यूनुस · 65/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَلَا يَحْزُنكَ قَوْلُهُمْ ۘ إِنَّ الْعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًا ۚ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ۝٦٥
Wa laa yahzunka qawluhum; innal `izzata lillaahi jamee`aa; Huwas Samee`ul `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) उन (कुफ्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक़ नहीं कि सारी इज्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا يَحْزُنكَ: तुम्हें दुखी न करे।
  • قَوْلُهُمْ: उन (मुशरिकों) की बातें, जो वे तुम्हारे बारे में और अल्लाह के बारे में कहते हैं।
  • الْعِزَّةَ: सम्मान, शक्ति, प्रभुत्व और विजय।
  • السَّمِيعُ: सब कुछ सुनने वाला।
  • الْعَلِيمُ: सब कुछ जानने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! मुशरिकों की वे बातें जो वे अल्लाह के बारे में कहते हैं—जैसे उस पर झूठा आरोप लगाना, उसके साथ मूर्तियों को साझीदार ठहराना, और तुम्हारे धर्म की बुराई करना—तुम्हें दुखी न करें। क्योंकि पूरी शक्ति, प्रभुत्व और विजय केवल अल्लाह ही के लिए है, दुनिया और आख़िरत दोनों में। वही सब कुछ सुनता है—उनकी बातें भी—और वही सब कुछ जानता है—उनके कर्म और उनके दिलों के भेद भी। वह उन्हें उनके किए की सज़ा देगा और अपने नबी की सहायता करेगा। इसलिए आप उनकी बातों से दुखी न हों, क्योंकि अल्लाह की शक्ति के आगे उनकी कोई चाल नहीं चल सकती।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि जब हमारे खिलाफ़ लोग बुरी बातें कहें या हमारे दीन का मज़ाक उड़ाएँ, तो हमें दुखी नहीं होना चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि असली इज़्ज़त और शक्ति उसी के हाथ में है।
  2. यह हमें सिखाती है कि अल्लाह हर बात सुनता है और हर काम जानता है—चाहे वह छिपा हो या खुला। यह विश्वास हमें सब्र और स्थिरता प्रदान करता है।
  3. यह आयत मुसलमानों को आश्वस्त करती है कि अंतिम विजय सत्य का ही होगा, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ। अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है और उन्हें दुश्मनों पर ग़ालिब बनाता है।
  4. इससे हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़ुबान और कर्मों का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है, और वह हर एक को उसके कर्मों का बदला देगा।


📜 आयत 63-67 — यूनुस

63الَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ
ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़ुदा से) डरते थे
64لَهُمُ الْبُشْرَىٰ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ ۚ لَا تَبْدِيلَ لِكَلِمَاتِ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की ज़िन्दगी में भी और आख़िरत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है
65وَلَا يَحْزُنكَ قَوْلُهُمْ ۘ إِنَّ الْعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًا ۚ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
और (ऐ रसूल) उन (कुफ्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक़ नहीं कि सारी इज्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है
66أَلَا إِنَّ لِلَّهِ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ ۗ وَمَا يَتَّبِعُ الَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ شُرَكَاءَ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَإِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ
आगाह रहो इसमें शक़ नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फर्ज़ी) शरीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख्याली बातें किया करते हैं
67هُوَ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ لِتَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَسْمَعُونَ
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौशनी में देखो भालो उसमें शक़ नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं)
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अनुवाद — यूनुस 65

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Tuesday, August 18, 2026

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