अल-मआरिज · 18/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
وَجَمَعَ فَأَوْعَىٰ ۝١٨
W jama`a fa aw`aa
📖 हिंदी अर्थ
जिन्होंने (दीन से) पीठ फेरी और मुँह मोड़ा और (माल जमा किया)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَجَمَعَ — और उसने धन-दौलत इकट्ठा किया।
  • فَأَوْعَىٰ — उसे बर्तन/खज़ाने में रखा, यानी उसे संजोकर रखा और अल्लाह का हक़ (ज़कात, सदक़ा) अदा नहीं किया।

तफ़सीर:

यह आयत उस व्यक्ति की स्थिति का वर्णन कर रही है जो सत्य से मुँह मोड़ता है और अल्लाह की राह में खर्च नहीं करता। ऐसा व्यक्ति जब धन इकट्ठा करता है, तो उसे कसकर बाँधकर रखता है, उसे खर्च करने से डरता है, और अल्लाह का हक़ (ज़कात, ख़ैरात) अदा नहीं करता। वह सोचता है कि यह धन उसे हमेशा के लिए मिल गया है, लेकिन वह भूल जाता है कि यह सब एक इम्तिहान है।

यह आयत हमें सिखाती है कि धन अल्लाह की देन है, और उसमें ग़रीबों और ज़रूरतमंदों का हक़ होता है। जो व्यक्ति इस हक़ को अदा नहीं करता, वह अपने लिए अल्लाह का क्रोध और आख़िरत में सख़्त अज़ाब खरीदता है। अल्लाह तआला ऐसे लोगों से बेज़ार है जो दुनिया के माल को जमा करके रखते हैं और उसे अल्लाह की राह में खर्च नहीं करते।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने धन को अल्लाह की राह में खर्च करना चाहिए, ग़रीबों की मदद करनी चाहिए, और यह नहीं सोचना चाहिए कि धन इकट्ठा करके रखना ही सब कुछ है। बल्कि असली कामयाबी उसी की है जो अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च करे और उसका हक़ अदा करे। याद रखिए, जो व्यक्ति दुनिया में माल जमा करके रखता है, वह आख़िरत में पछताएगा, जब उसका धन उसके किसी काम न आएगा। अल्लाह तआला हमें इस बुराई से बचाए और हमें सच्चा खर्च करने वाला बनाए। आमीन।



📜 आयत 16-20 — अल-मआरिज

16نَزَّاعَةً لِّلشَّوَىٰ
जहन्नुम की वह भड़कती आग है कि खाल उधेड़ कर रख देगी
17تَدْعُو مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰ
(और) उन लोगों को अपनी तरफ बुलाती होगी
18وَجَمَعَ فَأَوْعَىٰ
जिन्होंने (दीन से) पीठ फेरी और मुँह मोड़ा और (माल जमा किया)
19۞ إِنَّ الْإِنسَانَ خُلِقَ هَلُوعًا
और बन्द कर रखा बेशक इन्सान बड़ा लालची पैदा हुआ है
20إِذَا مَسَّهُ الشَّرُّ جَزُوعًا
जब उसे तक़लीफ छू भी गयी तो घबरा गया
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अनुवाद — अल-मआरिज 18

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Tuesday, August 18, 2026

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