अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَوَلَّىٰ عَنْهُمْ: उनसे मुँह मोड़ लिया, उनसे अलग हो गए।
- يَا أَسَفَىٰ: हाय अफ़सोस! (अत्यधिक दुःख और पछतावे का उद्गार)
- ابْيَضَّتْ عَيْنَاهُ: उनकी दोनों आँखें सफेद हो गईं (अर्थात् आँखों की पुतलियों की रोशनी चली गई और वे देखने की शक्ति खो बैठीं)।
- كَظِيمٌ: जो अपने दुःख को भीतर ही भीतर दबाए हुए हो, बाहर प्रकट न करता हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों से यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के बारे में वह बातें सुनीं जिनसे उनका दिल और अधिक टूट गया, और उन्हें यह अहसास हुआ कि उनके बेटे उन्हें सांत्वना देने के बजाय उनके दुःख को और बढ़ा रहे हैं, तो वे उनसे मुँह मोड़कर अलग हो गए। उनका दिल उस बात से बहुत दुखी था जो उन्होंने सुनी थी।
उस समय उनके मुँह से निकला: "हाय, मेरा अफ़सोस यूसुफ़ पर!" यह शब्द उस गहरे दुःख और विछोह के दर्द को व्यक्त करते हैं जो उनके हृदय में वर्षों से छिपा हुआ था। वे यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की याद में इतने अधिक रोए कि उनकी आँखों की रोशनी चली गई और आँखें सफेद हो गईं—अर्थात् वे देखने की शक्ति से वंचित हो गए। यह दुःख इतना गहरा था कि उसने उनकी आँखों की पुतलियों को ही बदल दिया।
इस सबके बावजूद, वे अपने दुःख को बाहर प्रकट नहीं करते थे। वे "कज़ीम" थे—अर्थात् वे अपने गम को अपने सीने में दबाए हुए थे, किसी के सामने शिकायत या विलाप नहीं करते थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को केवल अपने रब के सामने रखा और सब्र का दामन नहीं छोड़ा। यह उनके धैर्य और दृढ़ इमान की सबसे बड़ी निशानी है।
फ़ायदे (सीख):
- सब्र की अज़ीम मिसाल: हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की यह हालत हमें सिखाती है कि मुसीबत और दुःख में भी इंसान को अपनी ज़बान और अंदाज़ पर क़ाबू रखना चाहिए। उन्होंने दुःख में भी अल्लाह से शिकायत नहीं की, बल्कि अपने दिल का हाल छिपाए रखा।
- दुःख में भी अल्लाह से जुड़ाव: यह आयत बताती है कि दुःख और ग़म इंसान की फ़ितरत (स्वभाव) का हिस्सा है, लेकिन मोमिन वह है जो दुःख में भी अल्लाह की रज़ा पर राज़ी रहे और उसी से मदद माँगे।
- माता-पिता के दिल का दर्द: यह आयत हमें बच्चों के विछोह में माता-पिता की गहरी मुहब्बत और उनके दिल के दर्द का अहसास कराती है। इससे हमें अपने माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने और उनके दिलों को ठेस पहुँचाने से बचने की सीख मिलती है।
- अल्लाह की रहमत की उम्मीद: यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि जब इंसान सब्र करता है और अल्लाह पर भरोसा रखता है, तो अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता। याक़ूब (अलैहिस्सलाम) का सब्र ही था कि अल्लाह ने उन्हें यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) से मिलाकर उनकी आँखों को फिर से रोशनी दी। इसलिए हमें कभी अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए।
📜 आयत 82-86 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 84
सूरा यूसुफ आयत 84 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और याक़ूब ने उन लोगों की तरफ से मुँह फेर…सूरा आयत 84/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 82–86. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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