अल-अनआम · 16/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
مَّن يُصْرَفْ عَنْهُ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمَهُ ۚ وَذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْمُبِينُ ۝١٦
Mai yusraf `anhu Yawma`izin faqad rahimah; wa zaalikal fawzul mubeen
📖 हिंदी अर्थ
उस दिन जिस (के सर) से अज़ाब टल गया तो (समझो कि) ख़ुदा ने उस पर (बड़ा) रहम किया और यही तो सरीही कामयाबी है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُصْرَفْ عَنْهُ: जिससे उसे हटा दिया जाए (अर्थात यातना को उससे दूर कर दिया जाए)।
  • يَوْمَئِذٍ: उस दिन (यानी क़ियामत के दिन)।
  • فَقَدْ رَحِمَهُ: तो अल्लाह ने उस पर दया की।
  • الْفَوْزُ الْمُبِينُ: स्पष्ट सफलता, खुली कामयाबी।

तफ़सीर:

क़ियामत के दिन जब सभी इंसान हश्र के मैदान में इकट्ठे होंगे और अल्लाह अपने बंदों का हिसाब लेगा, तो उस दिन की भयावहता और यातना से जिसे भी बचा लिया जाएगा, वही सच्चा कामयाब है। यानी जिस व्यक्ति से उस दिन की सख्त अज़ाब (यातना) को टाल दिया गया, तो समझ लीजिए कि अल्लाह ने उस पर रहमत (दया) की। यह बचाव और निजात ही वह स्पष्ट सफलता है जिससे बढ़कर कोई सफलता नहीं। यहाँ "फ़ौज़ुल मुबीन" से मुराद वह खुली और ज़ाहिर कामयाबी है जो जहन्नम की आग से निजात पाकर जन्नत में दाखिल होने की है। यह वह कामयाबी है जो हर मुसीबत और हर दुनियावी कामयाबी से ऊपर है, क्योंकि यह हमेशा रहने वाली नेमत है।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि असली कामयाबी दुनिया की दौलत, शोहरत या ओहदा हासिल करना नहीं है, बल्कि असली कामयाबी अल्लाह की रहमत पाना और उसकी यातना से बचना है।
  2. इस आयत से हमें अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखनी चाहिए, क्योंकि वह अपने बंदों पर बहुत दयालु है और चाहता है कि उसके बंदे उसकी रहमत से निजात पाएँ।
  3. यह आयत हमें आख़िरत के दिन की याद दिलाती है, ताकि हम अपने जीवन को सही दिशा में लगाएँ और उन कामों से बचें जो उस दिन यातना का कारण बनें।
  4. इससे यह भी पता चलता है कि अल्लाह की रहमत पाने का सबसे बड़ा ज़रिया उसके आदेशों का पालन और उसकी नाराज़गी से बचना है, और यही वह रास्ता है जो हमें उस स्पष्ट सफलता तक पहुँचाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — अल-अनआम

14قُلْ أَغَيْرَ اللَّهِ أَتَّخِذُ وَلِيًّا فَاطِرِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَهُوَ يُطْعِمُ وَلَا يُطْعَمُ ۗ قُلْ إِنِّي أُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ أَوَّلَ مَنْ أَسْلَمَ ۖ وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या ख़ुदा को जो सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करने वाला है छोड़ कर दूसरे को (अपना) सरपरस्त बनाओ और वही (सब को) रोज़ी देता है और उसको कोई रोज़ी नहीं देता (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझे हुक्म दिया गया है कि सब से पहले इस्लाम लाने वाला मैं हूँ और (ये भी कि ख़बरदार) मुशरेकीन से न होना
15قُلْ إِنِّي أَخَافُ إِنْ عَصَيْتُ رَبِّي عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
(ऐ रसूल) तुम कहो कि अगर मैं नाफरमानी करुँ तो बेशक एक बड़े (सख्त) दिल के अज़ाब से डरता हूँ
16مَّن يُصْرَفْ عَنْهُ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمَهُ ۚ وَذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْمُبِينُ
उस दिन जिस (के सर) से अज़ाब टल गया तो (समझो कि) ख़ुदा ने उस पर (बड़ा) रहम किया और यही तो सरीही कामयाबी है
17وَإِن يَمْسَسْكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهُ إِلَّا هُوَ ۖ وَإِن يَمْسَسْكَ بِخَيْرٍ فَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और अगर ख़ुदा तुम को किसी क़िस्म की तकलीफ पहुचाए तो उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं है और अगर तुम्हें कुछ फायदा) पहुंचाए तो भी (कोई रोक नहीं सकता क्योंकि) वह हर चीज़ पर क़ादिर है
18وَهُوَ الْقَاهِرُ فَوْقَ عِبَادِهِ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْخَبِيرُ
वही अपने तमाम बन्दों पर ग़ालिब है और वह वाक़िफकार हकीम है
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अनुवाद — अल-अनआम 16

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Tuesday, August 18, 2026

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