अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أُبَلِّغُكُمْ – मैं तुम्हें पहुँचाता हूँ।
- رِسَالَاتِ رَبِّي – मेरे पालनहार के संदेश (जो उसने मुझे सौंपे हैं)।
- نَاصِحٌ – तुम्हारा शुभचिंतक, भलाई चाहने वाला।
- أَمِينٌ – विश्वसनीय, अमानतदार (जो संदेश में कोई कमी या अधिकती न करे)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) के उस कथन का हिस्सा है, जो उन्होंने अपनी क़ौम 'आद' से कहा था। इस पवित्र वाक्य में नबी की दो सबसे बड़ी विशेषताएँ बयान हो रही हैं—संदेश पहुँचाना और अमानतदारी।
हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम को समझा रहे हैं कि मैं तुम्हारे पास अपनी तरफ़ से कोई बात नहीं लाया, बल्कि मैं अपने रब के भेजे हुए संदेशों को बिल्कुल वैसे ही पहुँचा रहा हूँ, जैसे वे मुझे सौंपे गए हैं। इसमें न कोई कमी करता हूँ, न ज़्यादती, न कोई बात छिपाता हूँ और न कोई अपनी तरफ़ से जोड़ता हूँ। यही अमानतदारी है।
फिर वे कहते हैं: "और मैं तुम्हारे लिए नसीहत करने वाला और विश्वसनीय हूँ।" यानी मैं तुम्हारा सच्चा शुभचिंतक हूँ। मैं तुम्हें जिस चीज़ की ओर बुला रहा हूँ—अल्लाह की एकता (तौहीद) और उसकी शरीयत पर चलने की—यह सब तुम्हारी अपनी भलाई के लिए है। मुझे तुमसे कोई दुनियावी मतलब नहीं, न मैं कोई बदला चाहता हूँ। मेरा उद्देश्य सिर्फ़ यह है कि तुम सीधे रास्ते पर आओ और अल्लाह की पकड़ से बच जाओ।
यह आयत हमें सिखाती है कि दीन का प्रचार-प्रसार करने वाले का दिल साफ़ होना चाहिए, उसकी नीयत ख़ालिस होनी चाहिए, और वह अमानतदार होना चाहिए। जो व्यक्ति अल्लाह का संदेश पहुँचाए, उसे चाहिए कि वह उसमें कोई मिलावट न करे, न किसी के डर से सच को छिपाए और न किसी लालच में पड़कर झूठ को सच कहे।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें यह भी बताती है कि नबियों का रास्ता सच्चाई, ईमानदारी और अमानतदारी का रास्ता है। वे अपनी क़ौम की भलाई के लिए दिन-रात मेहनत करते थे, भले ही लोग उन्हें झुठलाएँ या उनका मज़ाक उड़ाएँ। हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को जिस सच्चाई की ओर बुलाया, वही सच्चाई आज हमारे पास क़ुरआन और सुन्नत की शक्ल में मौजूद है। हमें चाहिए कि इस नेमत की क़द्र करें, उस पर अमल करें और उसे दूसरों तक उसी अमानतदारी के साथ पहुँचाएँ।
अल्लाह हमें सच्चे दिल से अपने दीन को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 66-70 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 68
सूरा अल-आराफ आयत 68 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार के पैग़ामात पहँचाए देता हूँ…सूरा आयत 68/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








