उन (की शरारत) की तरफ मायल (ख्ािंच) हो जाएँ और उन्हें पसन्द करें
114أَفَغَيْرَ اللَّهِ أَبْتَغِي حَكَمًا وَهُوَ الَّذِي أَنزَلَ إِلَيْكُمُ الْكِتَابَ مُفَصَّلًا ۚ وَالَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَعْلَمُونَ أَنَّهُ مُنَزَّلٌ مِّن رَّبِّكَ بِالْحَقِّ ۖ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَرِينَ
और ताकि जो लोग इफ़तेरा परदाज़ियाँ ये लोग ख़ुद करते हैं वह भी करने लगें (क्या तुम ये चाहते हो कि) मैं ख़ुदा को छोड़ कर किसी और को सालिस तलाश करुँ हालॉकि वह वही ख़ुदा है जिसने तुम्हारे पास वाज़ेए किताब नाज़िल की और जिन लोगों को हमने किताब अता फरमाई है वह यक़ीनी तौर पर जानते हैं कि ये (कुरान भी) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से बरहक़ नाज़िल किया गया है
115وَتَمَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ صِدْقًا وَعَدْلًا ۚ لَّا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِهِ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
तो तुम (कहीं) शक़ करने वालों से न हो जाना और सच्चाई और इन्साफ में तो तुम्हारे परवरदिगार की बात पूरी हो गई कोई उसकी बातों का बदलने वाला नहीं और वही बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
116وَإِن تُطِعْ أَكْثَرَ مَن فِي الْأَرْضِ يُضِلُّوكَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَإِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ
और (ऐ रसूल) दुनिया में तो बहुतेरे लोग ऐसे हैं कि तुम उनके कहने पर चलो तो तुमको ख़ुदा की राह से बहका दें ये लोग तो सिर्फ अपने ख्यालात की पैरवी करते हैं और ये लोग तो बस अटकल पच्चू बातें किया करते हैं
117إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ مَن يَضِلُّ عَن سَبِيلِهِ ۖ وَهُوَ أَعْلَمُ بِالْمُهْتَدِينَ
(तो तुम क्या जानों) जो लोग उसकी राह से बहके हुए हैं उनको (कुछ) ख़ुदा ही ख़ूब जानता है और वह तो हिदायत याफ्ता लोगों से भी ख़ूब वाक़िफ है
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अनुवाद — अल-अनआम 115

सूरा अल-अनआम आयत 115 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम (कहीं) शक़ करने वालों से न हो जाना…

सूरा आयत 115/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 113–117. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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