यूसुफ · 56/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
وَكَذَٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُفَ فِي الْأَرْضِ يَتَبَوَّأُ مِنْهَا حَيْثُ يَشَاءُ ۚ نُصِيبُ بِرَحْمَتِنَا مَن نَّشَاءُ ۖ وَلَا نُضِيعُ أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ ۝٥٦
Wa kazaalika makkannaa li Yoosufa fil ardi yatabawwa`u minhaa haisu yashaaaa`; nuseebu birahmatinaa man nashaaa`u wa laa nudee`u ajral muhsineen
📖 हिंदी अर्थ
(ग़रज़ यूसुफ शाही ख़ज़ानो के अफसर मुक़र्रर हुए) और हमने यूसुफ को युं मुल्क (मिस्र) पर क़ाबिज़ बना दिया कि उसमें जहाँ चाहें रहें हम जिस पर चाहते हैं अपना फज़ल करते हैं और हमने नेको कारो के अज्र को अकारत नहीं करते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَكَّنَّا: हमने अधिकार और शक्ति दी, स्थापित किया।
  • يَتَبَوَّأُ: वह निवास करता है, जहाँ चाहता है वहाँ रहता है।
  • نُصِيبُ: हम पहुँचाते हैं, प्रदान करते हैं।
  • أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ: नेकी करने वालों का बदला (पुरस्कार)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस प्रकार अल्लाह ने यूसुफ (अलैहिस्सलाम) को जेल से मुक्ति दिलाकर उन पर कृपा की, उसी प्रकार उन्हें मिस्र की धरती पर पूरा अधिकार और शक्ति प्रदान की। वे उस भूमि में जहाँ चाहते थे, निवास करते थे और अपनी इच्छा के अनुसार स्थान चुन सकते थे। यह अल्लाह की विशेष रहमत थी जो वह अपने जिन बंदों को चाहता है, प्रदान करता है। अल्लाह उन लोगों का बदला कभी व्यर्थ नहीं करता जो अच्छे कर्म करते हैं, बल्कि उन्हें उनका पूरा-पूरा प्रतिफल देता है, बिना किसी कमी के। यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने जो धैर्य, सच्चाई और अच्छे आचरण का प्रदर्शन किया, अल्लाह ने उन्हें इसी का बदला दिया और उन्हें ऊँचा पद दिया।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और मदद का द्वार कभी बंद नहीं होता। मुसीबतों और कठिनाइयों के बाद अल्लाह अपने नेक बंदों को खुशहाली और इज़्ज़त प्रदान करता है।
  2. धैर्य और अच्छे कर्मों का फल अल्लाह के यहाँ कभी व्यर्थ नहीं जाता। चाहे दुनिया में देर से मिले, लेकिन अल्लाह अपने नेक बंदों को उनके कर्मों का पूरा बदला देता है।
  3. यह आयत मुसलमानों को यह विश्वास दिलाती है कि अल्लाह की शक्ति असीमित है। वह जिसे चाहता है, ऊँचा उठाता है और जिसे चाहता है, नीचे गिराता है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और अच्छे कर्म करते रहना चाहिए।
  4. सच्चाई, पवित्रता और अच्छे आचरण की बदौलत इंसान दुनिया में भी इज़्ज़त पाता है और आख़िरत में भी कामयाब होता है। यूसुफ (अलैहिस्सलाम) की कहानी इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।
🎧 सुनें

📜 आयत 54-58 — यूसुफ

54وَقَالَ الْمَلِكُ ائْتُونِي بِهِ أَسْتَخْلِصْهُ لِنَفْسِي ۖ فَلَمَّا كَلَّمَهُ قَالَ إِنَّكَ الْيَوْمَ لَدَيْنَا مَكِينٌ أَمِينٌ
इसमें शक़ नहीं कि मेरा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है और बादशाह ने हुक्म दिया कि यूसुफ को मेरे पास ले आओ तो मैं उनको अपने ज़ाती काम के लिए ख़ास कर लूंगा फिर उसने यूसुफ से बातें की तो यूसुफ की आला क़ाबलियत साबित हुई (और) उसने हुक्म दिया कि तुम आज (से) हमारे सरकार में यक़ीन बावक़ार (और) मुअतबर हो
55قَالَ اجْعَلْنِي عَلَىٰ خَزَائِنِ الْأَرْضِ ۖ إِنِّي حَفِيظٌ عَلِيمٌ
यूसुफ ने कहा (जब अपने मेरी क़दर की है तो) मुझे मुल्की ख़ज़ानों पर मुक़र्रर कीजिए क्योंकि मैं (उसका) अमानतदार ख़ज़ान्ची (और) उसके हिसाब व किताब से भी वाक़िफ हूँ
56وَكَذَٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُفَ فِي الْأَرْضِ يَتَبَوَّأُ مِنْهَا حَيْثُ يَشَاءُ ۚ نُصِيبُ بِرَحْمَتِنَا مَن نَّشَاءُ ۖ وَلَا نُضِيعُ أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ
(ग़रज़ यूसुफ शाही ख़ज़ानो के अफसर मुक़र्रर हुए) और हमने यूसुफ को युं मुल्क (मिस्र) पर क़ाबिज़ बना दिया कि उसमें जहाँ चाहें रहें हम जिस पर चाहते हैं अपना फज़ल करते हैं और हमने नेको कारो के अज्र को अकारत नहीं करते
57وَلَأَجْرُ الْآخِرَةِ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ
और जो लोग ईमान लाए और परहेज़गारी करते रहे उनके लिए आख़िरत का अज्र उसी से कही बेहतर है
58وَجَاءَ إِخْوَةُ يُوسُفَ فَدَخَلُوا عَلَيْهِ فَعَرَفَهُمْ وَهُمْ لَهُ مُنكِرُونَ
(और चूंकि कनआन में भी कहत (सूखा) था इस वजह से) यूसुफ के (सौतेले भाई ग़ल्ला ख़रीदने को मिस्र में) आए और यूसुफ के पास गए तो उनको फौरन ही पहचान लिया और वह लोग उनको न पहचान सके
यूसुफकुरान सूची
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अनुवाद — यूसुफ 56

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सूरा आयत 56/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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