अल-अनआम · 17/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَإِن يَمْسَسْكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهُ إِلَّا هُوَ ۖ وَإِن يَمْسَسْكَ بِخَيْرٍ فَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ۝١٧
Wa iny-yamsaskal laahu bidurrin falaaa kaashifa lahoo illaa Huwa wa iny-yamsaska bikhairin fa Huwa `alaa kulli shai`in Qadeer
📖 हिंदी अर्थ
और अगर ख़ुदा तुम को किसी क़िस्म की तकलीफ पहुचाए तो उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं है और अगर तुम्हें कुछ फायदा) पहुंचाए तो भी (कोई रोक नहीं सकता क्योंकि) वह हर चीज़ पर क़ादिर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَمْسَسْكَ (छू ले) — अर्थात पहुँच जाए, आ जाए।
  • بِضُرٍّ (कष्ट/हानि) — अर्थात बीमारी, गरीबी, दुःख, संकट या कोई भी कठिनाई।
  • كَاشِفَ (दूर करने वाला) — अर्थात हटाने वाला, टालने वाला।
  • بِخَيْرٍ (भलाई) — अर्थात स्वास्थ्य, समृद्धि, सुख-शांति और नेमतें।
  • قَدِيرٌ (सामर्थ्यवान) — अर्थात हर चीज़ पर पूर्ण शक्ति रखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ इंसान! अगर अल्लाह तुझे किसी कष्ट में डाल दे — चाहे वह बीमारी हो, गरीबी हो, दुःख-तकलीफ़ हो या कोई और मुसीबत — तो उसे दूर करने वाला उसके सिवा कोई नहीं। न कोई वज़ीर, न कोई हकीम, न कोई ताक़तवर इंसान, न कोई वसीला — सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह ही उस कष्ट को हटा सकता है। और अगर वह तुझे किसी भलाई से नवाज़े — जैसे तंदुरुस्ती, दौलत, इज़्ज़त, औलाद या कोई और नेमत — तो उसे रोकने वाला भी कोई नहीं। कोई उसकी बख़्शिश को रद्द नहीं कर सकता और न ही उसके फ़ज़ल (कृपा) को वापस कर सकता है। वह हर चीज़ पर क़ादिर (पूर्ण सामर्थ्यवान) है — भलाई देने पर भी और कष्ट हटाने पर भी। उसकी शक्ति के आगे कोई चीज़ असम्भव नहीं, और उसके फ़ैसले के आगे कोई रुकावट नहीं।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. तवक्कुल (भरोसा) की शिक्षा: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हर हाल में हमारा भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर होना चाहिए। कष्ट में भी और सुख में भी — क्योंकि दोनों उसी के हाथ में हैं।
  2. अकेले अल्लाह से माँगना: जब हमें कोई मुसीबत आए, तो सीधे अल्लाह से दुआ करें, क्योंकि उसके सिवा कोई कष्ट हटाने वाला नहीं। यह हमें शिर्क (दूसरों को अल्लाह का साझी ठहराने) से बचाता है।
  3. शुक्रगुज़ारी का पाठ: जब अल्लाह हमें भलाई देता है, तो हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए, क्योंकि यह उसी की देन है और कोई उसे रोक नहीं सकता। यह हमें घमंड से बचाता है।
  4. अल्लाह की क़ुदरत पर यक़ीन: यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है — इसलिए हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए। चाहे हालात कितने भी बुरे हों, अल्लाह की रहमत से उम्मीद बनी रहनी चाहिए।
  5. इस्लाम का सुन्दर पहलू: यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में इंसान का रिश्ता सीधा अल्लाह से है — वह उसकी तरफ़ हाथ फैलाता है, और अल्लाह उसकी सुनता है। यही वह प्यारा पहलू है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाता है और उसके दिल को सुकून देता है।


📜 आयत 15-19 — अल-अनआम

15قُلْ إِنِّي أَخَافُ إِنْ عَصَيْتُ رَبِّي عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
(ऐ रसूल) तुम कहो कि अगर मैं नाफरमानी करुँ तो बेशक एक बड़े (सख्त) दिल के अज़ाब से डरता हूँ
16مَّن يُصْرَفْ عَنْهُ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمَهُ ۚ وَذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْمُبِينُ
उस दिन जिस (के सर) से अज़ाब टल गया तो (समझो कि) ख़ुदा ने उस पर (बड़ा) रहम किया और यही तो सरीही कामयाबी है
17وَإِن يَمْسَسْكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهُ إِلَّا هُوَ ۖ وَإِن يَمْسَسْكَ بِخَيْرٍ فَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और अगर ख़ुदा तुम को किसी क़िस्म की तकलीफ पहुचाए तो उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं है और अगर तुम्हें कुछ फायदा) पहुंचाए तो भी (कोई रोक नहीं सकता क्योंकि) वह हर चीज़ पर क़ादिर है
18وَهُوَ الْقَاهِرُ فَوْقَ عِبَادِهِ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْخَبِيرُ
वही अपने तमाम बन्दों पर ग़ालिब है और वह वाक़िफकार हकीम है
19قُلْ أَيُّ شَيْءٍ أَكْبَرُ شَهَادَةً ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ شَهِيدٌ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۚ وَأُوحِيَ إِلَيَّ هَٰذَا الْقُرْآنُ لِأُنذِرَكُم بِهِ وَمَن بَلَغَ ۚ أَئِنَّكُمْ لَتَشْهَدُونَ أَنَّ مَعَ اللَّهِ آلِهَةً أُخْرَىٰ ۚ قُل لَّا أَشْهَدُ ۚ قُلْ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ وَإِنَّنِي بَرِيءٌ مِّمَّا تُشْرِكُونَ
(ऐ रसूल) तुम पूछो कि गवाही में सबसे बढ़के कौन चीज़ है तुम खुद ही कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान ख़ुदा गवाह है और मेरे पास ये क़ुरान वही के तौर पर इसलिए नाज़िल किया गया ताकि मैं तुम्हें और जिसे (उसकी) ख़बर पहुँचे उसके ज़रिए से डराओ क्या तुम यक़ीनन यह गवाही दे सकते हो कि अल्लाह के साथ और दूसरे माबूद भी हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै तो उसकी गवाही नहीं देता (तुम दिया करो) तुम (उन लोगों से) कहो कि वह तो बस एक ही ख़ुदा है और जिन चीज़ों को तुम (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो
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अनुवाद — अल-अनआम 17

सूरा अल-अनआम आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर ख़ुदा तुम को किसी क़िस्म की तकलीफ पहुचाए…

सूरा आयत 17/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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