यूनुस · 60/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَمَا ظَنُّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَشْكُرُونَ ۝٦٠
Wa maa zannul lazeena yaftaroona `alal laahil kaziba Yawmal Qiyaamah; innal laaha lazoo fadlin `alan naasi wa laakinna aksarahum laa yashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बॉधा करते हैं रोजे क़यामत का क्या ख्याल करते हैं उसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा तो लोगों पर बड़ा फज़ल व (करम) है मगर उनमें से बहुतेरे शुक्र गुज़ार नहीं हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَفْتَرُونَ (झूठ गढ़ते हैं) — अल्लाह पर झूठ बाँधना, उसकी ओर ऐसी बातें जोड़ना जो उसने नहीं कहीं।
  • يَوْمَ الْقِيَامَةِ (क़ियामत के दिन) — हिसाब और जज़ा (बदला) का दिन।
  • لَذُو فَضْلٍ (बड़ा कृपालु है) — अल्लाह अपने बंदों पर बड़ी मेहरबानी और एहसान करने वाला है।
  • لَا يَشْكُرُونَ (शुक्र नहीं करते) — अल्लाह की नेमतों का एहसान नहीं मानते और उसकी इबादत नहीं करते।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों को चेतावनी देती है जो अल्लाह पर झूठ बाँधते हैं — यानी उसकी तरफ़ ऐसी बातें जोड़ते हैं जो उसने नहीं कहीं, जैसे कि कुछ चीज़ों को हराम या हलाल ठहराना जबकि अल्लाह ने ऐसा नहीं कहा। अल्लाह पूछता है: ऐसे लोग क़ियामत के दिन क्या सोचते हैं? क्या वे समझते हैं कि अल्लाह उन्हें उनके झूठ का बदला नहीं देगा? क्या वे यह गुमान रखते हैं कि उन्हें माफ़ कर दिया जाएगा और उनके साथ नर्मी बरती जाएगी? हरगिज़ नहीं! अल्लाह उनके झूठ और बदनामी का पूरा हिसाब लेगा।

फिर अल्लाह अपनी कृपा का ज़िक्र करता है — वह लोगों पर बड़ा फज़ल (कृपा) करने वाला है, क्योंकि वह उन्हें मौका देता है, उन पर तुरंत अज़ाब नहीं भेजता, और तौबा करने का दरवाज़ा खुला रखता है। लेकिन अधिकतर लोग इस एहसान का शुक्र नहीं अदा करते — वे अल्लाह की नेमतों को भूल जाते हैं, उसकी इबादत से मुँह मोड़ लेते हैं, और अपनी ज़िद और सरकशी पर अड़े रहते हैं। यह उनकी नादानी और नाशुक्री है।


फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की पकड़ से डरना चाहिए — जो लोग अल्लाह पर झूठ बाँधते हैं या उसके दीन में मनघड़ंत बातें जोड़ते हैं, उन्हें क़ियामत के दिन सख्त सज़ा का सामना करना पड़ेगा। इसलिए हमें अपने अक़ीदे और अमल को क़ुरआन और सुन्नत पर ही रखना चाहिए।
  2. अल्लाह की कृपा का एहसान मानना चाहिए — अल्लाह हमें मौका देता है, हमारी ग़लतियों पर फौरन पकड़ नहीं करता, और तौबा का दरवाज़ा खुला रखता है। यह उसकी बड़ी मेहरबानी है। हमें चाहिए कि इस एहसान का शुक्र अदा करें — ज़बान से, दिल से और अमल से।
  3. शुक्र करना ईमान की निशानी है — जो बंदा अल्लाह का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और नेमतें देता है। नाशुक्री इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देती है। इसलिए हमें हर हाल में अल्लाह का शुक्र करना चाहिए — खुशी में भी और ग़म में भी।
  4. अल्लाह की इबादत और उसकी बताई हुई हलाल-हराम की पाबंदी ही सच्चा शुक्र है — जो लोग अपनी मर्ज़ी से हलाल-हराम बनाते हैं, वे अल्लाह पर झूठ बाँधने वालों में शामिल हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्म को ही सबसे ऊपर मानें और उसी पर चलें।


📜 आयत 58-62 — यूनुस

58قُلْ بِفَضْلِ اللَّهِ وَبِرَحْمَتِهِ فَبِذَٰلِكَ فَلْيَفْرَحُوا هُوَ خَيْرٌ مِّمَّا يَجْمَعُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (ये क़ुरान) ख़ुदा के फज़ल व करम और उसकी रहमत से तुमको मिला है (ही) तो उन लोगों को इस पर खुश होना चाहिए
59قُلْ أَرَأَيْتُم مَّا أَنزَلَ اللَّهُ لَكُم مِّن رِّزْقٍ فَجَعَلْتُم مِّنْهُ حَرَامًا وَحَلَالًا قُلْ آللَّهُ أَذِنَ لَكُمْ ۖ أَمْ عَلَى اللَّهِ تَفْتَرُونَ
और जो कुछ वह जमा कर रहे हैं उससे कहीं बेहतर है (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम्हारा क्या ख्याल है कि ख़ुदा ने तुम पर रोज़ी नाज़िल की तो अब उसमें से बाज़ को हराम बाज़ को हलाल बनाने लगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या ख़ुदा ने तुम्हें इजाज़त दी है या तुम ख़ुदा पर बोहतान बाँधते हो
60وَمَا ظَنُّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَشْكُرُونَ
और जो लोग ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बॉधा करते हैं रोजे क़यामत का क्या ख्याल करते हैं उसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा तो लोगों पर बड़ा फज़ल व (करम) है मगर उनमें से बहुतेरे शुक्र गुज़ार नहीं हैं
61وَمَا تَكُونُ فِي شَأْنٍ وَمَا تَتْلُو مِنْهُ مِن قُرْآنٍ وَلَا تَعْمَلُونَ مِنْ عَمَلٍ إِلَّا كُنَّا عَلَيْكُمْ شُهُودًا إِذْ تُفِيضُونَ فِيهِ ۚ وَمَا يَعْزُبُ عَن رَّبِّكَ مِن مِّثْقَالِ ذَرَّةٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَلَا أَصْغَرَ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْبَرَ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ
(और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मशग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौशन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है
62أَلَا إِنَّ أَوْلِيَاءَ اللَّهِ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
आगाह रहो इसमें शक़ नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजुर्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे
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अनुवाद — यूनुस 60

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Tuesday, August 18, 2026

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