Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَفْتَرُونَ (झूठ गढ़ते हैं) — अल्लाह पर झूठ बाँधना, उसकी ओर ऐसी बातें जोड़ना जो उसने नहीं कहीं।
- يَوْمَ الْقِيَامَةِ (क़ियामत के दिन) — हिसाब और जज़ा (बदला) का दिन।
- لَذُو فَضْلٍ (बड़ा कृपालु है) — अल्लाह अपने बंदों पर बड़ी मेहरबानी और एहसान करने वाला है।
- لَا يَشْكُرُونَ (शुक्र नहीं करते) — अल्लाह की नेमतों का एहसान नहीं मानते और उसकी इबादत नहीं करते।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों को चेतावनी देती है जो अल्लाह पर झूठ बाँधते हैं — यानी उसकी तरफ़ ऐसी बातें जोड़ते हैं जो उसने नहीं कहीं, जैसे कि कुछ चीज़ों को हराम या हलाल ठहराना जबकि अल्लाह ने ऐसा नहीं कहा। अल्लाह पूछता है: ऐसे लोग क़ियामत के दिन क्या सोचते हैं? क्या वे समझते हैं कि अल्लाह उन्हें उनके झूठ का बदला नहीं देगा? क्या वे यह गुमान रखते हैं कि उन्हें माफ़ कर दिया जाएगा और उनके साथ नर्मी बरती जाएगी? हरगिज़ नहीं! अल्लाह उनके झूठ और बदनामी का पूरा हिसाब लेगा।
फिर अल्लाह अपनी कृपा का ज़िक्र करता है — वह लोगों पर बड़ा फज़ल (कृपा) करने वाला है, क्योंकि वह उन्हें मौका देता है, उन पर तुरंत अज़ाब नहीं भेजता, और तौबा करने का दरवाज़ा खुला रखता है। लेकिन अधिकतर लोग इस एहसान का शुक्र नहीं अदा करते — वे अल्लाह की नेमतों को भूल जाते हैं, उसकी इबादत से मुँह मोड़ लेते हैं, और अपनी ज़िद और सरकशी पर अड़े रहते हैं। यह उनकी नादानी और नाशुक्री है।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह की पकड़ से डरना चाहिए — जो लोग अल्लाह पर झूठ बाँधते हैं या उसके दीन में मनघड़ंत बातें जोड़ते हैं, उन्हें क़ियामत के दिन सख्त सज़ा का सामना करना पड़ेगा। इसलिए हमें अपने अक़ीदे और अमल को क़ुरआन और सुन्नत पर ही रखना चाहिए।
- अल्लाह की कृपा का एहसान मानना चाहिए — अल्लाह हमें मौका देता है, हमारी ग़लतियों पर फौरन पकड़ नहीं करता, और तौबा का दरवाज़ा खुला रखता है। यह उसकी बड़ी मेहरबानी है। हमें चाहिए कि इस एहसान का शुक्र अदा करें — ज़बान से, दिल से और अमल से।
- शुक्र करना ईमान की निशानी है — जो बंदा अल्लाह का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और नेमतें देता है। नाशुक्री इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देती है। इसलिए हमें हर हाल में अल्लाह का शुक्र करना चाहिए — खुशी में भी और ग़म में भी।
- अल्लाह की इबादत और उसकी बताई हुई हलाल-हराम की पाबंदी ही सच्चा शुक्र है — जो लोग अपनी मर्ज़ी से हलाल-हराम बनाते हैं, वे अल्लाह पर झूठ बाँधने वालों में शामिल हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्म को ही सबसे ऊपर मानें और उसी पर चलें।
📜 आयत 58-62 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 60
सूरा यूनुस आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बॉधा करते…सूरा आयत 60/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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