इब्राहीम · 16/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
مِّن وَرَائِهِ جَهَنَّمُ وَيُسْقَىٰ مِن مَّاءٍ صَدِيدٍ ۝١٦
Minw waraaa`ihee jahannamu wa yusqaa mim maaa`in sadeed
📖 हिंदी अर्थ
और हर एक सरकश अदावत रखने वाला हलाक हुआ (ये तो उनकी सज़ा थी और उसके पीछे ही पीछे जहन्नुम है और उसमें) से पीप लहू भरा हुआ पानी पीने को दिया जाएगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِن وَرَائِهِ: उसके सामने (यहाँ "वरा" का अर्थ "आगे" या "सामने" लिया गया है, जैसा कि कुरआन की भाषा में यह शब्द कभी-कभी सामने के अर्थ में आता है)।
  • جَهَنَّمُ: नरक, दोज़ख़।
  • يُسْقَى: उसे पिलाया जाएगा।
  • مَاءٍ صَدِيدٍ: बहता हुआ पीब और लहू (खून), जो जहन्नमियों के बदन से बहता है।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उस सरकश और मुतकब्बिर इंसान के अंजाम का ज़िक्र कर रहा है, जो अल्लाह की आयतों को झुठलाता है और अपनी सरकशी में हद से गुज़र जाता है। उसके सामने (यानी उसके आगे, जहाँ उसे जाना है) जहन्नम है, जो उसके इंतज़ार में है। वह उसमें डाला जाएगा और वहाँ उसे पीने के लिए ऐसा पानी दिया जाएगा जो पीब और लहू (खून) का मिला हुआ हो — यानी जो चीज़ जहन्नम के लोगों के बदन से बहती है, वही उसे पिलाई जाएगी। यह पानी न उसकी प्यास बुझाएगा, न उसे कोई राहत देगा, बल्कि उसकी प्यास और बढ़ेगी और उसका अज़ाब और सख़्त होगा। यह उस शख़्स की सज़ा है जिसने दुनिया में अल्लाह की नेअमतों को ठुकराया और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत से दूर रखा।


फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की सज़ा से डरना चाहिए: यह आयत हमें बताती है कि जो लोग अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं और उसके हुक्म से मुँह मोड़ते हैं, उनका अंजाम बहुत भयानक है। इससे हमें अपने अमल की इस्लाह (सुधार) करनी चाहिए।
  2. नेअमतों की क़द्र करनी चाहिए: अल्लाह ने दुनिया में हमें साफ़-सुथरा पानी पीने को दिया, जो प्यास बुझाता है और ज़िंदगी बचाता है। अगर हम उसकी शुक्रगुज़ारी नहीं करेंगे, तो आख़िरत में हमें ऐसा पानी पीना पड़ेगा जो पीब और लहू होगा — यह सोचकर हमें अल्लाह की हर नेअमत पर शुक्र करना चाहिए।
  3. अहमियत आख़िरत की है: दुनिया की चंद रोज़ा ज़िंदगी को ही सब कुछ नहीं समझ लेना चाहिए। असली ज़िंदगी आख़िरत की है, और वहाँ का अज़ाब या इनाम हमेशा रहने वाला है। इसलिए हमें अपने हर अमल में आख़िरत को सामने रखना चाहिए।
  4. अल्लाह की रहमत की क़द्र: अल्लाह ने हमें इस्लाम और ईमान की नेअमत दी है, जिसके ज़रिए हम जहन्नम के अज़ाब से बच सकते हैं। यह हमारे लिए अल्लाह की सबसे बड़ी मेहरबानी है, और हमें इस पर हमेशा शुक्र अदा करना चाहिए और अपने ईमान को मज़बूत करते रहना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — इब्राहीम

14وَلَنُسْكِنَنَّكُمُ الْأَرْضَ مِن بَعْدِهِمْ ۚ ذَٰلِكَ لِمَنْ خَافَ مَقَامِي وَخَافَ وَعِيدِ
और उनकी हलाकत के बाद ज़रुर तुम्ही को इस सरज़मीन में बसाएगें ये (वायदा) महज़ उस शख़्श से जो हमारी बारगाह में (आमाल की जवाब देही में) खड़े होने से डरे
15وَاسْتَفْتَحُوا وَخَابَ كُلُّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ
और हमारे अज़ाब से ख़ौफ खाए और उन पैग़म्बरों हम से अपनी फतेह की दुआ माँगी (आख़िर वह पूरी हुई)
16مِّن وَرَائِهِ جَهَنَّمُ وَيُسْقَىٰ مِن مَّاءٍ صَدِيدٍ
और हर एक सरकश अदावत रखने वाला हलाक हुआ (ये तो उनकी सज़ा थी और उसके पीछे ही पीछे जहन्नुम है और उसमें) से पीप लहू भरा हुआ पानी पीने को दिया जाएगा
17يَتَجَرَّعُهُ وَلَا يَكَادُ يُسِيغُهُ وَيَأْتِيهِ الْمَوْتُ مِن كُلِّ مَكَانٍ وَمَا هُوَ بِمَيِّتٍ ۖ وَمِن وَرَائِهِ عَذَابٌ غَلِيظٌ
(ज़बरदस्ती) उसे घूँट घँट करके पीना पड़ेगा और उसे हलक़ से आसानी से न उतार सकेगा और (वह मुसीबत है कि) उसे हर तरफ से मौत ही मौत आती दिखाई देती है हालॉकि वह मारे न मर सकेगा-और फिर उसके पीछे अज़ाब सख्त होगा
18مَّثَلُ الَّذِينَ كَفَرُوا بِرَبِّهِمْ ۖ أَعْمَالُهُمْ كَرَمَادٍ اشْتَدَّتْ بِهِ الرِّيحُ فِي يَوْمٍ عَاصِفٍ ۖ لَّا يَقْدِرُونَ مِمَّا كَسَبُوا عَلَىٰ شَيْءٍ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الضَّلَالُ الْبَعِيدُ
जो लोग अपने परवरदिगार से काफिर हो बैठे हैं उनकी मसल ऐसी है कि उनकी कारस्तानियाँ गोया (राख का एक ढेर) है जिसे (अन्धड़ के रोज़ हवा का बड़े ज़ोरों का झोंका उड़ा लेगा जो कुछ उन लोगों ने (दुनिया में) किया कराया उसमें से कुछ भी उनके क़ाबू में न होगा यही तो पल्ले दर्जे की गुमराही है
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अनुवाद — इब्राहीम 16

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Tuesday, August 18, 2026

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