अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَدَّرَ (क़द्दर): अर्थ है माप-तौल करना, हर चीज़ की एक निश्चित मात्रा, सीमा और स्वरूप निर्धारित करना।
- فَهَدَى (फ़हदा): अर्थ है मार्गदर्शन करना, हर मख़लूक़ (प्राणी) को उसकी ज़रूरत और स्वभाव के अनुसार राह दिखाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और असीम दया का ज़िक्र कर रहे हैं। वही वह ज़ात है जिसने हर चीज़ को पहले से तय कर रखा है — हर मख़लूक़ की क़िस्मत, उसका आकार, उसकी विशेषताएँ, उसकी ज़रूरतें और उसकी मंज़िल — सब कुछ उसी के इल्म और हिकमत के अनुसार निर्धारित है। फिर उसी ने हर प्राणी को उसकी मंज़िल तक पहुँचने का रास्ता भी दिखाया।
ग़ौर करें: एक छोटा सा कीड़ा अपने भोजन तक कैसे पहुँचता है? एक पक्षी अपना घोंसला कैसे बनाता है? एक माँ अपने बच्चे को दूध कैसे पिलाती है? यह सब उसी हिदायत (मार्गदर्शन) का नतीजा है जो अल्लाह ने हर मख़लूक़ को अता की है। यहाँ तक कि पेड़-पौधे भी अपने उगने, फलने-फूलने और फिर सूखने के हर मरहले में अल्लाह के बताए रास्ते पर चलते हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रबूबियत (पालनहार होने) का तक़ाज़ा यह है कि उसने हर चीज़ को सिर्फ़ पैदा ही नहीं किया, बल्कि उसकी हर ज़रूरत का इंतज़ाम भी किया और उसे उसकी मंज़िल तक पहुँचने का रास्ता भी दिखाया।
दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):
इस आयत पर ग़ौर करने से हमारे दिल में अल्लाह की क़ुदरत और उसकी दया के लिए मुहब्बत पैदा होती है। जब हम देखते हैं कि हमारे रब ने हमें सिर्फ़ पैदा ही नहीं किया, बल्कि हमें हिदायत भी दी — हमें सही रास्ता दिखाया, हमें अक़्ल दी, हमें क़ुरआन और सुन्नत के ज़रिए सच्चाई की राह बताई — तो हमारे दिल में शुक्र का जज़्बा पैदा होता है।
यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि जिस रब ने हर मख़लूक़ की रहनुमाई की है, उसने हम इंसानों को भी अकेला नहीं छोड़ा। उसने हमें किताबें और रसूल भेजकर सबसे अच्छी हिदायत दी। इसलिए हमें चाहिए कि हम उसकी दी हुई हिदायत पर चलें, उसके बताए रास्ते पर क़दम बढ़ाएँ, और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
जो व्यक्ति अल्लाह की इस हिदायत को पहचान ले और उस पर चल पड़े, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। क्योंकि जिस रब ने एक चींटी को भी उसकी मंज़िल तक पहुँचाया है, वह अपने बंदे को जन्नत की राह कैसे नहीं दिखाएगा? बस ज़रूरत है तो सिर्फ़ उसकी तरफ़ रुजू करने की, उसकी हिदायत को क़बूल करने की और उस पर साबित-क़दम रहने की।
📜 आयत 1-5 — अल-आला
अनुवाद — अल-आला 3
सूरा अल-आला आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और दुरूस्त किया और जिसने (उसका) अन्दाज़ा मुक़र्रर किया फिर…सूरा आयत 3/19 — अल-आला الأعلى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आला सुनें, अल-आला अनुवाद, अल-आला mp3, अल-आला pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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