अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَمْسَسْكَ (छू ले) — अर्थात पहुँच जाए, आ जाए।
- بِضُرٍّ (कष्ट/हानि) — अर्थात बीमारी, गरीबी, दुःख, संकट या कोई भी कठिनाई।
- كَاشِفَ (दूर करने वाला) — अर्थात हटाने वाला, टालने वाला।
- بِخَيْرٍ (भलाई) — अर्थात स्वास्थ्य, समृद्धि, सुख-शांति और नेमतें।
- قَدِيرٌ (सामर्थ्यवान) — अर्थात हर चीज़ पर पूर्ण शक्ति रखने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ इंसान! अगर अल्लाह तुझे किसी कष्ट में डाल दे — चाहे वह बीमारी हो, गरीबी हो, दुःख-तकलीफ़ हो या कोई और मुसीबत — तो उसे दूर करने वाला उसके सिवा कोई नहीं। न कोई वज़ीर, न कोई हकीम, न कोई ताक़तवर इंसान, न कोई वसीला — सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह ही उस कष्ट को हटा सकता है। और अगर वह तुझे किसी भलाई से नवाज़े — जैसे तंदुरुस्ती, दौलत, इज़्ज़त, औलाद या कोई और नेमत — तो उसे रोकने वाला भी कोई नहीं। कोई उसकी बख़्शिश को रद्द नहीं कर सकता और न ही उसके फ़ज़ल (कृपा) को वापस कर सकता है। वह हर चीज़ पर क़ादिर (पूर्ण सामर्थ्यवान) है — भलाई देने पर भी और कष्ट हटाने पर भी। उसकी शक्ति के आगे कोई चीज़ असम्भव नहीं, और उसके फ़ैसले के आगे कोई रुकावट नहीं।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- तवक्कुल (भरोसा) की शिक्षा: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हर हाल में हमारा भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर होना चाहिए। कष्ट में भी और सुख में भी — क्योंकि दोनों उसी के हाथ में हैं।
- अकेले अल्लाह से माँगना: जब हमें कोई मुसीबत आए, तो सीधे अल्लाह से दुआ करें, क्योंकि उसके सिवा कोई कष्ट हटाने वाला नहीं। यह हमें शिर्क (दूसरों को अल्लाह का साझी ठहराने) से बचाता है।
- शुक्रगुज़ारी का पाठ: जब अल्लाह हमें भलाई देता है, तो हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए, क्योंकि यह उसी की देन है और कोई उसे रोक नहीं सकता। यह हमें घमंड से बचाता है।
- अल्लाह की क़ुदरत पर यक़ीन: यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है — इसलिए हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए। चाहे हालात कितने भी बुरे हों, अल्लाह की रहमत से उम्मीद बनी रहनी चाहिए।
- इस्लाम का सुन्दर पहलू: यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में इंसान का रिश्ता सीधा अल्लाह से है — वह उसकी तरफ़ हाथ फैलाता है, और अल्लाह उसकी सुनता है। यही वह प्यारा पहलू है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाता है और उसके दिल को सुकून देता है।
📜 आयत 15-19 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 17
सूरा अल-अनआम आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर ख़ुदा तुम को किसी क़िस्म की तकलीफ पहुचाए…सूरा आयत 17/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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