قَوْلُهُمْ: उन (मुशरिकों) की बातें, जो वे तुम्हारे बारे में और अल्लाह के बारे में कहते हैं।
الْعِزَّةَ: सम्मान, शक्ति, प्रभुत्व और विजय।
السَّمِيعُ: सब कुछ सुनने वाला।
الْعَلِيمُ: सब कुछ जानने वाला।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! मुशरिकों की वे बातें जो वे अल्लाह के बारे में कहते हैं—जैसे उस पर झूठा आरोप लगाना, उसके साथ मूर्तियों को साझीदार ठहराना, और तुम्हारे धर्म की बुराई करना—तुम्हें दुखी न करें। क्योंकि पूरी शक्ति, प्रभुत्व और विजय केवल अल्लाह ही के लिए है, दुनिया और आख़िरत दोनों में। वही सब कुछ सुनता है—उनकी बातें भी—और वही सब कुछ जानता है—उनके कर्म और उनके दिलों के भेद भी। वह उन्हें उनके किए की सज़ा देगा और अपने नबी की सहायता करेगा। इसलिए आप उनकी बातों से दुखी न हों, क्योंकि अल्लाह की शक्ति के आगे उनकी कोई चाल नहीं चल सकती।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि जब हमारे खिलाफ़ लोग बुरी बातें कहें या हमारे दीन का मज़ाक उड़ाएँ, तो हमें दुखी नहीं होना चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि असली इज़्ज़त और शक्ति उसी के हाथ में है।
यह हमें सिखाती है कि अल्लाह हर बात सुनता है और हर काम जानता है—चाहे वह छिपा हो या खुला। यह विश्वास हमें सब्र और स्थिरता प्रदान करता है।
यह आयत मुसलमानों को आश्वस्त करती है कि अंतिम विजय सत्य का ही होगा, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ। अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है और उन्हें दुश्मनों पर ग़ालिब बनाता है।
इससे हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़ुबान और कर्मों का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है, और वह हर एक को उसके कर्मों का बदला देगा।
आगाह रहो इसमें शक़ नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फर्ज़ी) शरीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख्याली बातें किया करते हैं
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौशनी में देखो भालो उसमें शक़ नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं)
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।