अन-नबा · 36/40
अनुवाद उच्चारण — अन-नबा
جَزَاءً مِّن رَّبِّكَ عَطَاءً حِسَابًا ۝٣٦
Jazaa-am mir-rabbika ataa-an hisaaba
📖 हिंदी अर्थ
(ये) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से काफ़ी इनाम और सिला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَزَاءً: बदला, प्रतिफल
  • عَطَاءً: उपहार, देन
  • حِسَابًا: काफी, पर्याप्त (यहाँ इसका अर्थ है कि अल्लाह का दिया हुआ इतना अधिक होगा कि उसे गिना नहीं जा सकता, या फिर यह कि अल्लाह ने जो दिया है वह उनके लिए पूर्ण रूप से पर्याप्त और काफी होगा)

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन ईमानवालों के लिए अल्लाह की ओर से उस महान प्रतिफल का वर्णन कर रही है जो उन्हें जन्नत में मिलेगा। अल्लाह तआला फरमाता है कि यह सब कुछ जो मोमिनों को मिलेगा—वे बाग, वे फल, वे नेमतें, वह सुख-चैन—यह सब तुम्हारे रब की ओर से एक विशेष बदला है, जो उसकी ओर से एक उपहार और इनाम के रूप में दिया जाएगा।

यहाँ "عَطَاءً حِسَابًا" का अर्थ है कि अल्लाह का यह उपहार इतना अधिक और विशाल होगा कि उसे गिना नहीं जा सकता, और यह उनकी जरूरतों को पूरी तरह से पूरा करने वाला होगा। यह केवल उनके अमलों का बदला नहीं है, बल्कि अल्लाह की ओर से एक विशेष कृपा और दया है, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों को उनके अमलों से कहीं अधिक देता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का दरवाजा कितना उदार है! वह अपने बंदों को सिर्फ उनके कर्मों का हिसाब नहीं देता, बल्कि अपनी रहमत और फजल से उन्हें अनगिनत नेमतें प्रदान करता है। जो व्यक्ति दुनिया में अल्लाह की राह में चलता है, उसके लिए अल्लाह ने ऐसा इनाम तैयार किया है जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है। उसने जो वादा किया है, वह अवश्य पूरा करेगा। इसलिए हमें अपने जीवन में ईमान और अच्छे कर्मों पर स्थिर रहना चाहिए, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें इस महान प्रतिफल तक पहुँचाता है।

अल्लाह तआला अपने बंदों से इतना प्यार करता है कि वह उन्हें सिर्फ उनके कर्मों का बदला नहीं देता, बल्कि अपनी ओर से और भी अधिक देता है। यह अल्लाह की असीम दया और करम का प्रमाण है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के इस करम की कद्र करें और उसकी इबादत में अपनी जिंदगी बिताएं, ताकि हम भी उस दिन उन खुशनसीबों में शामिल हों जिन्हें यह महान उपहार मिलेगा।



📜 आयत 34-38 — अन-नबा

34وَكَأْسًا دِهَاقًا
और बाहम हमजोलियाँ हैं और शराब के लबरेज़ साग़र
35لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّابًا
और शराब के लबरेज़ साग़र वहाँ न बेहूदा बात सुनेंगे और न झूठ
36جَزَاءً مِّن رَّبِّكَ عَطَاءً حِسَابًا
(ये) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से काफ़ी इनाम और सिला है
37رَّبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الرَّحْمَٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًا
जो सारे आसमान और ज़मीन और जो इन दोनों के बीच में है सबका मालिक है बड़ा मेहरबान लोगों को उससे बात का पूरा न होगा
38يَوْمَ يَقُومُ الرُّوحُ وَالْمَلَائِكَةُ صَفًّا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ الرَّحْمَٰنُ وَقَالَ صَوَابًا
जिस दिन जिबरील और फरिश्ते (उसके सामने) पर बाँध कर खड़े होंगे (उस दिन) उससे कोई बात न कर सकेगा मगर जिसे ख़ुदा इजाज़त दे और वह ठिकाने की बात कहे
अन-नबाकुरान सूची
40आयत
मक्कीRevelation
36आयत

अनुवाद — अन-नबा 36

सूरा अन-नबा आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से काफ़ी इनाम और सिला…

सूरा आयत 36/40 — अन-नबा النبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नबा सुनें, अन-नबा अनुवाद, अन-नबा mp3, अन-नबा pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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