हूद · 99/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَأُتْبِعُوا فِي هَٰذِهِ لَعْنَةً وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ بِئْسَ الرِّفْدُ الْمَرْفُودُ ۝٩٩
Wa utbi`oo fee haazihee la`natanw wa Yawmal Qiyaamah; bi`sar rifdul marfood
📖 हिंदी अर्थ
और (इस दुनिया) में भी लानत उनके पीछे पीछे लगा दी गई और क़यामत के दिन भी (लगी रहेगी) क्या बुरा इनाम है जो उन्हें मिला
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَعْنَةً: रहमत से दूरी और फटकार।
  • الرِّفْدُ: वह चीज़ जो मदद के तौर पर दी जाए, यहाँ अज़ाब मुराद है।
  • الْمَرْفُودُ: वह जो लगातार मिलता रहे और एक के बाद एक आता रहे।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम को दुनिया में भी लानत का मारा और आख़िरत में भी उनके लिए लानत और फटकार है। दुनिया में उन्हें समुंदर में डूबने का अज़ाब दिया गया और उन पर रहमत से दूरी का ऐलान किया गया। क़यामत के दिन भी उन्हें जहन्नम में डालकर लानत दी जाएगी। यह लानत और अज़ाब उन पर इस तरह लगातार आया जैसे कोई मदद पहुँचती है, लेकिन यह मदद नहीं बल्कि बुरी से बुरी चीज़ है जो उन्हें मिली। यानी दुनिया और आख़िरत दोनों जगहों पर उनके लिए अल्लाह की लानत और सख्त अज़ाब है, और यह उनके लिए बहुत बुरा साबित हुआ।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत बताती है कि अल्लाह की नाफ़रमानी और ज़ुल्म का अंजाम दुनिया और आख़िरत दोनों में बुरा होता है। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के हुक्मों का पालन करे और ज़ुल्म से बचे।
  2. लानत यानी अल्लाह की रहमत से दूरी सबसे बड़ी सज़ा है। मुसलमान को चाहिए कि वह ऐसे कामों से बचे जो उसे अल्लाह की रहमत से दूर कर दें।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन वह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है। इसलिए इंसान को कभी निराश नहीं होना चाहिए और हमेशा अल्लाह की तरफ लौटना चाहिए।
  4. अल्लाह का इंसाफ़ यह है कि वह ज़ालिमों को उनके किए की सज़ा देता है, और मोमिनों को उनके सब्र और नेकी का बदला देता है। यह हमें अच्छे कामों पर साबित क़दम रहने की तरग़ीब देता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 97-101 — हूद

97إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَاتَّبَعُوا أَمْرَ فِرْعَوْنَ ۖ وَمَا أَمْرُ فِرْعَوْنَ بِرَشِيدٍ
फिरऔन और उसके अम्र (सरदारों) के पास (पैग़म्बर बना कर) भेजा तो लोगों ने फिरऔन ही का हुक्म मान लिया (और मूसा की एक न सुनी) हालॉकि फिरऔन का हुक्म कुछ जॅचा समझा हुआ न था
98يَقْدُمُ قَوْمَهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَأَوْرَدَهُمُ النَّارَ ۖ وَبِئْسَ الْوِرْدُ الْمَوْرُودُ
क़यामत के दिन वह अपनी क़ौम के आगे आगे चलेगा और उनको दोज़ख़ में ले जाकर झोंक देगा और ये लोग किस क़दर बड़े घाट उतारे गए
99وَأُتْبِعُوا فِي هَٰذِهِ لَعْنَةً وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ بِئْسَ الرِّفْدُ الْمَرْفُودُ
और (इस दुनिया) में भी लानत उनके पीछे पीछे लगा दी गई और क़यामत के दिन भी (लगी रहेगी) क्या बुरा इनाम है जो उन्हें मिला
100ذَٰلِكَ مِنْ أَنبَاءِ الْقُرَىٰ نَقُصُّهُ عَلَيْكَ ۖ مِنْهَا قَائِمٌ وَحَصِيدٌ
(ऐ रसूल) ये चन्द बस्तियों के हालात हैं जो हम तुम से बयान करते हैं उनमें से बाज़ तो (उस वक्त तक) क़ायम हैं और बाज़ का तहस नहस हो गया
101وَمَا ظَلَمْنَاهُمْ وَلَٰكِن ظَلَمُوا أَنفُسَهُمْ ۖ فَمَا أَغْنَتْ عَنْهُمْ آلِهَتُهُمُ الَّتِي يَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مِن شَيْءٍ لَّمَّا جَاءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَمَا زَادُوهُمْ غَيْرَ تَتْبِيبٍ
और हमने किसी तरह उन पर ज़ल्म नहीं किया बल्कि उन लोगों ने आप अपने ऊपर (नाफरमानी करके) ज़ुल्म किया फिर जब तुम्हारे परवरदिगार का (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो न उसके वह माबूद ही काम आए जिन्हें ख़ुदा को छोड़कर पुकारा करते थें और न उन माबूदों ने हलाक करने के सिवा कुछ फायदा ही पहुँचाया बल्कि उन्हीं की परसतिश की बदौलत अज़ाब आया
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अनुवाद — हूद 99

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Tuesday, August 18, 2026

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