अन-नबा · 35/40
अनुवाद उच्चारण — अन-नबा
لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّابًا ۝٣٥
Laa yasma`oona fiha lagh waw walaa kizzaba
📖 हिंदी अर्थ
और शराब के लबरेज़ साग़र वहाँ न बेहूदा बात सुनेंगे और न झूठ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَغْوًا (लग़्वन): बेकार की बात, झूठी और व्यर्थ बातें।
  • كِذَّابًا (किज़्ज़ाबन): झूठ बोलना या एक-दूसरे को झुठलाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के लिए एक खुशखबरी है जो अल्लाह से डरते हैं और अच्छे कर्म करते हैं। अल्लाह तआला ने उनके लिए जन्नत की नेमतों का ज़िक्र करने के बाद यह बताया कि जन्नत की एक बड़ी खासियत यह है कि वहाँ का माहौल पूरी तरह पाक और साफ होगा। वहाँ न तो कोई बेकार और व्यर्थ बात सुनने को मिलेगी, और न ही कोई झूठ बोलेगा या किसी को झुठलाएगा।

जन्नत में लोगों की ज़ुबानें भी पाक होंगी, उनके दिल भी साफ होंगे, और उनकी बातचीत में सिर्फ़ सच्चाई, सलामती और अच्छाई होगी। वहाँ कोई किसी को धोखा नहीं देगा, कोई किसी की तौहीन नहीं करेगा, और न ही कोई ऐसी बात होगी जो दिल को ठेस पहुँचाए। यह जन्नत की उन नेमतों में से एक सबसे बड़ी नेमत है, क्योंकि दुनिया में इंसान को अक्सर बेकार की बातें, झूठ, ग़ीबत और तकरार का सामना करना पड़ता है, जो दिल को बोझिल कर देती हैं।

यह आयत हमें यह सिखाती है कि जन्नत की तरफ़ बढ़ने के लिए हमें अपनी ज़ुबान को भी पाक रखना चाहिए। जो लोग दुनिया में झूठ, बेकार की बातों और दूसरों को ठेस पहुँचाने वाली बातों से बचते हैं, अल्लाह उन्हें ऐसी जगह देगा जहाँ यह सब कुछ नहीं होगा। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता।

तो आओ, हम अपनी ज़ुबान को सच्चाई, अच्छाई और नेकी की तरफ़ लगाएँ, क्योंकि जो आदतें हम दुनिया में बनाते हैं, उन्हीं का असर हमारी आख़िरत पर पड़ता है। जन्नत की यह नेमत उन्हीं के लिए है जो अल्लाह के हुक्मों पर चलते हैं और अपनी ज़ुबान को गुनाहों से बचाते हैं। अल्लाह हमें यह तौफ़ीक़ दे कि हम सच्ची और पाक बातें बोलें और उसकी जन्नत के हक़दार बनें। आमीन।



📜 आयत 33-37 — अन-नबा

33وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًا
और वह औरतें जिनकी उठती हुई जवानियाँ
34وَكَأْسًا دِهَاقًا
और बाहम हमजोलियाँ हैं और शराब के लबरेज़ साग़र
35لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّابًا
और शराब के लबरेज़ साग़र वहाँ न बेहूदा बात सुनेंगे और न झूठ
36جَزَاءً مِّن رَّبِّكَ عَطَاءً حِسَابًا
(ये) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से काफ़ी इनाम और सिला है
37رَّبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الرَّحْمَٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًا
जो सारे आसमान और ज़मीन और जो इन दोनों के बीच में है सबका मालिक है बड़ा मेहरबान लोगों को उससे बात का पूरा न होगा
अन-नबाकुरान सूची
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अनुवाद — अन-नबा 35

सूरा अन-नबा आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और शराब के लबरेज़ साग़र वहाँ न बेहूदा बात सुनेंगे…

सूरा आयत 35/40 — अन-नबा النبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नबा सुनें, अन-नबा अनुवाद, अन-नबा mp3, अन-नबा pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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