अल-लैल · 20/21
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-लैल
إِلَّا ابْتِغَاءَ وَجْهِ رَبِّهِ الْأَعْلَىٰ ۝٢٠
Illab tighaaa`a wajhi rabbihil a `laa
📖 हिंदी अर्थ
बल्कि (वह तो) सिर्फ अपने आलीशान परवरदिगार की ख़ुशनूदी हासिल करने के लिए (देता है)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِلَّا — बल्कि, केवल (यहाँ "सिवाय" के अर्थ में नहीं, बल्कि "बल्कि" या "केवल" के अर्थ में है)
  • ابْتِغَاءَ — तलब करना, चाहना, इच्छा करना
  • وَجْهِ رَبِّهِ — अपने रब का चेहरा, यानी अल्लाह की रज़ा और ख़ुशनूदी
  • الْأَعْلَى — सबसे ऊँचा, बुलंद, जो सबसे ऊपर है

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उस मुत्तक़ी (परहेज़गार) इंसान का ज़िक्र कर रहा है जो आग से बचने के लिए अपना माल ख़र्च करता है। यहाँ अल्लाह बता रहा है कि उसका यह ख़र्च किसी इंसान के एहसान का बदला चुकाने के लिए नहीं है, और न ही वह किसी की तारीफ़ या दुनियावी फ़ायदे की ख़्वाहिश रखता है। बल्कि उसका मक़सद सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने रब की रज़ा और उसका चेहरा (यानी उसकी ख़ुशनूदी) हासिल करना है।

यह "वज्ह" (चेहरा) का ज़िक्र अल्लाह की ज़ात की तरफ़ इशारा है, क्योंकि अल्लाह हर ऐब और कमी से पाक है, और उसके लिए "चेहरा" उसकी ज़ात और उसकी रज़ा का प्रतीक है। यहाँ "الأعلى" (सबसे ऊँचा) कहकर अल्लाह की बुलंदी और उसकी हर चीज़ से बरतरी बयान की गई है — वह अपनी मख़लूक़ (सृष्टि) के सारे ऐबों, कमियों और सिफ़ात से पाक और बाला है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि नेकी और ख़ैर के काम करते वक़्त हमारी नीयत सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा होनी चाहिए। जब इंसान अपने माल, वक़्त और ताक़त को सिर्फ़ अल्लाह की ख़ुशनूदी के लिए ख़र्च करता है, तो यही उसकी नजात (मुक्ति) का ज़रिया बनता है। अल्लाह तआला ऐसे बंदे को दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में उसे ऐसी नेमतें अता करेगा जिससे वह राज़ी और ख़ुश हो जाएगा।

इस आयत में एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है — जो इंसान अपने अमल को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस कर लेता है, उसके लिए अल्लाह के पास वह कुछ है जो आँखों को ठंडक और दिल को सुकून देगा। यही असली कामयाबी है — दुनिया के झूठे दिखावे और रियाकारी से बचकर, अपने रब की रज़ा को सबसे बड़ा मक़सद बना लेना। अल्लाह हमें भी अपनी रज़ा की तलब में माल ख़र्च करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 18-21 — सूरा अल-लैल

18الَّذِي يُؤْتِي مَالَهُ يَتَزَكَّىٰ
जो अपना माल (ख़ुदा की राह) में देता है ताकि पाक हो जाए
19وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُ مِن نِّعْمَةٍ تُجْزَىٰ
और लुत्फ ये है कि किसी का उस पर कोई एहसान नहीं जिसका उसे बदला दिया जाता है
20إِلَّا ابْتِغَاءَ وَجْهِ رَبِّهِ الْأَعْلَىٰ
बल्कि (वह तो) सिर्फ अपने आलीशान परवरदिगार की ख़ुशनूदी हासिल करने के लिए (देता है)
21وَلَسَوْفَ يَرْضَىٰ
और वह अनक़रीब भी ख़ुश हो जाएगा
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20आयत

अनुवाद — अल-लैल 20

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Friday, October 2, 2026

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