Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَاكِهَةً: फल, मेवे, अंगूर, अंजीर, अनार आदि तरह-तरह के फल।
- وَأَبًّا: चारा, घास, वह हरा चारा जो जानवर चरते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी उस महान शक्ति और रहमत का ज़िक्र किया है जो उसने इंसान के लिए ज़मीन से पैदा की। उसने ज़मीन से तरह-तरह के फल पैदा किए — मीठे, खट्टे, रसीले, सूखे — जो इंसानों के लिए खुशी और सेहत का सबब हैं। और साथ ही उसने "अब्ब" यानी चारा और हरी घास भी उगाई, जो जानवरों के लिए रिज़्क़ है। यानी अल्लाह ने अपनी इस तदबीर में इंसान और जानवर दोनों का इंतज़ाम किया है।
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जिस रब ने इतनी मुहब्बत और हिकमत से हमारे लिए ज़मीन से ये नेअमतें पैदा कीं, क्या हम उसका शुक्र अदा करते हैं? क्या हम उसकी इबादत और उसके हुक्मों को अपनी ज़िंदगी में अपनाते हैं? यही तो असली शुक्र है — अल्लाह की नेअमतों को पहचानना और उसके आगे सर झुकाना। जब हम अपनी रोज़ी की तरफ देखते हैं — फल, अनाज, सब्ज़ियाँ, चारा — तो हमें याद रखना चाहिए कि यह सब किसी इंसान की कारीगरी नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत का नतीजा है। यही सोच इंसान को अल्लाह का करीबी बनाती है और उसके दिल में शुक्र और मुहब्बत पैदा करती है।
अल्लाह ने ज़मीन को ऐसा बनाया कि वह पानी पीकर फटती है और अपने अंदर से तरह-तरह की चीज़ें निकालती है — कभी अनाज, कभी फल, कभी चारा। यह अल्लाह की कुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना है। इसलिए हमें चाहिए कि इन नेअमतों को देखकर अल्लाह की तारीफ़ करें, उसका शुक्र अदा करें और अपनी ज़िंदगी को उसके बताए हुए रास्ते पर चलाएँ। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में सुकून और आख़िरत में कामयाबी देगा।
📜 आयत 29-33 — सूरा अबस
अनुवाद — अबस 31
सूरा अबस आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और चारा (ये सब कुछ) तुम्हारे और तुम्हारेसूरा आयत 31/42 — सूरा अबस عبس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अबस सुनें, सूरा अबस अनुवाद, सूरा अबस mp3, सूरा अबस pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अबस
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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