हूद · 76/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
يَا إِبْرَاهِيمُ أَعْرِضْ عَنْ هَٰذَا ۖ إِنَّهُ قَدْ جَاءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَإِنَّهُمْ آتِيهِمْ عَذَابٌ غَيْرُ مَرْدُودٍ ۝٧٦
Yaaa Ibraaheemu a`rid `an haazaaa innahoo qad jaaa`a amru Rabbika wa innahum aateehim `azaabun ghairun mardood
📖 हिंदी अर्थ
(हमने कहा) ऐ इबराहीम इस बात में हट मत करो (इस बार में) जो हुक्म तुम्हारे परवरदिगार का था वह क़तअन आ चुका और इसमें शक़ नहीं कि उन पर ऐसा अज़ाब आने वाले वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَعْرِضْ عَنْ هَذَا: इस झगड़े और बहस से मुँह मोड़ लो, इसे छोड़ दो।
  • أَمْرُ رَبِّكَ: तुम्हारे रब का फ़ैसला और आदेश (अज़ाब का)।
  • آتِيهِمْ: उन पर आकर रहने वाला, उन्हें घेरने वाला।
  • غَيْرُ مَرْدُودٍ: जो टलने वाला नहीं, जिसे कोई टाल नहीं सकता।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम की तरह ही क़ौमे-लूत पर भी रहम खाते हुए उनके अज़ाब में टालमटोल की दरख़्वास्त की, तो अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्तों ने उनसे कहा: "ऐ इब्राहीम! इस बहस और सिफ़ारिश से बाज़ आ जाओ। यह वक़्त सिफ़ारिश और दुआ का नहीं, बल्कि अल्लाह के फ़ैसले के नाफ़िज़ होने का है। तुम्हारे रब का आदेश आ चुका है कि इन ज़ालिमों पर अज़ाब नाज़िल हो। यह अज़ाब उन पर आकर रहेगा और इसे कोई टालने वाला, रोकने वाला या वापस करने वाला नहीं है। न कोई दुआ इसे रोक सकती है और न कोई सिफ़ारिश।"

यह बात उन फ़रिश्तों ने उस वक़्त कही जब अल्लाह का फ़ैसला पहले ही सुना दिया गया था कि क़ौमे-लूत पर पत्थरों की बारिश और ज़लज़ला आकर रहेगा। इसलिए अब उनके लिए कोई रहम का दरवाज़ा बाक़ी नहीं बचा था। हज़रत इब्राहीम ने जो महब्बत और शफ़्क़त का जज़्बा दिखाया था, वह उनकी फ़ितरत की पाकीज़गी थी, लेकिन अल्लाह का क़ानून यह है कि जब अज़ाब का वादा मुक़र्रर हो जाता है, तो उसमें कोई तब्दीली नहीं होती।


फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह के फ़ैसले के आगे सर झुकाना चाहिए: जब अल्लाह का फ़ैसला आ जाए, तो उसे मान लेना चाहिए। उस फ़ैसले में किसी तरह की दख़ल-अंदाज़ी या टालमटोल की कोशिश बेकार है।
  2. अल्लाह का अज़ाब टलने वाला नहीं: जब अल्लाह किसी क़ौम पर अज़ाब का फ़ैसला सुना देता है, तो वह ज़रूर आकर रहता है। इससे हमें अल्लाह के वादों पर यक़ीन करना चाहिए और उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए।
  3. नबियों की रहमत और शफ़्क़त: हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का अज़ाब टालने के लिए सिफ़ारिश करना उनकी रहमदिली को दिखाता है। यह हमारे लिए सबक़ है कि हमें भी लोगों के लिए रहम और भलाई चाहनी चाहिए, लेकिन अल्लाह के फ़ैसले के सामने हमें पूरी तरह सर झुका देना चाहिए।
  4. गुनाहगारों के लिए चेतावनी: यह आयत उन लोगों के लिए बड़ी चेतावनी है जो अल्लाह की नाफ़रमानी में मशग़ूल हैं। उन्हें समझ लेना चाहिए कि अल्लाह का अज़ाब जब आएगा, तो कोई उसे टाल नहीं सकेगा। इसलिए बेहतर है कि अज़ाब आने से पहले तौबा कर ली जाए।
  5. दुआ और सिफ़ारिश का अपना वक़्त होता है: दुआ और सिफ़ारिश का दरवाज़ा उस वक़्त तक खुला रहता है जब तक अल्लाह का फ़ैसला न आ जाए। जब फ़ैसला आ जाता है, तो उसके बाद कोई दुआ या सिफ़ारिश काम नहीं आती। इसलिए हमें हर वक़्त अल्लाह की रहमत का दामन थामे रहना चाहिए।


📜 आयत 74-78 — सूरा हूद

74فَلَمَّا ذَهَبَ عَنْ إِبْرَاهِيمَ الرَّوْعُ وَجَاءَتْهُ الْبُشْرَىٰ يُجَادِلُنَا فِي قَوْمِ لُوطٍ
फिर जब इबराहीम (के दिल) से ख़ौफ जाता रहा और उनके पास (औलाद की) खुशख़बरी भी आ चुकी तो हम से क़ौमे लूत के बारे में झगड़ने लगे
75إِنَّ إِبْرَاهِيمَ لَحَلِيمٌ أَوَّاهٌ مُّنِيبٌ
बेशक इबराहीम बुर्दबार नरम दिल (हर बात में ख़ुदा की तरफ) रुजू (ध्यान) करने वाले थे
76يَا إِبْرَاهِيمُ أَعْرِضْ عَنْ هَٰذَا ۖ إِنَّهُ قَدْ جَاءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَإِنَّهُمْ آتِيهِمْ عَذَابٌ غَيْرُ مَرْدُودٍ
(हमने कहा) ऐ इबराहीम इस बात में हट मत करो (इस बार में) जो हुक्म तुम्हारे परवरदिगार का था वह क़तअन आ चुका और इसमें शक़ नहीं कि उन पर ऐसा अज़ाब आने वाले वाला है
77وَلَمَّا جَاءَتْ رُسُلُنَا لُوطًا سِيءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا وَقَالَ هَٰذَا يَوْمٌ عَصِيبٌ
जो किसी तरह टल नहीं सकता और जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते (लड़को की सूरत में) लूत के पास आए तो उनके ख्याल से रजीदा हुए और उनके आने से तंग दिल हो गए और कहने लगे कि ये (आज का दिन) सख्त मुसीबत का दिन है
78وَجَاءَهُ قَوْمُهُ يُهْرَعُونَ إِلَيْهِ وَمِن قَبْلُ كَانُوا يَعْمَلُونَ السَّيِّئَاتِ ۚ قَالَ يَا قَوْمِ هَٰؤُلَاءِ بَنَاتِي هُنَّ أَطْهَرُ لَكُمْ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ فِي ضَيْفِي ۖ أَلَيْسَ مِنكُمْ رَجُلٌ رَّشِيدٌ
और उनकी क़ौम (लड़को की आवाज़ सुनकर बुरे इरादे से) उनके पास दौड़ती हुई आई और ये लोग उसके क़ब्ल भी बुरे काम किया करते थे लूत ने (जब उनको) आते देखा तो कहा ऐ मेरी क़ौम ये मारी क़ौम की बेटियाँ (मौजूद हैं) उनसे निकाह कर लो ये तुम्हारीे वास्ते जायज़ और ज्यादा साफ सुथरी हैं तो खुदा से डरो और मुझे मेरे मेहमान के बारे में रुसवा न करो क्या तुम में से कोई भी समझदार आदमी नहीं है
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
76आयत

अनुवाद — हूद 76

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Monday, September 28, 2026

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