अल-आराफ · 191/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
أَيُشْرِكُونَ مَا لَا يَخْلُقُ شَيْئًا وَهُمْ يُخْلَقُونَ ۝١٩١
A yushrikoona maa laa yakhluqu shai`anw wa hum yukhlaqoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या वह लोग ख़ुदा का शरीक ऐसों को बनाते हैं जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते बल्कि वह ख़ुद (ख़ुदा के) पैदा किए हुए हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَيُشْرِكُونَ: क्या वे साझीदार बनाते हैं?
  • مَا لَا يَخْلُقُ شَيْئًا: जो किसी चीज़ को पैदा नहीं करते।
  • وَهُمْ يُخْلَقُونَ: हालाँकि वे स्वयं पैदा किए जाते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मुशरिकों (बहुदेववादियों) की नादानी पर प्रश्नवाचक अंदाज़ में कड़ी फटकार लगाती है जो अल्लाह के साथ दूसरों को पूजा में साझीदार बनाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या ये लोग ऐसी चीज़ों को अल्लाह का साझीदार ठहराते हैं जो किसी भी चीज़ को पैदा करने की शक्ति ही नहीं रखतीं? न तो वे किसी को जीवन दे सकते हैं, न मौत, न रिज़्क़, न कोई लाभ या हानि पहुँचा सकते हैं। बल्कि वे खुद मख़लूक़ (पैदा किए गए) हैं — चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, पेड़ हों, या इबलीस और उसके अनुयायी हों। वे स्वयं अल्लाह की कुदरत से अस्तित्व में आए हैं, और उनका अस्तित्व अल्लाह की मर्ज़ी पर निर्भर है।

जब वे खुद पैदा किए गए हैं, तो वे पैदा करने वाले के साथ पूजा में कैसे साझीदार हो सकते हैं? क्या कोई मख़लूक़ अपने ख़ालिक़ (रचयिता) के बराबर हो सकता है? यह बिल्कुल असंभव और बेतुकी बात है। अगर वे थोड़ा सा भी विचार करें तो समझ जाएँ कि जो खुद मोहताज है, वह किसी की मदद कैसे कर सकता है? जो खुद पैदा है, वह किसी को पैदा कैसे कर सकता है? यही वह तर्क है जो शिर्क (बहुदेववाद) की जड़ को काट देता है।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की इबादत में किसी को साझीदार बनाना सबसे बड़ी नादानी और ज़ुल्म है, क्योंकि हर मख़लूक़ अल्लाह की मोहताज है।
  2. हमें अपने आस-पास की चीज़ों पर ग़ौर करना चाहिए — जो चीज़ें हम देखते हैं, वे सब पैदा की गई हैं, इसलिए वे पूजा के लायक़ नहीं हो सकतीं।
  3. यह आयत तौहीद (एकेश्वरवाद) की सबसे मज़बूत दलील है — जो खुद पैदा है, वह पैदा करने वाला नहीं हो सकता, और जो पैदा करने वाला नहीं, वह इबादत का हक़दार नहीं।
  4. इससे हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की कुदरत और उसकी बनाई हुई चीज़ों पर विचार करने से इंसान सीधे रास्ते पर आ सकता है और शिर्क जैसी बुराई से बच सकता है।
  5. यह आयत हमें अल्लाह की महानता का एहसास कराती है — वही अकेला ख़ालिक़ है, और उसकी इबादत ही सच्ची इबादत है, जो इंसान को शांति और कामयाबी देती है।


📜 आयत 189-193 — सूरा अल-आराफ

189۞ هُوَ الَّذِي خَلَقَكُم مِّن نَّفْسٍ وَاحِدَةٍ وَجَعَلَ مِنْهَا زَوْجَهَا لِيَسْكُنَ إِلَيْهَا ۖ فَلَمَّا تَغَشَّاهَا حَمَلَتْ حَمْلًا خَفِيفًا فَمَرَّتْ بِهِ ۖ فَلَمَّا أَثْقَلَت دَّعَوَا اللَّهَ رَبَّهُمَا لَئِنْ آتَيْتَنَا صَالِحًا لَّنَكُونَنَّ مِنَ الشَّاكِرِينَ
वह ख़ुदा ही तो है जिसने तुमको एक शख़्श (आदम) से पैदा किया और उसकी बची हुई मिट्टी से उसका जोड़ा भी बना डाला ताकि उसके साथ रहे सहे फिर जब इन्सान अपनी बीबी से हम बिस्तरी करता है तो बीबी एक हलके से हमल से हमला हो जाती है फिर उसे लिए चलती फिरती है फिर जब वह (ज्यादा दिन होने से बोझल हो जाती है तो दोनो (मिया बीबी) अपने परवरदिगार ख़ुदा से दुआ करने लगे कि अगर तो हमें नेक फरज़न्द अता फरमा तो हम ज़रूर तेरे शुक्रगुज़ार होगें
190فَلَمَّا آتَاهُمَا صَالِحًا جَعَلَا لَهُ شُرَكَاءَ فِيمَا آتَاهُمَا ۚ فَتَعَالَى اللَّهُ عَمَّا يُشْرِكُونَ
फिर जब ख़ुदा ने उनको नेक (फरज़न्द) अता फ़रमा दिया तो जो (औलाद) ख़ुदा ने उन्हें अता किया था लगे उसमें ख़ुदा का शरीक बनाने तो ख़ुदा (की शान) शिर्क से बहुत ऊँची है
191أَيُشْرِكُونَ مَا لَا يَخْلُقُ شَيْئًا وَهُمْ يُخْلَقُونَ
क्या वह लोग ख़ुदा का शरीक ऐसों को बनाते हैं जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते बल्कि वह ख़ुद (ख़ुदा के) पैदा किए हुए हैं
192وَلَا يَسْتَطِيعُونَ لَهُمْ نَصْرًا وَلَا أَنفُسَهُمْ يَنصُرُونَ
और न उनकी मदद की कुदरत रखते हैं और न आप अपनी मदद कर सकते हैं
193وَإِن تَدْعُوهُمْ إِلَى الْهُدَىٰ لَا يَتَّبِعُوكُمْ ۚ سَوَاءٌ عَلَيْكُمْ أَدَعَوْتُمُوهُمْ أَمْ أَنتُمْ صَامِتُونَ
और अगर तुम उन्हें हिदायत की तरफ बुलाओंगे भी तो ये तुम्हारी पैरवी नहीं करने के तुम्हारे वास्ते बराबर है ख्वाह (चाहे) तुम उनको बुलाओ या तुम चुपचाप बैठे रहो
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
191आयत

अनुवाद — अल-आराफ 191

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Thursday, October 1, 2026

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