Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُضِلُّوكَ: वे तुम्हें रास्ते से भटका देंगे।
- سَبِيلِ اللَّهِ: अल्लाह का मार्ग, यानी इस्लाम का दीन।
- الظَّنَّ: अटकल, बिना प्रमाण के अनुमान लगाना।
- يَخْرُصُونَ: वे झूठ बोलते हैं, अंदाज़े से बातें कहते हैं, या झूठी बातें गढ़ते हैं।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! अगर तुम धरती के अधिकतर लोगों की बात मान लो, तो वे तुम्हें अल्लाह के दीन से भटका देंगे। यह बात उन काफिरों और मुशरिकों के बारे में है जो बहुसंख्यक हैं, लेकिन उनकी बहुतायत का कोई महत्व नहीं, क्योंकि सत्य हमेशा अल्पसंख्यकों के साथ रहा है। अल्लाह की सुन्नत (रीति) यही है कि हक़ और सच्चाई को कम लोग ही अपनाते हैं।
ये लोग किसी ठोस ज्ञान या प्रमाण पर नहीं चलते, बल्कि केवल अपने अंदाज़ों और अटकलों का अनुसरण करते हैं। उन्होंने यह अनुमान लगा लिया है कि उनके बुज़ुर्ग और पूर्वज जिस रास्ते पर थे, वही सही है, और उनके ये देवी-देवता उन्हें अल्लाह के करीब कर देंगे। यह सब उनकी झूठी बातें और मनगढ़ंत कहानियाँ हैं, जिनका कोई वास्तविक आधार नहीं। वे केवल भ्रम और धोखे में हैं।
शिक्षाएँ और लाभ:
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि सत्य की कसौटी बहुमत नहीं है। किसी बात के सही होने के लिए यह आवश्यक नहीं कि अधिकतर लोग उसे मानते हों। हमें हमेशा क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में ही फैसला करना चाहिए, चाहे लोग कितने भी हों।
- अल्लाह का मार्ग एक ही है और वह सीधा है। जो लोग इस मार्ग से भटकते हैं, वे अपनी अटकलों और अनुमानों के पीछे चलते हैं। हमें अपने दीन में अटकलों और बिना प्रमाण के बातों से बचना चाहिए।
- यह आयत हमें सच्चाई पर स्थिर रहने की ताकत देती है, भले ही हम अकेले हों या अल्पसंख्यक हों। अल्लाह का साथ सच्चे लोगों के साथ होता है, चाहे वे कितने ही कम क्यों न हों।
- हमें अपने धर्म और विश्वास में अंधी परंपराओं और पूर्वजों की नकल नहीं करनी चाहिए, बल्कि ज्ञान और प्रमाण के आधार पर ही चलना चाहिए। अल्लाह ने हमें अक्ल और समझ दी है ताकि हम सत्य को पहचानें।
- यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि वे अपने नबी की शिक्षाओं पर चलें, न कि बहुसंख्यक लोगों की राय पर, क्योंकि अधिकतर लोग सत्य से दूर होते हैं और केवल अपनी इच्छाओं और भ्रमों का पालन करते हैं।
📜 आयत 114-118 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 116
सूरा अल-अनआम आयत 116 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) दुनिया में तो बहुतेरे लोग ऐसे हैं…सूरा आयत 116/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 114–118. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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