अल-फज्र · 19/30
अनुवाद उच्चारण — अल-फज्र
وَتَأْكُلُونَ التُّرَاثَ أَكْلًا لَّمًّا ۝١٩
Wa taakuloonat turaasa aklal lammaa
📖 हिंदी अर्थ
और मीरारा के माल (हलाल व हराम) को समेट कर चख जाते हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • तुरास (التُّرَاثَ): विरासत, मीरास, यानी मृतक के छोड़े हुए धन-दौलत और संपत्ति।
  • अक़्लन लम्मन (أَكْلًا لَّمًّا): ऐसा खाना जो सब कुछ समेट ले, यानी हड़प करके खाना, बुरी तरह से खाना। 'लम्म' का अर्थ है इकट्ठा करना और निगल जाना।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उस ज़माने के लोगों की बुरी आदतों का ज़िक्र कर रहे हैं, जो आज भी कई जगहों पर मौजूद हैं। यह उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो विरासत के माल को हड़प कर खा जाते हैं।

दरअसल, उस दौर के लोगों में यह आम बुराई थी कि वे विरासत में मिलने वाले माल को पूरी तरह से हड़प कर लेते थे। वे कमज़ोरों—औरतों, बच्चों और यतीमों—का हक़ मारते थे। लड़कियों और छोटे बच्चों को विरासत में हिस्सा नहीं देते थे। अगर कोई यतीम बच्चा किसी की देख-रेख में होता, तो वह उसका माल भी हड़प कर लेता और उसे कुछ भी नहीं देता। वे इस तरह से माल खाते थे जैसे कोई भूखा जानवर अपने शिकार को निगल जाता है—बिना किसी रोक-टोक के, बिना किसी हिचकिचाहट के, और बिना यह सोचे कि यह हलाल है या हराम।

यह आयत हमें सिखाती है कि विरासत का माल अल्लाह की ओर से एक अमानत है। इसमें हर हक़दार का हिस्सा है। जो लोग इस अमानत में ख़ियानत करते हैं, कमज़ोरों का हक़ मारते हैं, वे अल्लाह की नज़र में सख्त गुनाहगार हैं।

इस्लाम ने विरासत का पूरा निज़ाम दिया है, जिसमें हर व्यक्ति का हिस्सा अल्लाह ने खुद तय किया है। यह निज़ाम इंसाफ़ और हक़ पर आधारित है। इसलिए हमें चाहिए कि हम विरासत के मामले में पूरा इंसाफ़ करें, किसी का हक़ न मारें, और याद रखें कि यह दुनिया का माल है, जो एक दिन हमें भी छोड़कर जाना है।

प्यारे भाइयों और बहनों! आज भी समाज में यह बुराई मौजूद है। कितने ही लोग हैं जो अपने भाई-बहनों, बेटियों या रिश्तेदारों का हक़ मारकर विरासत का माल हड़प लेते हैं। याद रखिए! अल्लाह तआला हर चीज़ को देख रहा है, और क़यामत के दिन हर हक़ मारने वाले से उसका हिसाब लिया जाएगा। इसलिए अल्लाह से डरें, और विरासत के मामले में पूरा इंसाफ़ करें। यही अल्लाह की रज़ा का ज़रिया है, और यही हमारी दुनिया और आख़िरत की कामयाबी है।



📜 आयत 17-21 — अल-फज्र

17كَلَّا ۖ بَل لَّا تُكْرِمُونَ الْيَتِيمَ
हरगिज़ नहीं बल्कि तुम लोग न यतीम की ख़ातिरदारी करते हो
18وَلَا تَحَاضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ الْمِسْكِينِ
और न मोहताज को खाना खिलाने की तरग़ीब देते हो
19وَتَأْكُلُونَ التُّرَاثَ أَكْلًا لَّمًّا
और मीरारा के माल (हलाल व हराम) को समेट कर चख जाते हो
20وَتُحِبُّونَ الْمَالَ حُبًّا جَمًّا
और माल को बहुत ही अज़ीज़ रखते हो
21كَلَّا إِذَا دُكَّتِ الْأَرْضُ دَكًّا دَكًّا
सुन रखो कि जब ज़मीन कूट कूट कर रेज़ा रेज़ा कर दी जाएगी
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अनुवाद — अल-फज्र 19

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Tuesday, August 18, 2026

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