Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الكَيْل – नापकर अनाज दिया जाना, यहाँ इसका अर्थ अनाज (खाद्यान्न) है।
- نَكْتَلْ – हम अनाज नापकर लाएँ।
- لَحَافِظُونَ – हम उसकी रक्षा करने वाले हैं, उसे सुरक्षित वापस लाने का वचन देते हैं।
व्याख्या:
जब ये भाई अपने पिता (हज़रत याक़ूब अलैहिस्सलाम) के पास वापस लौटे, तो उन्होंने जाकर बताया कि मिस्र के अज़ीज़ (यूसुफ़ अलैहिस्सलाम) ने उनका बड़ा सम्मान किया और उन्हें खूब अनाज दिया। फिर उन्होंने कहा: "पिता जी! हमारे लिए अनाज लाना बंद कर दिया गया है, अर्थात् जब तक हम अपने भाई (बिन्यामीन) को साथ नहीं लाएँगे, हमें अनाज नहीं मिलेगा। इसलिए आप हमारे साथ हमारे भाई को भेज दीजिए, ताकि हम उसे साथ ले जाकर भरपूर अनाज ला सकें। और हम आपको वचन देते हैं कि हम उसकी पूरी रक्षा करेंगे और उसे सुरक्षित आपके पास वापस ले आएँगे।"
ये भाई अपने पिता से यह आग्रह इसलिए कर रहे थे क्योंकि मिस्र के अज़ीज़ ने उनसे कहा था कि यदि तुम अपने उस भाई को साथ नहीं लाओगे जिसका ज़िक्र तुमने किया है, तो तुम्हें अनाज नहीं दिया जाएगा। उन्होंने अपने पिता को यह भी बताया कि अज़ीज़ ने उनके साथ अच्छा व्यवहार किया और उन्हें सम्मान दिया। साथ ही, उन्होंने अपने भाई की सुरक्षा का ज़िम्मा भी लिया, हालाँकि उनके दिलों में पहले की तरह कोई बुरी नीयत नहीं थी, बल्कि वे सचमुच अनाज लाने के लिए उसे साथ ले जाना चाहते थे।
शिक्षाएँ और फ़ायदे:
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में परिवार के सदस्यों को आपसी सहयोग और भाईचारे से काम लेना चाहिए। भाई अपने पिता से विनम्रता और सम्मान के साथ बात कर रहे हैं, जो हमें सिखाता है कि माता-पिता से बात करने का अंदाज़ नरम और आदरपूर्ण होना चाहिए।
- वचन और ज़िम्मेदारी का पालन करना इस्लाम की महत्वपूर्ण शिक्षा है। भाइयों ने अपने पिता को वचन दिया कि वे बिन्यामीन की रक्षा करेंगे, और यह हमें सिखाता है कि जो वादा किया जाए, उसे निभाना चाहिए।
- जीवन में ज़रूरतें पूरी करने के लिए प्रयास करना और साधन जुटाना इस्लाम में मना नहीं है, बल्कि यह एक अच्छा काम है। भाई अनाज लाने के लिए प्रयास कर रहे थे, जो उनकी ज़िम्मेदारी और परिश्रम को दर्शाता है।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि मुसीबत और तंगी के समय में निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए। भाइयों ने अपने पिता को समझाकर समाधान निकाला, जो हमें सिखाता है कि समस्याओं का सामना धैर्य और समझदारी से करना चाहिए।
📜 आयत 61-65 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 63
सूरा यूसुफ आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और इस लालच में) यायद फिर पलट के आएं ग़रज़…सूरा आयत 63/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


