अल-आराफ · 68/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
أُبَلِّغُكُمْ رِسَالَاتِ رَبِّي وَأَنَا لَكُمْ نَاصِحٌ أَمِينٌ ۝٦٨
Uballighukum Risaalaati Rabbee wa ana lakum naasihun ameen
📖 हिंदी अर्थ
मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार के पैग़ामात पहँचाए देता हूँ और मैं तुम्हारा सच्चा ख़ैरख्वाह हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أُبَلِّغُكُمْ – मैं तुम्हें पहुँचाता हूँ।
  • رِسَالَاتِ رَبِّي – मेरे पालनहार के संदेश (जो उसने मुझे सौंपे हैं)।
  • نَاصِحٌ – तुम्हारा शुभचिंतक, भलाई चाहने वाला।
  • أَمِينٌ – विश्वसनीय, अमानतदार (जो संदेश में कोई कमी या अधिकती न करे)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) के उस कथन का हिस्सा है, जो उन्होंने अपनी क़ौम 'आद' से कहा था। इस पवित्र वाक्य में नबी की दो सबसे बड़ी विशेषताएँ बयान हो रही हैं—संदेश पहुँचाना और अमानतदारी

हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम को समझा रहे हैं कि मैं तुम्हारे पास अपनी तरफ़ से कोई बात नहीं लाया, बल्कि मैं अपने रब के भेजे हुए संदेशों को बिल्कुल वैसे ही पहुँचा रहा हूँ, जैसे वे मुझे सौंपे गए हैं। इसमें न कोई कमी करता हूँ, न ज़्यादती, न कोई बात छिपाता हूँ और न कोई अपनी तरफ़ से जोड़ता हूँ। यही अमानतदारी है।

फिर वे कहते हैं: "और मैं तुम्हारे लिए नसीहत करने वाला और विश्वसनीय हूँ।" यानी मैं तुम्हारा सच्चा शुभचिंतक हूँ। मैं तुम्हें जिस चीज़ की ओर बुला रहा हूँ—अल्लाह की एकता (तौहीद) और उसकी शरीयत पर चलने की—यह सब तुम्हारी अपनी भलाई के लिए है। मुझे तुमसे कोई दुनियावी मतलब नहीं, न मैं कोई बदला चाहता हूँ। मेरा उद्देश्य सिर्फ़ यह है कि तुम सीधे रास्ते पर आओ और अल्लाह की पकड़ से बच जाओ।

यह आयत हमें सिखाती है कि दीन का प्रचार-प्रसार करने वाले का दिल साफ़ होना चाहिए, उसकी नीयत ख़ालिस होनी चाहिए, और वह अमानतदार होना चाहिए। जो व्यक्ति अल्लाह का संदेश पहुँचाए, उसे चाहिए कि वह उसमें कोई मिलावट न करे, न किसी के डर से सच को छिपाए और न किसी लालच में पड़कर झूठ को सच कहे।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें यह भी बताती है कि नबियों का रास्ता सच्चाई, ईमानदारी और अमानतदारी का रास्ता है। वे अपनी क़ौम की भलाई के लिए दिन-रात मेहनत करते थे, भले ही लोग उन्हें झुठलाएँ या उनका मज़ाक उड़ाएँ। हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को जिस सच्चाई की ओर बुलाया, वही सच्चाई आज हमारे पास क़ुरआन और सुन्नत की शक्ल में मौजूद है। हमें चाहिए कि इस नेमत की क़द्र करें, उस पर अमल करें और उसे दूसरों तक उसी अमानतदारी के साथ पहुँचाएँ।

अल्लाह हमें सच्चे दिल से अपने दीन को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 66-70 — अल-आराफ

66قَالَ الْمَلَأُ الَّذِينَ كَفَرُوا مِن قَوْمِهِ إِنَّا لَنَرَاكَ فِي سَفَاهَةٍ وَإِنَّا لَنَظُنُّكَ مِنَ الْكَاذِبِينَ
(तो) उनकी क़ौम के चन्द सरदार जो काफिर थे कहने लगे हम तो बेशक तुमको हिमाक़त में (मुब्तिला) देखते हैं और हम यक़ीनी तुम को झूठा समझते हैं
67قَالَ يَا قَوْمِ لَيْسَ بِي سَفَاهَةٌ وَلَٰكِنِّي رَسُولٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
हूद ने कहा ऐ मेरी क़ौम मुझमें में तो हिमाक़त की कोई बात नहीं बल्कि मैं तो परवरदिगार आलम का रसूल हूँ
68أُبَلِّغُكُمْ رِسَالَاتِ رَبِّي وَأَنَا لَكُمْ نَاصِحٌ أَمِينٌ
मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार के पैग़ामात पहँचाए देता हूँ और मैं तुम्हारा सच्चा ख़ैरख्वाह हूँ
69أَوَعَجِبْتُمْ أَن جَاءَكُمْ ذِكْرٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَلَىٰ رَجُلٍ مِّنكُمْ لِيُنذِرَكُمْ ۚ وَاذْكُرُوا إِذْ جَعَلَكُمْ خُلَفَاءَ مِن بَعْدِ قَوْمِ نُوحٍ وَزَادَكُمْ فِي الْخَلْقِ بَسْطَةً ۖ فَاذْكُرُوا آلَاءَ اللَّهِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
क्या तुम्हें इस पर ताअज्जुब है कि तुम्हारे परवरदिगार का हुक्म तुम्हारे पास तुम्ही में एक मर्द (आदमी) के ज़रिए से (आया) कि तुम्हें (अजाब से) डराए और (वह वक्त) याद करो जब उसने तुमको क़ौम नूह के बाद ख़लीफा (व जानशीन) बनाया और तुम्हारी ख़िलाफ़त में भी बहुत ज्यादती कर दी तो ख़ुदा की नेअमतों को याद करो ताकि तुम दिली मुरादे पाओ
70قَالُوا أَجِئْتَنَا لِنَعْبُدَ اللَّهَ وَحْدَهُ وَنَذَرَ مَا كَانَ يَعْبُدُ آبَاؤُنَا ۖ فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
तो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि सिर्फ ख़ुदा की तो इबादत करें और जिनको हमारे बाप दादा पूजते चले आए छोड़ बैठें पस अगर तुम सच्चे हो तो जिससे तुम हमको डराते हो हमारे पास लाओ
अल-आराफकुरान सूची
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अनुवाद — अल-आराफ 68

सूरा अल-आराफ आयत 68 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार के पैग़ामात पहँचाए देता हूँ…

सूरा आयत 68/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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