अल-हिज्र · 49/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
۞ نَبِّئْ عِبَادِي أَنِّي أَنَا الْغَفُورُ الرَّحِيمُ ۝٤٩
Nabbi` `ibaadeee annneee anal Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) मेरे बन्दों को आगाह करो कि बेशक मै बड़ा बख्शने वाला मेहरबान हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नब्बी' (نبّئ): सूचित करो, बता दो, खबर दो।
  • अना अल-ग़फूरु (أنا الغفور): मैं अत्यंत क्षमा करने वाला हूँ।
  • अर-रहीम (الرحيم): अत्यंत दयालु, दया करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)! मेरे बंदों को सूचित कर दो कि मैं ही वह परम क्षमाशील और असीम दयावान हूँ। मेरी क्षमा का दामन बहुत विस्तृत है और मेरी दया सब कुछ घेरे हुए है। जो बंदा मेरी ओर रुजू हो, अपने गुनाहों से तौबा कर ले और मुझ पर ईमान लाए, तो मैं उसके सारे पाप क्षमा कर देता हूँ और उस पर अपनी विशेष रहमत की बारिश करता हूँ। यह घोषणा मेरी ओर से उन सभी के लिए है जो मेरी पनाह चाहते हैं और मेरी रहमत के भूखे हैं। मेरी यह क्षमा और दया उन लोगों के लिए है जो तौबा करके मेरी ओर लौट आते हैं, चाहे उनके गुनाह कितने ही बड़े क्यों न हों। यह संदेश बंदों को आशा और सुकून देता है कि उनका रब उनसे बेपनाह मुहब्बत करता है और उनकी भलाई चाहता है।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों से इतना प्यार करता है कि उसने खुद अपने नबी के ज़रिए उन्हें अपनी क्षमा और दया की खुशखबरी भेजी। यह उसकी रहमत का सबसे बड़ा सबूत है।
  2. निराशा और मायूसी शैतान का हथियार है। यह आयत हर गुनाहगार को उम्मीद देती है कि अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है, बशर्ते वह सच्चे दिल से तौबा करे।
  3. अल्लाह की क्षमा (ग़ुफ़रान) और दया (रहमत) का ज़िक्र साथ-साथ किया गया है, जिससे पता चलता है कि क्षमा के साथ दया भी जुड़ी हुई है। अल्लाह न केवल गुनाह माफ करता है बल्कि माफ करने के बाद बंदे पर अपनी रहमत और करम भी नाज़िल करता है।
  4. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हमें भी दूसरों के साथ क्षमा और दया का व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों से यही पसंद करता है। जो दूसरों को माफ करता है, अल्लाह उसे और अधिक माफ करता है।
  5. यह आयत मुसलमान के दिल में अल्लाह के प्रति मुहब्बत और उम्मीद पैदा करती है, जिससे वह अपनी ज़िंदगी में नेकियों की तरफ बढ़ता है और गुनाहों से बचता है, क्योंकि वह जानता है कि उसका रब कितना दयावान और क्षमाशील है।


📜 आयत 47-51 — अल-हिज्र

47وَنَزَعْنَا مَا فِي صُدُورِهِم مِّنْ غِلٍّ إِخْوَانًا عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَابِلِينَ
और (दुनिया की तकलीफों से) जो कुछ उनके दिल में रंज था उसको भी हम निकाल देगें और ये बाहम एक दूसरे के आमने सामने तख्तों पर इस तरह बैठे होगें जैसे भाई भाई
48لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُم مِّنْهَا بِمُخْرَجِينَ
उनको बेहश्त में तकलीफ छुएगी भी तो नहीं और न कभी उसमें से निकाले जाएँगें
49۞ نَبِّئْ عِبَادِي أَنِّي أَنَا الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
(ऐ रसूल) मेरे बन्दों को आगाह करो कि बेशक मै बड़ा बख्शने वाला मेहरबान हूँ
50وَأَنَّ عَذَابِي هُوَ الْعَذَابُ الْأَلِيمُ
मगर साथ ही इसके (ये भी याद रहे कि) बेशक मेरा अज़ाब भी बड़ा दर्दनाक अज़ाब है
51وَنَبِّئْهُمْ عَن ضَيْفِ إِبْرَاهِيمَ
और उनको इबराहीम के मेहमान का हाल सुना दो
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अनुवाद — अल-हिज्र 49

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Tuesday, August 18, 2026

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