अबस · 26/42
अनुवाद उच्चारण — अबस
ثُمَّ شَقَقْنَا الْأَرْضَ شَقًّا ۝٢٦
Thumma sha qaqnal-arda shaqqa
📖 हिंदी अर्थ
फिर हम ही ने ज़मीन (दरख्त उगाकर) चीरी फाड़ी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَقَقْنَا: हमने चीरा / फाड़ा
  • الأَرْضَ: धरती को
  • شَقًّا: (गहरा) चीरना / फाड़ना

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में इंसान को उसकी रोज़ी और खाने पर ग़ौर करने का आदेश दिया है। जब इंसान यह देखता है कि उसका भोजन कैसे पैदा होता है, तो उसे अपने रब की क़ुदरत का अंदाज़ा होता है। अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया, फिर उस पानी को ज़मीन में उतारा, और फिर ज़मीन को चीरा — यानी उसके सीने को शिगाफ़ दिया, ताकि उसमें से तरह-तरह की नबातात (वनस्पतियाँ) निकलें।

यह चीरना कोई साधारण क्रिया नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत का नमूना है। जब बीज ज़मीन में डाला जाता है, तो अल्लाह उस ज़मीन को चीरकर उसमें से कोमल पौधा निकालता है। यही वह शक्ति है जो सूखी, बंजर ज़मीन को हरा-भरा कर देती है। इसी चीरने से अनाज, फल, सब्ज़ियाँ, चारा — सब कुछ पैदा होता है, जो इंसानों और जानवरों की गुज़र-बसर का ज़रिया है।

इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि जिस अल्लाह ने ज़मीन को चीरकर रिज़्क़ पैदा किया, वही अल्लाह क़यामत के दिन लोगों को क़ब्रों से निकालने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। जिस तरह वह मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा करके नबातात उगाता है, उसी तरह वह मुर्दा इंसानों को दोबारा ज़िंदा करके उठाएगा। यह हमारे लिए सबसे बड़ी निशानी है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं।

ऐ इंसान! जब तू अपनी रोटी का एक टुकड़ा खाता है, तो याद कर कि यह अल्लाह की रहमत का नतीजा है। उसने ज़मीन चीरी, पानी बरसाया, धूप दी, हवा चलाई — तब जाकर यह दाना तेरे सामने आया। क्या यह अल्लाह शुक्र का मुस्तहिक़ नहीं? क्या यह अल्लाह इबादत के लायक़ नहीं? हर नए मौसम में, हर फसल में अल्लाह की क़ुदरत की नई दास्तान है। इसलिए अपने रब का शुक्र अदा करो, उसकी नेमतों को पहचानो, और उसी की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारो। यही इंसान की कामयाबी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।

🎧 सुनें

📜 आयत 24-28 — अबस

24فَلْيَنظُرِ الْإِنسَانُ إِلَىٰ طَعَامِهِ
तो इन्सान को अपने घाटे ही तरफ ग़ौर करना चाहिए
25أَنَّا صَبَبْنَا الْمَاءَ صَبًّا
कि हम ही ने (बादल) से पानी बरसाया
26ثُمَّ شَقَقْنَا الْأَرْضَ شَقًّا
फिर हम ही ने ज़मीन (दरख्त उगाकर) चीरी फाड़ी
27فَأَنبَتْنَا فِيهَا حَبًّا
फिर हमने उसमें अनाज उगाया
28وَعِنَبًا وَقَضْبًا
और अंगूर और तरकारियाँ
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अनुवाद — अबस 26

सूरा अबस आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हम ही ने ज़मीन (दरख्त उगाकर) चीरी फाड़ी

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Tuesday, August 18, 2026

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