अल-आराफ · 136/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
فَانتَقَمْنَا مِنْهُمْ فَأَغْرَقْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ بِأَنَّهُمْ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَكَانُوا عَنْهَا غَافِلِينَ ۝١٣٦
Fantaqamnaa minhum fa aghraqnaahum kazzaboo bi Aayaatinaa wa kaanoo `anhaa ghaafileen
📖 हिंदी अर्थ
तब आख़िर हमने उनसे (उनकी शरारत का) बदला लिया तो चूंकि वह लोग हमारी आयतों को झुटलाते थे और उनसे ग़ाफिल रहते थे हमने उन्हें दरिया में डुबो दिया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَانتَقَمْنَا: हमने बदला लिया / दंड दिया।
  • فَأَغْرَقْنَاهُمْ: हमने उन्हें डुबो दिया।
  • الْيَمِّ: समुद्र (यहाँ नील नदी का वह भाग जहाँ फ़िरौन और उसकी सेना डूबी)।
  • بِأَنَّهُمْ كَذَّبُوا: इस कारण कि उन्होंने झुठलाया।
  • آيَاتِنَا: हमारी निशानियाँ (मूसा अलैहिस्सलाम के चमत्कार)।
  • غَافِلِينَ: बेखबर / लापरवाह।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब फ़िरौन और उसकी क़ौम ने हद से ज़्यादा ज़ुल्म और सरकशी की, और अल्लाह तआला की तरफ़ से मूसा अलैहिस्सलाम के हाथों दिखाए गए चमत्कारों (अपनी लाठी का साँप बनना, हाथ का चमकना, तूफ़ान, टिड्डियाँ, जूँ, मेंढक और खून की आफ़तें) को देखने के बावजूद उन्होंने उन्हें झुठलाया और उनसे सबक़ नहीं लिया, तो अल्लाह ने उनके लिए निर्धारित समय आने पर उनसे बदला लिया। उनकी सज़ा यह थी कि उन्हें समुद्र (नील नदी) में डुबो दिया गया। जब मूसा अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम के साथ समुद्र पार कर गए, तो फ़िरौन और उसकी फ़ौज ने उनका पीछा किया, और अल्लाह ने समुद्र को उन पर बंद कर दिया, जिससे वे सब डूब गए।

यह सज़ा उन्हें इसलिए मिली क्योंकि उन्होंने अल्लाह की आयतों (निशानियों) को झुठलाया और उनसे बेखबर रहे। उनकी ग़फ़लत ही उनके इनकार का कारण बनी—वे इन निशानियों पर ग़ौर नहीं करते थे, न उनसे सीख लेते थे, बल्कि उन्हें जादू और झूठ कहकर खारिज कर देते थे। उनकी यही लापरवाही और अहंकार उनके विनाश का कारण बना।


फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की सज़ा अवश्य आती है: जब कोई क़ौम हद से गुज़र जाती है और अल्लाह की निशानियों को झुठलाती है, तो अल्लाह उन्हें पकड़ता है। सज़ा में देरी हो सकती है, लेकिन वह टलती नहीं।
  2. ग़फ़लत (लापरवाही) इनकार की जड़ है: जो लोग अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर नहीं करते, वे धीरे-धीरे इनकार और सरकशी की तरफ़ बढ़ जाते हैं। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह की आयतों (क़ुरआन और क़ुदरत के नज़ारों) पर ग़ौर करे और उनसे सबक़ ले।
  3. अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों उसके हुक्म से हैं: जिस तरह अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम और उनकी क़ौम को समुद्र पार कराकर बचाया, उसी तरह उसने फ़िरौन और उसकी फ़ौज को डुबोकर हलाक किया। यह अल्लाह की क़ुदरत की निशानी है कि वह जिसे चाहे बचाए और जिसे चाहे पकड़े।
  4. हक़ के आगे झुकना चाहिए: फ़िरौन ने हक़ (सच्चाई) को देखकर भी उसे क़बूल नहीं किया, इसलिए उसका अंजाम बुरा हुआ। हमें चाहिए कि जब सच्चाई सामने आए, तो उसे तुरंत क़बूल करें और अहंकार न करें।
  5. क़ुरआन की ये कहानियाँ हमारे लिए नसीहत हैं: ये क़िस्से सिर्फ़ इतिहास नहीं हैं, बल्कि हर ज़माने के लोगों के लिए सबक़ हैं कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम हमेशा बुरा होता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 134-138 — अल-आराफ

134وَلَمَّا وَقَعَ عَلَيْهِمُ الرِّجْزُ قَالُوا يَا مُوسَى ادْعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَ ۖ لَئِن كَشَفْتَ عَنَّا الرِّجْزَ لَنُؤْمِنَنَّ لَكَ وَلَنُرْسِلَنَّ مَعَكَ بَنِي إِسْرَائِيلَ
(और जब उन पर अज़ाब आ पड़ता तो कहने लगते कि ऐ मूसा तुम से जो ख़ुदा ने (क़बूल दुआ का) अहद किया है उसी की उम्मीद पर अपने ख़ुदा से दुआ माँगों और अगर तुमने हम से अज़ाब को टाल दिया तो हम ज़रूर भेज देगें
135فَلَمَّا كَشَفْنَا عَنْهُمُ الرِّجْزَ إِلَىٰ أَجَلٍ هُم بَالِغُوهُ إِذَا هُمْ يَنكُثُونَ
फिर जब हम उनसे उस वक्त क़े वास्ते जिस तक वह ज़रूर पहुँचते अज़ाब को हटा लेते तो फिर फौरन बद अहदी करने लगते
136فَانتَقَمْنَا مِنْهُمْ فَأَغْرَقْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ بِأَنَّهُمْ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَكَانُوا عَنْهَا غَافِلِينَ
तब आख़िर हमने उनसे (उनकी शरारत का) बदला लिया तो चूंकि वह लोग हमारी आयतों को झुटलाते थे और उनसे ग़ाफिल रहते थे हमने उन्हें दरिया में डुबो दिया
137وَأَوْرَثْنَا الْقَوْمَ الَّذِينَ كَانُوا يُسْتَضْعَفُونَ مَشَارِقَ الْأَرْضِ وَمَغَارِبَهَا الَّتِي بَارَكْنَا فِيهَا ۖ وَتَمَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ الْحُسْنَىٰ عَلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ بِمَا صَبَرُوا ۖ وَدَمَّرْنَا مَا كَانَ يَصْنَعُ فِرْعَوْنُ وَقَوْمُهُ وَمَا كَانُوا يَعْرِشُونَ
और जिन बेचारों को ये लोग कमज़ोर समझते थे उन्हीं को (मुल्क शाम की) ज़मीन का जिसमें हमने (ज़रखेज़ होने की) बरकत दी थी उसके पूरब पश्चिम (सब) का वारिस (मालिक) बना दिया और चूंकि बनी इसराईल नें (फिरऔन के ज़ालिमों) पर सब्र किया था इसलिए तुम्हारे परवरदिगार का नेक वायदा (जो उसने बनी इसराइल से किया था) पूरा हो गया और जो कुछ फिरऔन और उसकी क़ौम के लोग करते थे और जो ऊँची ऊँची इमारते बनाते थे सब हमने बरबाद कर दी
138وَجَاوَزْنَا بِبَنِي إِسْرَائِيلَ الْبَحْرَ فَأَتَوْا عَلَىٰ قَوْمٍ يَعْكُفُونَ عَلَىٰ أَصْنَامٍ لَّهُمْ ۚ قَالُوا يَا مُوسَى اجْعَل لَّنَا إِلَٰهًا كَمَا لَهُمْ آلِهَةٌ ۚ قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ
और हमने बनी ईसराइल को दरिया के उस पार उतार दिया तो एक ऐसे लोगों पर से गुज़रे जो अपने (हाथों से बनाए हुए) बुतों की परसतिश पर जमा बैठे थे (तो उनको देख कर बनी ईसराइल से) कहने लगे ऐ मूसा जैसे उन लोगों के माबूद (बुत) हैं वैसे ही हमारे लिए भी एक माबूद बनाओ मूसा ने जवाब दिया कि तुम लोग जाहिल लोग हो
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
136आयत

अनुवाद — अल-आराफ 136

सूरा अल-आराफ आयत 136 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तब आख़िर हमने उनसे (उनकी शरारत का) बदला लिया तो…

सूरा आयत 136/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 134–138. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए