अबस · 32/42
अनुवाद उच्चारण — सूरा अबस
مَّتَاعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَامِكُمْ ۝٣٢
Mata`al-lakum wa li-an`amikum
📖 हिंदी अर्थ
चारपायों के फायदे के लिए (बनाया)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَتَاعًا: लाभ, सुख-सुविधा और आवश्यकता की वस्तु, जिससे इंसान फायदा उठाए।
  • لَكُمْ: तुम्हारे लिए (इंसानों के लिए)।
  • وَلِأَنْعَامِكُمْ: और तुम्हारे चौपायों (जानवरों) के लिए।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपनी असीम रहमत और कुदरत से यह ज़मीन तैयार की, उसमें से तरह-तरह की चीज़ें उगाईं—अनाज, फल, सब्ज़ियाँ, घास और चारा। यह सब कुछ उसने सिर्फ़ इंसानों के लिए ही नहीं बनाया, बल्कि उनके जानवरों के लिए भी बनाया, ताकि इंसान अपनी ज़रूरतें पूरी करे और उसके जानवर भी चरकर पलें-बढ़ें। यह अल्लाह की उस दया का नमूना है जिसमें वह अपने बंदों को नेमतें देता है और उनकी ज़िंदगी को आसान बनाता है।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें याद दिलाता है कि यह सारी नेमतें उसी की देन हैं। जब इंसान अपनी रोज़ी, फल-फूल और हरियाली को देखे, तो उसे अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि यह सब किसी इंसानी ताक़त से नहीं, बल्कि अल्लाह की कुदरत से पैदा होता है। यही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाती है और उसके दिल में महब्बत पैदा करती है।

अल्लाह ने इंसान के लिए फल और अनाज पैदा किए, और जानवरों के लिए घास और चारा। यानी अल्लाह की रहमत सिर्फ़ इंसानों तक सीमित नहीं, बल्कि उसकी मख़लूक़ात (सृष्टि) के हर जीव तक फैली हुई है। यह हमें सिखाता है कि हमें भी अपने जानवरों के साथ नर्मी और मेहरबानी से पेश आना चाहिए, क्योंकि वे भी अल्लाह की अमानत हैं।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की नेमतों को कभी हल्का न समझें। हर दाना, हर फल, हर पत्ती अल्लाह की रहमत की निशानी है। जो इंसान इन नेमतों को पहचानता है और अल्लाह का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और देता है। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया में सुकून और आख़िरत में कामयाबी देता है।



📜 आयत 30-34 — सूरा अबस

30وَحَدَائِقَ غُلْبًا
और घने घने बाग़ और मेवे
31وَفَاكِهَةً وَأَبًّا
और चारा (ये सब कुछ) तुम्हारे और तुम्हारे
32مَّتَاعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَامِكُمْ
चारपायों के फायदे के लिए (बनाया)
33فَإِذَا جَاءَتِ الصَّاخَّةُ
तो जब कानों के परदे फाड़ने वाली (क़यामत) आ मौजूद होगी
34يَوْمَ يَفِرُّ الْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ
उस दिन आदमी अपने भाई
अबसकुरान सूची
42आयत
मक्कीअवतरण स्थान
32आयत

अनुवाद — अबस 32

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सूरा आयत 32/42 — सूरा अबस عبس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अबस सुनें, सूरा अबस अनुवाद, सूरा अबस mp3, सूरा अबस pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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