Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَأَنبَتْنَا: हमने उगाया
- فِيهَا: उस (ज़मीन) में
- حَبًّا: अनाज (गेहूँ, जौ आदि)
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में इंसान को उसकी रोज़ी और खाने की चीज़ों पर ग़ौर करने की दावत दे रहा है। जब इंसान यह सोचे कि उसका खाना कैसे पैदा होता है, तो उसे अपने रब की क़ुदरत का अंदाज़ा होता है। अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया, फिर ज़मीन को चीरकर उसमें से तरह-तरह की नबातात उगाईं। इन्हीं में से एक नेमत है अनाज — जैसे गेहूँ, जौ, चावल, मक्का और दूसरे दाने, जो इंसान की गुज़र-बसर का ज़रिया हैं।
यह अनाज अल्लाह की रहमत का नमूना है। एक छोटा सा दाना ज़मीन में डाला जाता है, फिर अल्लाह उसे उगाकर पूरा खेत बना देता है। यही अनाज इंसान की ताक़त और ज़िंदगी की बुनियाद है। अगर यह न हो, तो इंसान की ज़िंदगी मुश्किल हो जाए। यह सोचकर इंसान को चाहिए कि वह अपने रब का शुक्र अदा करे और उसकी नेमतों को पहचाने।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी रोज़ी अल्लाह के हाथ में है। वही पानी बरसाता है, वही ज़मीन से अनाज उगाता है, और वही हमें खिलाता-पिलाता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी रोज़ी में हलाल का ख़याल रखें, अल्लाह का शुक्र अदा करें और उसकी दी हुई नेमतों को ग़रीबों और ज़रूरतमंदों के साथ बाँटें। यही शुक्र अदा करने का तरीक़ा है, और यही इंसान को अल्लाह की मुहब्बत के क़रीब लाता है।
📜 आयत 25-29 — सूरा अबस
अनुवाद — अबस 27
सूरा अबस आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हमने उसमें अनाज उगायासूरा आयत 27/42 — सूरा अबस عبس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अबस सुनें, सूरा अबस अनुवाद, सूरा अबस mp3, सूरा अबस pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अबस
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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